लेखक परिचय

मदन तिवारी

मदन तिवारी

जागरण समूह के नईदुनिया डॉट कॉम में ट्रेनी सब एडिटर। इसके इतर बीते दो वर्षों से देश के विभिन्‍न प्रतिष्ठित अख़बार जैसे : अमर उजाला (कॉम्‍पैक्‍ट), जनसंदेश टाइम्‍स, प्रजातंत्र लाइव, दैनिक दबंग दुनिया, दैनिक जागरण, डेली न्‍यूज एक्टिविस्‍ट समेत तमाम अन्‍य अखबारों में करीबन 100 के आसपास संपादकीय लेखन। इसके साथ ही वर्तमान समय में कानपुर के जागरण कॉलेज में स्‍नातक का तृतीय वर्ष में पत्रकारिता विद्यार्थी।

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chota rajanसोमवार दोपहर होते ही देश के साथ साथ विश्व के तमाम मीडिया टीवी चैनल्स, न्यूज़ वेबसाइट्स में डॉन राजेंद्र सदाशिव निखलजे उर्फ़ छोटा राजन की गिरफ़्तारी की ख़बरें प्रकाशित होने लगी। छोटा राजन की गिरफ़्तारी की खबर के साथ साथ उसकी तस्वीर भी प्रकाशित हुई जिससे देश की जनता और सरकार ने चैन की सांस ली। छोटा राजन की यह गिरफ़्तारी इंडोनेशिया के बाली शहर के एयरपोर्ट से केंद्रीय जांच ब्यूरो के ऑस्ट्रलिया, इंडोनेशिया की पुलिस और इंटरपोल की सक्रियता से संभव हो सकी है। बताया जा रहा है कि छोटा राजन के ऑस्ट्रेलिया में फर्जी तरीके से रहने की गुप्त जानकारी भारतीय एजेंसियों को बीते सितम्बर माह में ही मिल गयी थी जिसके बाद एक बड़ी कार्रवाई में उसको गिरफ्तार किया गया।

भारत के मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल छोटा राजन के ऊपर देश ही नहीं बल्कि विश्व के भी कई देशों में दर्जनों मुक़दमे दर्ज है। उसपर कई बड़े हमलों से लेकर प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार जे.डे. की हत्या करवाने का भी आरोप है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई थी कि वरिष्ठ पत्रकार जे.डे. विगत कई महीनों से लगातार छोटा राजन के काली करतूतों की परतों को खोल रहे थे जिसकी वजह से कुछ वर्षों पहले मुंबई में उनकी हत्या की गयी।

गिरफ्तारी के फ़ौरन बाद से ही डॉन छोटा राजन को भारत में लाकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई किये जाने का प्रयास शुरू हो चुका है। इसी वजह से छोटा राजन के गिरफ्तार होते ही केंद्र सरकार ने सीबीआई के कई बड़े अफसरों को इंडोनेशिया भेज दिया है और अंदेशा लगाया जा रहा है कि जल्दी ही छोटा राजन को देश में ले भी आया जायेगा।

छोटा राजन की हुई गिरफ्तारी को मोदी सरकार की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जाने लगा है। कई बुद्धिजीवियों व इस तरह के मसलों पर बढ़िया पकड़ रखने वालों की मानें तो ये डॉन छोटा राजन की गिरफ्तारी केंद्र की भाजपा सरकार के लिए बड़ी कामयाबी की तरह है। क्योंकि बीते कई महीनों में दाल के बढ़ते दामों, बीफ पर मचे बवाल व एक विशेष धर्म, समुदाय के खिलाफ हुई कई दर्दनाक घटनाओं से प्रधानमंत्री मोदी को भी आड़े हाथों लिया जा रहा था। देश की मीडिया के साथ-साथ विदेशी मीडिया में भी इन घटनाओं के जिक्र होने से केंद्र सरकार की छवि पर भी बदनुमा दाग लगने लगा था। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के दौरान रैलियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को जड़ से ख़त्म करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने छोटा राजन, दाऊद जैसे कई खूंखार आतंकियों और डॉन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की बात की लेकिन सत्ता पर काबिज़ हुए सालभर से अधिक समय होने के बाद भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न होने से जनता का केंद्र सरकार से मोहभंग होने लगा था।

बहरहाल, अब जबकि डॉन छोटा राजन की गिरफ़्तारी इंडोनेशिया के बाली शहर के एयरपोर्ट हो चुकी है तो इसका सीधा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केंद्र सरकार को दिया जा सकता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उनके कबीने के मंत्रियों के प्रयासों के बगैर यह गिरफ्तारी बहुत मुश्किल थी। डॉन की गिरफ़्तारी के इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय सरकार में रक्षा मंत्री वीके सिंह भी शामिल रहे। सूत्रों के अनुसार, छोटा राजन की गिरफ्तारी के समय वीके सिंह इंडोनेशिया में मौजूद थे और पूरी कार्रवाई पर नज़र बनाये हुए थे।

विगत दिनों में कई मुद्दों पर चौतरफा घिर चुकी केंद्र सरकार के लिए डॉन छोटा राजन की यह गिरफ्तारी वरदान साबित हो सकती है। छोटा राजन के पकडे जाने का सीधा असर बिहार में चल रहे विधानसभा चुनावों पर भी पड़ने की पूरी उम्मीद है। बिहार चुनाव में अब तक हुई वोटिंग के लब्बोलुआब से भाजपा के पिछड़ने की बात निकल कर सामने आ रही है। इसी कारणवश अंदाजा लगाया जा रहा है कि छोटा राजन की इस गिरफ्तारी से बिहार के पढ़ा-लिखे तबके पर सकारात्मक असर हो सकता है और अब तक विरोधी खेमे में जाने वाला यह वोट कुछ प्रतिशत बिहार भाजपा की झोली में आ सकता है।

हालाँकि, डॉन की इस गिरफ्तारी पर सवालिया निशान भी लगने लगे हैं। भाजपा के विरोधी खेमे के साथ-साथ मीडिया में भी छोटा राजन की इस तरह से हुई गिरफ़्तारी पर ऊँगली उठने लगी। गिरफ़्तारी पर यह सवाल उसकी उस तस्वीर के बाद उठा है जिसमे वह मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहा है। इंटरपोल द्वारा खींची गयी इस तस्वीर के सामने आने से गिरफ्तारी पर यह बहस शुरू हो गयी है कि क्या छोटा राजन ने खुद को गिरफ्तार करवाया है क्योंकि एक समय दाऊद के बेहद करीब रहे इस डॉन को अब उसी से जान का खतरा मंडराने लगा था। खुफिया अधिकारी भी कई दफे इस ओर इशारा कर चुके थे कि छोटा राजन पर दाऊद व छोटा शकील हमले करवा सकता है। इसलिए हो सकता है कि अपनी जान के खतरे को देखते हुए छोटा राजन ने खुद ही अपने आप को गिरफ्तार करवाने की बात की हो।

खैर, अब जब आतंक और अपराध की दुनिया में राज करने वाला छोटा राजन गिरफ्तार हो चुका है तो केंद्र सरकार को देश का एक अन्य मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहीम को भी पकड़ कर देश में लाये जाने का प्रबंध करना चाहिए। इससे दाऊद इब्राहीम द्वारा मुंबई में कराये गए धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों को उचित न्याय मिल सकेगा।

मदन तिवारी

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