लेखक परिचय

विनोद बंसल

विनोद बंसल

लेखक इंद्रप्रस्‍थ विश्‍व हिंदू परिषद् के प्रांत मीडिया प्रमुख हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं एवं अंतर्जाल पर समसामयिक विषयों पर नियमित लेखन।

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netaविनोद बंसल

भारत ने अभी हाल ही में अपनी स्वतंत्रता की 66वीं वर्षगांठ तो मना ली किन्तु देशवासियों के मन में अनेक अनुत्तरित् प्रश्न अब भी जैसे के तैसे खडे हैं। क्या सच्चे माइने में हम स्वतंत्र हैं? क्या वर्तमान शासन व्यवस्था वास्तव में जनता द्वारा जनता के लिए है? क्या भारत के प्रत्येक नागरिक को रोटी कपडा, मकान, सुरक्षा, शिक्षा व रोजगार के साथ अपने स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार मिल सकता है। आजादी के बाद हमने प्रगति तो बहुत की किन्तु अभी भी राजनीति में चहुँ ओर व्याप्त भ्रष्टाचार, अपराधीकरण तथा छुद्र राजनैतिक लालच से प्रेरित निर्णयों के कारण आम नागरिक त्राहिमाम् कर रहा है।

इन सभी समस्याओं की जड है लोकतंत्र के मन्दिर संसद में बडी संख्या में पहुंचने वाले दूषित चरित्र के निरंकुश शासक जो अपने स्व की तो चिन्ता करते हैं किन्तु तंत्र(जनता) के प्रति प्राय: उदासीन ही रहते हैं। गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, अशिक्षा व असुरक्षा जैसी महामारीयों से यदि देश को बचाना है तो हमें चुनाव सुधारों हेतु तत्काल प्रभावी कदम उठाने पडेंगे। अभी हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय तथा आर टी आई ट्राइब्यूनल के ऐतिहासिक निर्णयों के अलावा चुनाव आयोग द्वारा भी अनेक सराहनीय कदम तो उठाए गए हैं किन्तु इन सभी निर्णयों को निश्प्रभावी बनाने हेतु भी राजनैतिक दलों में एक जुटता देखी जा रही है। देश वासियों के हितों के विरुद्ध राजनेताओं की यह एक जुटता किसी गंभीर खतरे से कम नहीं आंकी जा सकती है। देश की राजनीति को सुचितापूर्ण बनाने हेतु निम्नांकित बिंन्दू भारत के नागरिकों को इन सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति दिलाने में मील के पत्थर साबित होंगे:

अ)              चुनाव से पूर्व किए जाने वाले कार्य:

1         मतदाता सूचियों की गहन छानबीन कर उसमें से फ़र्जी नाम हटाए जाएं तथा जो मतदान योग्य नागरिक छूट गए हैं वे सभी शामिल किए जाएं। किसी भी विदेशी नागरिक का नाम उसमें न हो इसकी पुख्ता व्यवस्था की जाए।

2        जाति, मत, पंथ, संप्रदाय, भाषा, धर्म व राज्य के आधार पर विभाजनकारी आंकड़ों के प्रसारण व प्रकाशन पर पूर्ण रोक के साथ प्रत्याशियों द्वारा इनके उपयोग पर प्रतिबंध हो इससे देश के सामाजिक व धार्मिक ताने-बाने को कोई नुकसान न पहुँचे।

3        वोट डालने के अधिकार के साथ मतदाता को, उसके कर्तव्य का बोध भी कराया जाए जिससे अधिकाधिक मतदाता जागरूक होकर बड़ी संख्या में मतदान कर सकें। मतदान हेतु अनिवार्य छुट्टी की व्यवस्था तो कर दी किन्तु जब तक नियोक्ता अपने सभी कर्मचारियों की उंगली देख कर यह सुनिश्चित न करे कि जिस कर्मचारी ने मतदान नहीं किया उसका वेतन काट दिया गया है, छुट्टी का कोई अर्थ नहीं है। 

4        प्रत्येक मतदाता को अनिवार्य मतदान हेतु प्रेरित किया जाए। मतदान से जानबूझकर या निरंतर वंचित रहने वाले नागरिकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही भी की जा सकती है।

5        मतदान की प्रणाली को सरल, सुगम व सर्वग्राह्य बनाने हेतु इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों के अलावा ई-नेट वोटिंग जैसे प्रावधान करने चाहिए जिससे कोई भी और कहीं भी आसानी से मतदान कर सके। इनसे देश का तथाकथित उच्चवर्ग जैसे उद्योगपति, प्रशासनिक अधिकारी, बुद्धजीवी व बड़े व्यवसाइयों के अलावा चुनाव प्रक्रिया में सहभागी अधिकारी व कर्मचारी भी आसानी से किंतु अनिवार्य रूप से मतदान कर सकेंगे।

6        अपराधियों या अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोका जाए।

7        चुनाव लड़ने हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, अनिवार्य स्वास्थ्य जाँच, अधिकतम आयु सीमा निर्धारित हो।

8        किसी भी राजनेता को संवैधानिक पद दिये जाने से पूर्व उसकी वह सभी छानबीन की जानी चाहिए जो एक सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति हेतु आवश्यक है।

9        राजनैतिक दलों को आर टी आई के अन्तर्गत लाया जाए।

10     प्रत्येक प्रत्याशी को एक न्यूनतम घोषणा पत्र और उसके पालनार्थ न्यूनतम मापदण्ड निश्चित किए जाएं।

11      चुनावों से पूर्व किसी बडी लोक-लुभावन वोट लालची योजना की घोषणा सम्बन्धी बडे बडे विज्ञापनों पर रोक लगे।

12     सभी सरकारी विज्ञापनों (विशेषकर नेताओं के जन्म दिवस या पुण्य तिथियों के अवसर पर) में नेताओं की फ़ोटो या उनका गुणगान नहीं हो। जिस फ़ोटो में किसी नेता का फ़ोटो या नाम हो, उसका खर्च उसी से लिया जाए। अन्यथा नाम के स्थान पर उसका पद ही पर्याप्त है।

ब)     चुनावों के दौरान :

13     दुराचारी, अपराधी, अशिष्ट या अनचाहे सभी प्रत्याशियों को चुनाव से दूर रखने हेतु “नो वोट” के गोपनीय मतदान की व्यवस्था हो। एक निश्चित प्रतिशत से अधिक नो वोट पडने पर सभी प्रत्याशी चुनाव में खडे होने के लिए अयोग्य घोषित किए जाएं।

14     धन-बल के दुरुपयोग को रोकने तथा योग्य उम्मीदवार को चुनाव लडने हेतु सबल बनाने के लिए चुनाव का समस्त खर्च सरकार वहन करे।

15     मतदान केन्द्र व निर्वाचन कार्यालयों की वीडियो रिकार्डिंग हो।

16     प्रत्येक मतदाता को उससे सम्बन्धित प्रत्येक प्रत्याशी का सम्पूर्ण विवरण सरल ढंग से चुनाव आयोग द्वारा भेजा जाए जिससे मतदान से पूर्व सही व्यक्ति के चुनाव हेतु मतदाता को सहयोग मिल सके।

स)    चुनावों के उपरान्त :

17     प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि के अनिवार्य बहुमुखी प्रशिक्षण की व्यवस्था हो जिसमें उससे सम्बन्धित कार्य का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाए।

18     चुने हुए जन प्रतिनिधियों के कार्य का वार्षिक अंकेक्षण व मूल्यांकन करा रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए जिससे जनता अपने जन प्रतिनिधि के कार्य का सही सही दर्शन कर सके। इसमें आर्थिक पक्ष के साथ साथ जन प्रतिनिधि का सामाजिक चेहरा भी सामने आए कि वह कितनी बार जनता के बीच रहा और कितनी बार उसने जनता की आवाज सदन में उठाई।

19     प्रतिवर्ष प्रत्येक जन प्रतिनिधि के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता व नैतिकता की जांच कर यह रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

20   जन प्रतिनिधि को अपराधी ठहराए जाने या सजा सुनाए जाने के तत्काल बाद उसको पद्च्युत करने की व्यवस्था हो। इस कार्य की जांच पडताल हेतु प्रत्येक राज्य में एक निगरानी तंत्र की व्यवस्था हो जिसमें राज्य के महाधिवक्ता, अभियोजन महा निदेशालय, सूचना व प्रसारण विभाग व मीडिया के प्रतिनिधि शामिल हों ।

21     जिस सदन (यथा संसद, विधानसभा, विधान परिषद्) के लिए प्रत्याशी चुना जाए उससे अनुपस्थित रहने या जनता के बीच कार्य करने में अक्षम या उदासीन रहने पर जन प्रतिनिधि के विरुद्ध कार्यवाही की व्यवस्था हो। यानि, राइट टू रिकाल की भी व्यवस्था हो।

 

भारतीय ग्रंथों में भी कहा गया है कि ‘यथा राजा तथा प्रजा’ अर्थात जैसा राज वैसी ही उसकी प्रजा।
उपरोक्त सुझावों के सकारात्मक क्रियान्वयन हेतु प्रबुद्ध नागरिक मंच की और से एक अपील भी भारत के राष्ट्रपति तथा मुख्य चुनाव आयुक्त से की गई। यदि त्वरित कार्यवाही हुई तो न सिर्फ़ स्व-तंत्र की मजबूत नींव रख देश की दिशा व दशा दोनों ठीक होंगीं बल्कि भारत पुन: सोने की चिडिया बन राम राज्य की ओर लौटेगा।

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1 Comment on "देश के लिए अति महत्वपूर्ण 21 सुझाव"

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NARENDRASINH
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बड़े खेड़की बात है कि ऐसी बात पर किसी ने कोई विचार नहीं दिए क्योंकि ये देश के लिए जररी है ??

हमारी मानसिकता कैसी हो गयी है अगर किसी ने कांग्रे या केजरी के खिलाफ लिखा होता तो सब उतर जाते मैदान में मगर देश हित कि बात करेंगे तो सबको सांप सूंघ गया हो !!!

उत्तम लहक क्लोकसाहि के लिए जरुरी है ये सब बाते !

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