लेखक परिचय

संजीव कुमार सिन्‍हा

संजीव कुमार सिन्‍हा

2 जनवरी, 1978 को पुपरी, बिहार में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कला और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्रियां हासिल कीं। दर्जन भर पुस्तकों का संपादन। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर नियमित लेखन। पेंटिंग का शौक। छात्र आंदोलन में एक दशक तक सक्रिय। जनांदोलनों में बराबर भागीदारी। मोबाइल न. 9868964804 संप्रति: संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ के सुधी पाठकों और लेखकों के लिए एक शुभ समाचार है। ‘प्रवक्‍ता’ एलेक्‍सा सुपरहिट एक लाख क्‍लब में कल शामिल हो गया। इसकी वर्तमान एलेक्‍सा रैंकिंग  99,424 है। गौरतलब है कि हिंदी की कुछ ही वेबसाइट एलेक्‍सा एक लाख क्‍लब में शामिल है। ‘प्रवक्‍ता’ को एक महीने में लगभग 3 लाख 60 हजार हिट्स मिल रही हैं।

आप जानते होंगे कि प्रवक्‍ता की शुरूआत 16 अक्टूबर, 2008 को हुई थी। तब से लेकर अब तक न केवल इसकी निरंतरता कायम है बल्कि हमने लगातार प्रयास किया कि इसकी गुणवत्ता का स्तर भी बढ़ता रहे। प्रवक्‍ता लोकतांत्रिक विमर्शों का मंच है, जिसका उद्देश्‍य है – मुख्यधारा की मीडिया से ओझल हो रहे जनसरोकारों से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता देना। भाषा, विषयवस्तु और विविधता की दृष्टि से ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’ ने दो साल से कम की अवधि में ही वेब पत्रकारिता में प्रमुख स्थान बना लिया है। प्रवक्ता डॉट कॉम’ पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, मीडिया, पर्यावरण, स्वास्थ्य, साहित्य, कला-संस्कृति, विश्ववार्ता, खेल से संबंधित 2500 से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं। अब तक ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’ से 150 से भी अधिक लेखक जुड चुके हैं।

मैं ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ के संपादक के नाते सुधी पाठकों और लेखकों के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं, जिनके स्नेह और सहयोग के चलते ‘प्रवक्‍ता’ ने इस उपलब्धि को हासिल किया है और जो निरंतर हमारा हौसला अफजाई करते रहे। हमें विश्‍वास है उनका सहयोग हमें भविष्य में भी इसी तरह प्राप्‍त होता रहेगा। इसके साथ ही मैं प्रवक्‍ता के प्रबंधक श्री भारत भूषण जी के प्रति भी आभार प्रकट करता हूं जिनकी अदम्‍य जिजीविषा से यह वेबसाइट नियमित रूप से संचालित हो रही है।

संजीव कुमार सिन्‍हा

संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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61 Comments on "एलेक्‍सा एक लाख क्लब में ‘प्रवक्‍ता’ शामिल"

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Dilip sikarwar
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बधाइ सर जी
यह मजाक नही है/ मेह्नत का फल है/ कारवा रुके नही/ बदे चलो/ प्रतिद्वन्दि ओर भी है/

दिलीप सिकरवार

इक़बाल हिंदुस्तानी
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संजीव जी और भूषन जी की म्हणत रंग ला रही है. हार्दिक बढ़ाई स्वीकार करें. एक शेर पेश है. सदाक़त हो कहीं भी खुद बी खुद मशहूर होती है , कभी कहती नहीं खुशबू सूंघ लो मुझ को. संपादक पब्लिक ऑब्ज़र्वर नजीबाबाद.

Mahesh Kaushik
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congrats. for incredible work.

P.C. RATH
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‘ प्रवक्ता. काम ‘ की बढ़ती लोकप्रियता और सफलता आपकी टीम के अथक प्रस्यासों के सुपरिणाम के साथ यह भी बतलाती है की परिवर्तन का दौर शुरू हु चुका हैआपके प्रयासों ने जिन बुलंदियों को छुआ है उसके लिए सम्पादक संजीव जी और भारतभूषण जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. इस दौर में जब सत्य की प्रायोजित ह्त्या बड़ी बेरहमी से की जा रही है, ऐसे में . बिके राष्ट्रीय मीडिया से लोग उकताने लगे हैं. सुप्रभात के ये सुन्दर संकेत हैं. जागरण के इस काल का प्रहरी और पुरोधा बनाने की की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ आपका, पी. सी.… Read more »
sadhak ummedsingh baid
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haardik badhaaii.

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