लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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waterमृत्युंजय दीक्षित

जिस प्रकार से जलस्रोतों के भंडार सूख रहे हैं व प्रदूषित हो रहे हैं उससे विशेषज्ञों ने कहना प्रारम्भ कर दिया है कि अब अगला विश्वयुद्ध जल के लिए हो सकता है। इसके कुछ दर्दनाक व सामाजिक सरोकार को झकझोर कर रख देने वाली घटनाएं घटी है जिनके बारे में अभी से ही सचेत हो जाना चाहिये। यदि जलसंकट का समाधान न निकाला गया तो वह दिन दूर नहीं जब जल के लिए मल्ल होंगे। जगह -जगह जाम लगेंगे। जल के लिए मारपीट आम बात हो जायेगी। वैसे अभी समाज में इतनी ईमानदारी व भलमनसाहत शेष बची है कि लोग कम से कम पानी के लिए मना नहीं करते हैं और कुछ भलमनसाहत लोग जरूरतमंद परिवारों को पानी की समस्या से उबारने में मदद भी कर रहे हैं। आज पूरा लखनऊ ही नहीं लगभग पूरा यूपी ही जलसंकट से जूझ रहा है। जब रमजान का पवित्र माह प्रारम्भ होता है और होली, दीपावलि या फिर सावन का महीना आता है तो जल निगम और नगर निगम आम जनमानस को स्वच्छ पेयजल, साफ- सफाइ्र्र का वायदा करते हैं लेकिन इस बार की गर्मियों मे रमजान के पवित्र माह में भी सरकारी प्रशासन की ओर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का वायदा धरा का धरा रह गया है। आज पूरा लखनऊ स्वच्छ जल के लिए तड़प रहा है। विशेषकर पुराने लखनऊ में तो इतना गंदा, बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा है कि पूछो मत। यह पानी जब स्वयं के नहाने लायक नहीं रह गया है तो किसी प्यासे की प्यास कैसे मिटेगी। जबकि जलनिगम दावा कर रहा है कि लखनऊ का पानी स्वच्छ हैं इसे खूब पीजिये। जबकि हकीकत कुछ और ही कहानी बया कर रही है। पुराने लखनऊ में बहुत से टयुबवेल रिबोर कराने लायक हो गये हैं आम जनता अफसरों के पास जा जाकर थक गयी है लेकिन अफसर भी बिचारे क्या करें वह हर बार आमत जनता को आश्वासन दे देते हैं। सरकारी कार्यालयों में लेटलतीफी व पुराने पड़ चुके कानूनों व रखरखाव की वजहो से भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

यह बात तो सभी लोग जानते हैं कि जनता को स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ पानी का प्रयोग करना चाहिये लेकिन स्वच्छ पानी नसीब कहा हो रहा है।अभी अप्रैल, मई और जून के प्रथम सप्ताह में लखनऊ शहर के छह जोनों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई गयी। कुल ३३० नमूने लिये गये जिसमें ११९ नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। जलकी के जीएम राजीव बाजपेयी का कहना है कि टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने का मतलब यह नहीं हैं की पानी पीने के योग्य नहीं है। उनका कहना है कि अगर सुबह या शाम को लिये गये नमूनों की पहली रिपोर्ट निगेटिव आती है तो वहां पर दोबार सैंपलिंग कराई जाती है। यदि यह रिपोर्ट भी निगेटिव आती है तो उस सैंपल का कान्जीक्यूटिव टेस्ट किया जाता है यदि परिणाम निगेटिव आता है तो फालोअप टेस्ट किया जाता है । फालांेअप टेस्ट परिणाम भी निगेटिव आये तो पेयजल का बैक्टीरियोलाजिकल टेस्ट किया जाता है। यदि इस टेस्ट का परिणाम भी निगेटिव आये तो पेयजल को प्रदूषित माना जायेगा। उनका कहना है कि जब ११९ निगेटिव रिपोर्ट वाले क्षेत्रों में जब शाम की आपूर्ति की जांच कराई गयी तो यह सही पाया गया। राजीव कुमार बाजपेयी का कहना है कि भारत सरकार के वाटर सप्लाई मैनुअल के अनुसार यदि जांच किये गये कुल नमूनों में से ५० प्रतिषत नमूने पाजीटिव पाये जाते हैं तो पानी पीने के योग्य माना जाता है। जबकि सरकारी दावों के विपरीत आलमबाग, ओमनगर वार्ड, रूचिखंड सहित पुराने लखनऊ के अनेक मूहल्ले विशेषकर फतेहगंज गल्ला मंडी में तो पानी और वह भी स्वच्छ जल के लिए पूरी गर्मी से लेकर अभी तक हाहाकार मचा हुआ है। नियमित स्वच्छ वाटर सप्लाई को लेकर प्रशासन उदासीन है। पुराने लखनऊ के अधिकंाश टयूबवेल रिबोर कराने के लायक हो गये हैं। लेकिन उनके लिए काम आश्वासनों पर ही टिका है। आज की तारीख में अधिकांश कुएं सूख चुके हैं। वाटर लेवल काफी नीचे जा रहा है, जिसका कारण है कि अदालती आदेशों की अनेदेखी करते हुए आज हर जगह केवल सबमर्सिबल पम्प तेजी से लगाये जारहे है। पुराने लखनऊ के दबंग परिवारों ने इन पम्पों के सहारे अवैध वाटर सप्लाई्र करने का धंधा भी शुरू कर दिया है। अगर यह लोग ऐसा न करें तो पुराने लखनऊ की जनता स्वच्छ पानी की आस में तड़प कर मर जायें। अगर सरकारी मशीनरी ध्यान देती और सजग व जागरूक रहती तो यह हालात ही न उत्पन्न होते।

वहीं दूसरी तरफ बात करें दो लोमहर्षक घटनाओं की जो हमें जल की महत्ता और उसका संरक्षण करने के लिए और अधिक बल तो प्रदान करता ही है साथ ही साथ हमें सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध भी कराता है । ५ जुलाई २०१५ की देर रात को इंदिरानगर के संतपुरम मोहल्ले में एक बुजुर्ग व्यक्ति की केवल पानी के पीट- पीटकर हत्या कर दी गयी। उसी दिन हैंडपम्प लगाने को लेकरसरोजनीनगर थानाक्षेत्र के हिंदूखेड़ा गांव में पार्षद की ओर से लगाये जा रहे हैंडपम्प को लेकर विवाद मारपीट में बदल गया बाद में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पानी को लेकर जगह- जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। जलकल विभाग और नगर निगम अपनी नाकामियां एक- दूसरे पर डाल रहे हैं। जबकि जलकल विभाग के जीएम राजीव बाजपेयी का कहना है कि ६० फीसदी आबादी को ही जल की सही तरीक से पानी की सप्लाई कर रहा है। पानी का संकट केवल अविकसित कालोनियों में है। उनका कहनाहै कि जहां कही जलकल की लाइन बिछी हैं वहां पर निरीक्षण भी किया जाता है। जनता स्वयं इतनी जागरूक है कि जलसंकट होने पर शिकायत दर्ज कराती है। आज की तारीख में जितना वाटर सप्लाई्र होता है उसमें से ७० प्रतिषत से अधिक पानी लीकेज व अन्य कारणों से बर्बाद हो जाता है। यदि यह बर्बादी भी रुक जाये तो वाटर सप्लाई काफी हद तक ठीक रहेगी। लेकिन यहां पर समस्या का समाधान नहीं खोजा जाता है। चाहें जो हो आजकल पानी की सप्लाई नियमित भी नहीं हैं और स्वच्छ भी नहीं है। जिसके कारण बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है।यदि हम अभी न चेते तो लखनऊ की प्राण गोमती जो सूख रही है और जिसकी सफाई का जो ढोंग रचा गया है वह हम ही दर्द देगा। गोमती सफाई के नाम सरकार व स्वयंसेवी संगठनों ने केवल और केवल फोटो खिचवाने का ही काम किया है लेकिन गोमती की हालत और दयनीय होती जा रही है। यदि हम नहीं चेते तो लखनऊ की जनता एक बूंद पानी के लिए तरसेगी।

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