लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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अनिल अनूप
नाना पाटेकर भारतीय फिल्‍मों के अभिनेता हैंl वे लेखक और फिल्‍म निर्माता भी हैं lनाना हिन्‍दी फिल्‍मों के मशहूर अभिनेता माने जाते हैंl उनके अभिनय के सभी कायल हैं और यही कारण है कि उन्‍हें आज तक कई बार राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार और फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जा चुका है lउन्‍हें पद्मश्री सम्‍मान भी मिल चुका है l वे इंडस्‍ट्री में अपने डॉयलाग को बोलने की स्‍टाइल को लेकर काफी मशहूर हैं lउनके अभिनय के दीवाने आपको हर आयु वर्ग में मिल जाएंगे l
नाना का जन्‍म मुरूड-जंजीरा, रायगढ़, म‍हाराष्‍ट्र में हुआ थाl उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम संजनाबाई पाटेकर है l
नाना की पढ़ाई सर जे जे इंस्‍टीट्यूट ऑफ अप्‍लाईड आर्ट, मुंबई से हुई थी l
नाना की शादी ‘नीलाकांती पाटेकर’ से हुई लेकिन बाद में उनका तलाक हो गयाा उनका एक लड़का भी है जिसका नाम मल्‍हार हैl
नाना के करियर की शुरूआत फिल्‍म ‘गमन’ से हुई थी लेकिन इंडस्‍ट्री में उन्‍हें फिल्‍म ‘परिंदा’ से नोटिस किया गया जिसमें उन्‍होंने खलनायक की भूमिका अदा की थीा इस फिल्‍म में उनके अभिनय के लिए उन्‍हें सर्वश्रेष्‍ठ सहायक अभिनेता का राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार और सर्वश्रेष्‍ठ सहायक अभिनेता का फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार भी दिया गयाl इसके बाद उन्‍होंने कई अच्‍छी फिल्‍मों में काम किया और अपने अभिनय का लोहा मनवायाl क्रांतिवीर, खामोशी, यशवंत, अब तक छप्‍पन, अपहरण, वेलकम, राजनीति उनकी प्रमुख फिल्‍मों में से एक हैंl
उनके अभिनय के सभी कायल हैं और यही कारण है कि उन्‍हें आज तक कई बार राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार और फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जा चुका हैा उन्‍हें पद्मश्री सम्‍मान भी मिल चुका हैा वे इंडस्‍ट्री में अपने डॉयलाग को बोलने की स्‍टाइल को लेकर काफी मशहूर हैंl उनके अभिनय के दीवाने आपको हर आयु वर्ग में मिल जाएंगेl
नाना का जन्‍म मुरूड-जंजीरा, रायगढ़, म‍हाराष्‍ट्र में हुआ था lउनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम संजनाबाई पाटेकर है l
नाना की पढ़ाई सर जे जे इंस्‍टीट्यूट ऑफ अप्‍लाईड आर्ट, मुंबई से हुई थीl
नाना की शादी नीलाकांती पाटेकर से हुई लेकिन बाद में उनका तलाक हो गयाl उनका एक लड़का भी है जिसका नाम मल्‍हार हैl
नाना के करियर की शुरूआत फिल्‍म ‘गमन’ से हुई थी लेकिन इंडस्‍ट्री में उन्‍हें फिल्‍म ‘परिंदा’ से नोटिस किया गया जिसमें उन्‍होंने खलनायक की भूमिका अदा की थीl इस फिल्‍म में उनके अभिनय के लिए उन्‍हें सर्वश्रेष्‍ठ सहायक अभिनेता का राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार और सर्वश्रेष्‍ठ सहायक अभिनेता का फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार भी दिया गयाl इसके बाद उन्‍होंने कई अच्‍छी फिल्‍मों में काम किया और अपने अभिनय का लोहा मनवायाl क्रांतिवीर, खामोशी, यशवंत, अब तक छप्‍पन, अपहरण, वेलकम, राजनीति उनकी प्रमुख फिल्‍मों में से एक हैंl
2006 – फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार – अपहरण
1995 – फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार – क्रांतिवीर
1990 – फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार – परिन्दा
2013 – पद्म श्री नाना को मिलाl
अभिनेता नाना पाटेकर का एक बड़ा सपना पुरा हुआ है। अपने इस सपने के पूरा होने से वो इतने खुश हैं कि अब वो अभिनय छोड़ने को भी तैयार हैं।
दरअसल, नाना पाटेकर की महाराष्ट्र के बहुत ही लोकप्रिय नाटक ‘नटसम्राट’ में भूमिका निभाने की सालों से इच्छा थी। रंगमंच पर उनका सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन बड़े पर्दे पर वो सपना साकार हो चुका है। मशहूर अभिनेता और निर्देशक महेश मांजरेकर के निर्देशन में ‘नटसम्राट’ फ़िल्म बन चुकी है और नाना उसमें नटसम्राट की भूमिका निभा चुके हैं। इसीलिए नाना का मानना है की उन्होंने जीवन की सबसे बड़ी भूमिका निभा ली है। अब अगर वो अभिनय से सन्यास ले लें या वो अभिनय छोड़ दें तो उन्हें बुरा नहीं लगेगा।
नाना ने नटसम्राट के प्रचार के समय कहा कि ‘इस भूमिका को निभाने का सालों से सपना था। मैं इस किरदार को रंगमंच पर नहीं निभा पाया मगर जब महेश ने फ़िल्म बनाने के लिए सोचा तो मैं जुड़ गया। ये एक ऐसा किरदार है, जिसे निभाने का हर कलाकार का सपना होता है। मेरा सपना पूरा हो चुका है। मैंने जिस तरह की मेहनत, तैयारी के बाद अभिनय किया है वो देखने लायक है। ये मेरे जीवन का सबसे अच्छा काम है।’
नाना ने यह भी कहा कि ऐसे अभिनय किए नहीं जाते, हो जाते हैं। अब अगर मैं अभिनय छोड़ दूं तो भी मुझे कोई दुख, जीवन में कमी या किसी चीज़ का पछतावा नहीं रहेगा’
महेश मांजरेकर निर्देशित फ़िल्म ‘नटसम्राट’ मराठी भाषा में बनाई गई है, क्योंकि इस नाटक में महाराष्ट्र की संस्कृति और कला है। ये फ़िल्म नए साल पर यानि 1 जनवरी 2017 को प्रदर्शित होगी।
वैसे तो नाना पाटेकर के अभिनय की दुनिया क़ायल है मगर जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन नाना के अभिनय की तारीफ़ करें तो ज़ाहिर है की उन्हें ख़ुशी होगी। बिग बी भी जब किसी का अच्छा अभिनय देखते हैं या कोई अच्छी फ़िल्म देखते हैं तो उसकी सराहना करने से नहीं चूकते। इस बार अमिताभ बच्चन ने नाना पाटेकर को ‘अदभुत’ कहा है।
नाना ने हमसे बात करते हुए कहा कि ‘अमित जी ने शायद ट्रेलर देखा और कहा ‘अदभुत’। मैंने जवाब में धन्यवाद लिखा और लिखा कि और क्या कहूं मैं? तभी अमित जी ने मुझसे कहा कि मैं कहूंगा। फिर उन्होंने कहा की इस किरदार को सिर्फ़ तुम ही कर सकते थे।’
ज़ाहिर है कि जब सदी के महानायक ने ये कह दिया की नटसम्राट के इस किरदार को केवल नाना ही कर सकते हैं, तब इनकी ख़ुशी और बढ़ गई।
नाना ने कहा कि ‘अमित जी मेरे सीनियर हैं और जब कोई सीनियर तारीफ़ करता है तो अच्छा लगता है। वैसे भी कलाकार कभी बूढ़ा नहीं होता। कलाकार बच्चे की तरह होता है और जब कोई उसके अभिनय के लिए पीठ थपथपाता है तो अच्छा लगता है।’
बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन कलाकारों में शुमार नाना पाटेकर आज 65 साल के हो गए हैं। एक अभिनेता के रूप में नाना पाटेकर की पहचान एक ख़ास तरह के “एंग्री यंगमैन” के रूप में है जो अमिताभ और मिथुन चक्रवर्ती से बिलकुल अलग है। विलेन, लीड, कॉमिक हर तरह के कैरेक्टर में अपनी श्रेष्ठता की छाप छोड़ने वाले नाना पाटेकर उर्फ़ विश्वनाथ पाटेकर का जीवन विविध आयामों से भरा पड़ा है।
नाना पाटेकर एक कलाकार घराने से ताल्लुकात रखते हैं। उनके पिता श्री दनकर पाटेकर एक विख्यात पेंटर थे।
नाना पेंटिंग से भी खासा लगाव रखते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं की नाना एक शानदार ‘स्केच आर्टिस्ट’ भी हैं।
साल 1986 में रिलीज हुई अग्नि-साक्षी फिल्म में एक सनकी पति के रोल से आलोचकों की प्रशंसा लूटने वाले नाना की वैवाहिक जिंदगी भी काफी उठापठक भरी रही है।
नाना ने थियेटर एक्ट्रेस ‘नीलकंती’ से विवाह किया जो सफल नहीं रहा और अंतत: दोनों ने आपसी रजामंदी से तलाक ले लिया। हालाँकि नाना तलाक की खबरों का खंडन करते रहे हैं।
नाना पाटेकर म्यूजिक मुख्यतया गायन में काफी रूचि रखते हैं।
अपनी फिल्म यशवंत(1997),वजूद (1998) और आँच(2003) में उन्होंने गाने भी गाये हैं।
अपने ब्राश टाइप डायलॉग के लिए नाना पाटेकर खासे लोकप्रिय हैं।
शायद इसी शैली के कारण वो पूरी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे गंभीर अभिनेता के रूप में जाने जाते हैं।
फिल्मों में आने से पूर्व नाना थियेटर के कलाकार थे।
1978 में अपनी पहली फिल्म ‘गबन’ में वे स्मिता पाटिल के साथ पहली बार रुपहले परदे पर नजर आये।
नाना पाटेकर अपने काम के प्रति खासे गंभीर और ईमानदार माने जाते हैं।
निर्देशक के रूप में कैरियर की पहली फिल्म ‘प्रहार’ में परफेक्शन के लिए नाना ने भारतीय सेना में तीन महीने के कड़ी ट्रेनिंग ली।
इसी दौरान सेना ने उन्हें ‘कैप्टन’ की उपाधि से सम्मानित भी किया।
नाना ‘कोहराम’ और ‘प्रहार’ जैसी फिल्मों में फ़ौजी की भूमिका भी निभा चुके हैं।
अपने 37 साल के शानदार करियर में क्रांतिवीर,परिंदा और अग्निसाक्षी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।
साल 2006 में खलनायक के रूप में फिल्म ‘अपहरण’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
नाना इंडस्ट्री में भाई-भतीजेवाद के कभी पक्षधर नहीं रहे।
स्वयं अपने पुत्र ‘मल्हार पाटेकर’ को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने में उन्होंने कोई मदद नहीं की।
बगैर लाग-लपेट के शांत और सरल जीवन जीने वाले नाना मुंबई की तुलना में अपने गाँव में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
आम-तौर पर नाना को समाज में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों,बच्चों और किसानों के लिए काम करते देखा जा सकता है।
पिछले साल सितम्बर में सूखे से पीड़ित 180 किसानों को नाना ने व्यक्तिगत रूप से 15-15 हजार की धनराशि वितरित की।
इस प्रयास को समाज से जोड़ने के लिए नाना ने मराठी अभिनेता मकरंद अंशकुरे के साथ ‘नाम फाउंडेशन’ नामक NGO की शुरुआत की है।
यह स्वयंसेवी संगठन किसानों के वेलफेयर के लिए काम करता है.किसानो को खेती के नयी तकनीक और आर्थिक सहायता प्रदान करना इस NGO का उद्देश्य है।
नाना फिक्शन वर्ल्ड में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं।
दूरदर्शन की शानदार कॉमिक सीरीज ‘जंगल बुक’ में शेरखान के किरदार को नाना ने अपनी आवाज से कामयाब बनाया।
फिल्म पाठशाला में प्रिन्सिपल का किरदार निभाने वाले नाना ने अपनी पूरी फीस को बच्चों के 5 NGO को डोनेट कर दिया।
नाना को उनके सशक्त अभिनय के कारण 26 जनवरी 2013 को प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया।.
ये तो सवाल था, लेकिन यही विपदा है कि किसानों के आत्महत्या करने संबंधी मामले में हमारे पास सवाल बहुत हैं, पर मुक्कमल जवाब बहुत कम. कई रिपोर्टों में बात सामने आई है कि इसके पीछे लगातार बिगड़ते वातावरण का योगदान है, लेकिन क्या सरकार आत्महत्याओं को रोकने के लिए कोई पहल कर रही है? बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए क्या वाजिब उपाय निकाले जा रहे हैं? जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए क्या कोई कदम उठाये जा रहे हैं?
जन वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंच भी नहीं पा रहा है असल में जो उसके हकदार हैं. अब फ़िर से कुछ सवाल मुंह बाए खड़े हैं और जवाब नदारद है.
किसान की दिक्कत एक किसान ही समझता है
भारतीय सिनेमा में अपने अक्खड़ अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने किसानों की आकांशाओं को एक आस दी है. अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि “एक अभिनेता होने से पहले मैं एक किसान हूं.” हाल ही में भयावह आर्थिक हालातों के चलते आत्महत्या करने वाले किसानों की 180 विधवाओं को नाना ने 15-15 हज़ार रुपये की मदद दी है.
अपनी बात को बड़ी सचेतता से कहते हुए नाना पाटेकर ने कहा कि “बारिश के न आने के कारण किसान को दुबारा फसल बोनी पड़ती है, इसी के चलते अतिरिक्त खर्चे और मेहनत से उसे जूझना पड़ता है. मुझ से जितना हो सकता है मैं आपकी मदद के लिए तैयार हूं.” बात यहीं खत्म नहीं हुई उन्होंने किसानों से कहा कि “आत्महत्या करने से पहले मुझे फ़ोन करें.”
बिजली-पानी होना चाहिए मुहैया
गौरतलब है कि जब नाना पाटेकर फ़िल्में नहीं करते तो अपने फ़ार्म हाउस में खेती-बाड़ी करते हैं. नाना पाटेकर का कहना है कि “वर्तमान समय में किसान को बिजली और पानी के अतिरिक्त और कुछ नहीं चाहिए, आप उसे ये मुहैया करवाईये वो आपको ज़मीन से सोना (अनाज) निकाल कर देगा.”
-अनिल अनूप

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