लेखक परिचय

भुवन जोशी

भुवन जोशी

भुवन जोशी, न ही कोई संत हैं, न ही कोई साधू या महात्मा. वर्ष २०१२, जगह पाकिस्तान, भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी के १६० साल पुराने मंदिर को कुछ कट्टर मुस्लिम पंथियों ने तोड़ दिया जिसकी गूँज भारत तक सुनाई दी ! तत्पश्चात, भुवन जोशी ने अपनी कलम को उठा लिया और एक ऐसे ब्लॉग का निर्माण किया जिसके द्वारा भगवान गुरु गोरक्षनाथ की ख्याति ६० से भी अधिक देशों तक पहुंचा दी और हज़ारों लोगों के जीवन को प्रभावित किया ! भुवन जोशी एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं जो मल्टी-नेशनल कंपनी में जोब करते हैं !

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untitledकहाँ से आई हिन्दू धर्म में संख्या १०८ और कैसे संख्या १०८ हमें ईश्वर से मिलवा देती है? कैसे हैं भगवान शिव सबके रक्षक?
हिन्दू मान्यता से जुड़े अनेकों रहस्य आज भी किसी को पता नहीं हैं! आज के आर्टिकल के जरिये दो सबसे बड़े रहस्य खोलने जा रहा हूँ …………
प्रथम रहस्य
आज यह जानते हैं की हिन्दू धर्म में संख्या १०८ कहाँ से आई और क्यों आई ! ईश्वर को हिन्दू धर्म में ब्रह्म माना गया है ! ब्रह्म अर्थात सत्य ! ब्रह्म अर्थात जो श्रिष्टि को बनाने वाला, पालन करने वाला और श्रिष्टि की रक्षा करने वाला है ! ब्रह्म अर्थात जो श्रिष्टि के कण कण में व्याप्त है ! आज हम तीर्थ स्थानो में विभिन्न मान्यताओं के आधार पर भ्रमण के लिए जाते हैं यह सोचकर की ब्रह्म की प्राप्ति होगी ! आप चाहे किसी भी देवी देवता के नाम का सुमिरन करें किन्तु जिस जप माला द्वारा सुमिरन किया जाता है उसमे १०८ मोती होते हैं ! अगर आप भगवान विष्णु को मानते हैं तो तुलसी के माला से नाम (मन्त्र) जपेंगे ! अगर आप भगवान शिव को मानते हैं तो रुद्राक्ष की माला से नाम (मन्त्र) जपेंगे ! अगर आप भगवती भवानी को मानते हैं तो लाल चन्दन की माला से नाम (मन्त्र) जपेंगे ! सोचने की बात यह है की हर माला में १०८ मोती ही होंगे ! क्या संख्या १०८ हमको हमारे ईष्ट देवी देवता से मिलवा देगी ! क्या ईश्वर ने स्वयं ही हमको संख्या १०८ दी है !
चाहे आप भगवान विष्णु का सुमिरन करें या भगवान शिव का सुमिरन करें अंत में सब कुछ ब्रह्म में ही लीं होता है ! ईश्वर के सहस्त्रों नाम हैं ! कोई विष्णु कहता है और कोई शिव ! बड़े बड़े योगी महायोगी हज़ारों वर्षों तक तपस्या करते हैं ब्रह्म की प्राप्ति के लिए ! ब्रह्म अर्थात सत्य जो सर्वव्यापक है ! ब्रह्म ही आपको भगवान विष्णु से मिलवाता है और ब्रह्म ही आपको शिव से मिलवाता है ! ब्रह्म को आश्रय देने वाला परम-ब्रह्म कहलाता है ! भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों को ही हिन्दू धर्म में परम-ब्रह्म माना गया है! किन्तु परम-ब्रह्म का मार्ग ब्रह्म से होकर ही जाता है !
कुछ लोग ऐसी धारणा भी रखते हैं की १०८ तीर्थ करने के पश्चात ब्रह्म की प्राप्ति हो जाती है! कुछ लोग यह मानते हैं १०८ मोती की माला से निरंतर भगवान के नाम का जाप करने से ब्रह्म की प्राप्ति हो जाती है!
संख्या १०८ में तीन संख्या सम्माहित होती हैं ! संख्या एक (१) यह बताती है ईश्वर एक है ! संख्या शून्य (०) यह बताती है की ईश्वर निर्गुण निराकार है ! संख्या आठ (८) यह बताती है जो ईश्वर को एक और निर्गुण निराकार समझे वही अष्ट सिद्धियों को प्राप्त कर ब्रह्म में लीं होता है ! जब जीव की आत्मा ब्रह्म में लीं होती है तत्पश्चात ही परम-ब्रह्म से साक्षात्कार होता है ! आत्मा ब्रह्म में लीं कैसे होती है ? जब जीव ईश्वर के एक (१) नाम को लेकर आगे बढ़ता है और उस नाम में ही ईश्वर को सगुन-साकार और निर्गुण-निराकार स्वरूपों में देखता है तत्पश्चात जीव को अष्ट (८) सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं और वो ब्रह्म में लीं हो जाता है !
प्रकृति को ब्रह्म का स्वरुप माना जाता है ! प्रकृति की सुंदरता ही ब्रह्म की सुंदरता है ! प्रकृति परिवर्तनशील होती है ! ब्रह्म में कभी भी परिवर्तन नहीं होता ! जो जीव प्रकृति के सामान परिवर्तनशील होता है उसको ब्रह्म की प्राप्ति नहीं होती ! ब्रह्म की प्राप्ति के लिए जीव को एक (१) को ही मानके चलना होता है ! चाहे आप राम को जपें या कृष्ण को जपें या शिव को जपें सभी मार्ग आपको ब्रह्म की ओर ही ले जाएंगे जैसे गंगा, जमुना और सरस्वती अंत में सागर में ही मिल जाती हैं !
अब यह जानते हैं कैसे आई संख्या १०८ और कौन है लेकर लाया संख्या १०८ ?
साक्षात भगवान शिव स्वरुप भगवान गुरु गोरक्षनाथ जी ने ब्रह्म का महात्म्य समझाया और बताया १०८ संख्या स्वयं ब्रह्म संसार में लेकर है आया !
हमारी शिक्षा का आधार वर्णमाला है !
क ख ग घ ङ
च छ ज झ ञ
ट ठ ड ढ ण
त थ द ध न
प फ ब भ म
य र ल व
स श ष ह
क्ष त्र ज्ञ
ब्रह्म = ब + र + ह + म
अब वर्णमाला को देखते हुए इन चार अक्षरों की जिनसे ब्रह्म शब्द की उत्पत्ति हुई स्थान संख्या निकालेंगे !
ब्रह्म = ब (२३) + र (२७) + ह (३३) + म (२५) = १०८
इस प्रकार १०८ संख्या संसार में आई ! ब्रह्म से उत्पन्न हुई संख्या १०८ ! ब्रह्म अर्थात वह सत्य जो संसार के कण कण में व्याप्त है ! इसलिए जिस माला से हम हमारे इष्ट का नाम जपते हैं उसमे १०८ मोती होते हैं ! इसलिए १०८ तीर्थ करने के पश्चात ऐसा माना जाता है ब्रह्म की प्राप्ति हो जाती है ! इस १०८ संख्या से जुडी अनेकों मान्यताएं हमारे भारत देश में विभिन्न रूपों में मानी जाती हैं जिसका आधार ब्रह्म है !
दूसरा रहस्य
भगवान शिव सम्पूर्ण श्रिष्टि का मूल आधार हैं ! भगवान शिव ही सर्व्यापक परमात्मा हैं जिनकी शक्ति से सम्पूर्ण जगत व्याप्त है ! भगवान शिव ही आदिनाथ, भगवान शिव ही भोलेनाथ और भगवान शिव ही गोरक्षनाथ हैं ! शिव तत्व संसार के कण कण में व्याप्त है ! यही शिव तत्व ब्रह्म है जिसको मैंने प्रथम रहस्य के रूप में आज आपको समझाया ! भगवान शिव के १२ ज्योतिर्लिंग भारत देश में स्थापित हैं ! अगर आप १२ ज्योतिर्लिंगों को भारत देश के नक़्शे पर ध्यान से देखेंगे तो आपको यह ज्ञात हो जाएगा की भगवान शिव साक्षात खड़े होकर भारत देश की रक्षा कर रहे हैं !
भगवान शिव शक्तिपति हैं ! हिन्दू मान्यता के अनुसार तेंतीश कोटि देवी देवता भगवान शिव की शक्ति से ही संपन्न हैं ! पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु को भी सुदर्शन चक्र भगवान शिव ने ही दिया था ! भगवान शिव ही सम्पूर्ण भारत देश के रक्षक हैं !

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