लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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saadhu    शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य व्यक्ति को किसी रोज़गार के लियें तैयार करना होता है। पहले विज्ञान, वाणिज्य, कला, इंजीनियरिंग,  चिकित्सा और वकालत के अलावा स्नातक स्तर पर अधिक विषय नहीं पढ़ाये जाते थे, समय के साथ  पत्रकारिता, फैशन, अभिनय जैसे क्षेत्र में हर स्तर के 4-6 महीने से लेकर 3 साल के डिग्री कोर्स होने लगे। कम्प्यूटर  के आते ही हर गली नुक्कड़ पर कम्प्यूटर कोर्स की दुकाने खुल गईं।  विश्वविद्यालयों में कम्प्यूटर  इंजीनियरिंग, BCA और MCA काफी लोकप्रिय हुए।

आजकल देश विदेश में बाबाओं और गुरुमाताओं के लियें रोज़गार के बहुत अवसर हैं। अभी तक ये लोग अपनी योग्यता और बुद्धि के बल पर ही अपना कारोबार चला रहे हैं क्योकि इस विषय में शिक्षा संस्थान  कहीं उपलब्द्ध नहीं हैं। शिक्षा के बिना भी यह व्यवसाय ख़ूब फलफूल रहा है, उचित शिक्षा मिलने से इसमें और निखार आयेगा। वैसे तो  चोरी डकैती ,धोख़ाधड़ी, लूटपाट, तस्करी और भ्रष्टाचार भी व्यवसाय हैं पर इन्है गैर कानूनी माना जाता है इसलियें  इनसे संबधित कोर्स नहीं खोले जा सकते, पर बाबागिरी  / मातागिरि को तो बड़ा आदर सत्कार मिलता है, अतः ये कोर्स खोलने में कोई दिक्कत नहीं होगी,  बहुतों को लाभ होगा।

इस पाठ्यक्रम में सबसे पहले छात्रों को बाबा या माता के ‘लुक’ के बारे में, उसके महत्व के बारे में पढ़ाया जायेगा  इस व्यवसाय में ‘लुक’ का महत्व अभिनेताओं से अधिक है। फिल्मी अभिनेता हर फिल्म के लिये एक नहीं कभी कभी दो ‘लुक’ में आते हैं। हीरोइन भी एक फिल्म में कई ‘लुक’ दिखा सकती है। टी.वी. धारावाहिक में ‘लीप’ पर  हल्का सा ‘लुक’ बदलने की गुंजाइश होती है, परन्तु बाबा और गुरुमाताओं को आजीवन एक ही ‘लुक’ में रहना पड़ता है जिससे उनके भक्तों  (clients) का ध्यान न भटके।

‘लुक’ के अंतर्गत कई उप विभाग होंगे जैसे ‘’स्टाइलिंग,’’ “ हेयर स्टाइलिंग’’,   ‘’फैशन डिज़ाइनिंग”,     ’’फुटवेयर  (खड़ाऊं) डिज़ाइन’’,  “ मेकअप आर्टिस्ट’’,’’ कम्प्यूटर ग्राफिक विशेषज्ञ’’ और’’ फोटौग्राफर’’। इस विभाग में छात्रों से ज़्यादा फैकल्टी को काम करना पड़ेगा। छात्रों को सिर्फ  स्टाइलिस्ट द्वारा चलने,       उठने   बैठने के तरीके, उपयुक्त वेश भूषा के साथ सिखाये जायेंगे। फोटौग्राफर विभिन्न ‘लुक्स’ में समय समय पर इनके चित्र लेते रहेंगे जिन्हे ग्राफिक डिज़ाइनर अपने तरीकों से उलट पलट कर, सजाकर अच्छे से अच्छा ‘लुक’ देंगे।  सभी छात्रों के लियें कमसे कम 100 ‘लुक’ तैयार करने ज़रूरी   होंगे,  जिनका एक पोर्टफोलियो बनेगा।

‘लुक’ के बाद इनको भाषा विभाग से भी दूसरे सैमेस्टर में गुज़रना होगा। भाषा विभाग से गुज़रने के बाद इनके   औडियो और विडियो बनेंगे। भाषा विभाग मे इन्हे कहाँ से काम की शुरुआत करनी है उस भाषा का एक मुख्य पेपर पास करना होगा। हिन्दी  इंगलिश बोलने का भी तरीका भी सिखाया जायगा जो भले ही सही न हो पर लोगों को आकर्षित करे, शाँत भाव से बोलते बोलते कहीं कोई चुटकी ले लेना, कभी कोई शेर जड़ देना आदि। अच्छा वक्ता बनना ज़रूरी है, बात में क्या  कुछ तथ्य है ये भक्त ख़ुद ढूँढ लेंगे। थोड़ा बहुत गीता पढ़ा दी जायगी। रामायण की कहानी या कबीर, रहीम, रैदास के दोहे चुनकर, कम से कम 5 प्रवचन तैयार करने होंगे, इनके अलग अलग ‘लुक’ में छात्रों के औडियो विडियो बेंनेगे। ये पहले साल का कोर्स होगा। इसी बीच चुने हुए औडियो विडियो धार्मिक चैनलों पर भेजने का भी प्रावधान फैकल्टी करेगी।

पहले वर्ष की परीक्षा को पार करके तीसरे सेमेस्टर में इन्हे मनोवैज्ञानिक तथ्यो को बिना समझाये उनका इस्तेमाल  अपने फ़ायदे के लियें करना सिखाया जायेगा।  सामाजिक मनोविज्ञान से भीड़ का मनोविज्ञान, भीड़ में अफ़वाहें  कैसे फैलती हैं, इन्हे अपने पक्ष में कैसे कर सकते है, सिखाया जायेगा। एक पेपर ‘ब्रेनवाश’ का होगा कि जिसमें भक्तों (clients) के दिमाग़ की ऐसी धुलाई करना सिखाया जायेगा कि भावी बाबा या गुरु मां पर भक्तों के मन मे कोई शंका न  हो, भक्तों का विवेक तर्क और धीरे धीरे मर जाय, वो पूरी तरह अंधभक्त बनकर बाबा या माता का अनुसरण करें और अपनी जेबे ख़ाली करें। हिप्नोटिज़म की भी शिक्षा दी जायेगी। जो छात्र हिप्नोटिज़म न पढ़ना चाहें उनको जादू सीखना होगा वही हवा मे हाथ घुमाकर कुछ निकालना वगैरह।

छात्रों को अपना व्यवसाय पूरी ईमानदारी से करने के लिये कारोबारी सदाचार (business ethics ) चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जायेगा। सबसे पहले उन्हे समझाया जायगा कि वह चाहें जितना कमायें पर आय कर समय पर दें चाहें थोड़ा कम दें।  हर काम कानून के दायरे में रहकर करें। दूसरों के धर्मो या अपने व्यवसाय के अन्य लोगों से रिश्ते न बिगाडे। आतंकवाद न फैलायें।   महिलाओं पर कुदृष्टि न डालें। अपने व्यवसाय की गरिमा बनाये रक्खें।

तीसरे साल यानि पाँचवा सैमेस्टर छात्रों को किसी वरिष्ठ बाबा या माता के पास प्रशिक्षण के लियें भेजा जायेगा, इन आश्रमों के प्रतिनिधि आकर छात्रों को चुनकर अपने आश्रम (कम्पनी)  में इंटर्न रखेंगे। वहाँ किये कामकाज की  रिपोर्ट तैयार करके फैक्ल्टी को देनी होगी, इस पर एक समूह वार्ता भी होगी।

अंतिम सैमेस्टर में छात्रों को कुछ भक्त ढूँढने का प्रोजेक्ट दिया जायेगा। भक्तों को पहली बार ढूँढने के लिये संस्थान संभावित भक्तों को आर्थिक प्रलोभन देने की आज़ादी देगा। 50 भक्त पैसे देकर और 50 भक्त वाक्चातुर्य के बल पर इकठ्ठे करने होंगें, उनका ब्रेनवाश करना होगा।  इस प्रौजेक्ट के द्वारा छात्रों को अपनी योग्यता सिद्ध करनी होगी। पूरे प्रौजेक्ट रिपोर्ट अंतिम प्लेसमैंट में बहुत काम आयेगी।

बड़े बड़े आश्रमो के प्रतिनिधि प्लेसमैंट के लियें देश विदेश से बुलाये जायेंगे, जो बहुत आकर्षक पैकेज योग्य छात्रों  को देगें। सभी छात्र आर्थिक रूप से इतने सशक्त नहीं हो पायेंगे कि फौरन अपना आश्रम खोललें। कुछ वर्ष का अनुभव लेने के बाद सभी छात्र अपना आश्रम खोल पायें, इस डिग्री का पाठ्यक्रम इसी बात को ध्यान में रखकर बहुत शोध के बाद तैयार किया गया है।

अब इस रिपोर्ट की एक एक प्रति भारत सरकार और राज्य सरकारों के शिक्षा विभाग तथा UGC को भेजी जा रही है। इस रिपोर्ट को शिक्षा विभाग पता नहीं कहाँ कहाँ घुमायेगा, कितनी कमैटी पास करेंगी, इसलियें इसकी एक प्रति मीडिया को भी भेज रही हूँ। मीडिया को कम से कम 24 धन्टे बहस करने का मसाला मिल जायेगा, वो तो कृतज्ञ हो जायेंगे फिर जब प्राइवेट विश्वविद्यालय मीडिया पर यह रिपोर्ट देखेंगे तो इसके फायदे गिनते गिनते इन संस्थानो के खुलने की होड़ लगते देर नहीं लगेगी।

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3 Comments on "बी.ए.आनर्स इन बाबागिरी / मातागिरी"

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Apoorv
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Very nice and innovative…:)

विजय निकोर
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विजय निकोर

बीनू जी,

आपकी हास्य-कल्पना को नमन !
एकदम नया-ताज़ा विचार है आपका।

सादर,
विजय निकोर

Binu Bhatnagar
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धन्यवाद विजय भाई

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