लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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अरब देश अपने आप को मुसलमान कहते हैं लेकिन उनका इस्लाम उन्हें आपस में जोड़ने की बजाय तोड़ रहा है। क़तर नामक देश के साथ सउदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमारात, बहरीन, लीब्या और यमन ने अपने सभी प्रकार के संबंध तोड़ लिये हैं। ये सभी इस्लामी देश हैं। क्यों तोड़े हैं, इन्होंने अपने संबंध ? इन राष्ट्रों ने आरोप लगाया है कि क़तर आतंकवाद को पालता-पोसता है। वह फिलस्तीन के हमास, सीरिया के ‘दाएश’, मिस्र के इखवान और अरब देशों के अल-कायदा की सक्रिय सहायता करता है। उसकी राजधानी से चलनेवाली समाचार समिति और टीवी चैनल ‘अल-जज़ीरा’ इन तत्वों का घुमा-फिराकर समर्थन करता है। इसी खबरिया चैनल ने अभी 10-15 दिन पहले क़तर के शासक अमीर अल-थानी का एक बयान जारी कर दिया था, जिसमें उन्होंने यह अरोप लगाया था कि अमेरिका और खाड़ी के देश ईरान के साथ फिजूल सख्ती कर रहे हैं। थानी के इस बयान से ये अरब देश भड़क गए लेकिन थानी का कहना है कि उनके खबरिया चैनल को ‘हेक करके’ कुछ बदमाश तत्वों ने उनके नाम से यह बयान जारी कर दिया था।

जो भी हो, क़तर का यह बहिष्कार जबर्दस्त है। ऐसा बहिष्कार पहले सुनने या पढ़ने में नहीं आया। आधा दर्जन से भी अधिक देश, जिनके क़तर से गहरे धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं, वे इस छोटे-से देश पर सभी प्रकार के प्रतिबंध एक साथ लगा रहे हैं। इन देशों में रहनेवाले क़तारियों को 14 दिन में लौट जाने के लिए कहा गया है। क़तर से अब कोई देश किसी भी प्रकार का व्यापार नहीं करेगा। क़तर की हवाई उड़ाने इन देशों में नहीं जा सकेंगी। क़तर में उसकी खपत का जो 40 प्रतिशत खाद्यान्न सउदी अरब के जरिए आता है, वह बंद हो जाएगा। क़तर दुनिया का सबसे बड़ा चूल्हा-गैस का उत्पादक है। ये अरब देश उससे गैस खरीदना बंद कर देंगे। जाहिर है कि यह बहिष्कार लंबा नहीं चल सकता, क्योंकि बहिष्कारकर्त्ता देश की जनता की भी कठिनाइयां बढ़ेंगी। शायद डोनाल्ड ट्रंप कुछ हस्तक्षेप करें, क्योंकि क़तर में 10 हजार अमेरिकी सैनिकों का अड्डा दनदना रहा है। इस मामले में भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। भारत के सउदी अरब और अमारात के साथ-साथ क़तर और ईरान से भी अच्छे संबंध हैं। आतंकवाद का भी भारत दुनिया में सबसे बड़ा शिकार और सबसे बड़ा विरोधी है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को मोदी यदि कुछ पहल करने दें तो वे निश्चय ही इस मामले को सुलझा सकती हैं।

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