लेखक परिचय

केशव आचार्य

केशव आचार्य

मंडला(म.प्र.) में जन्‍म। माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से प्रसारण पत्रकारिता में एमए तथा मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल कीं। वर्तमान में भोपाल से एयर हो रहे म.प्र.-छ.ग. के प्रादेशिक चैनल में कार्यरत।

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-केशव आचार्य

तेग मुंसिफ हो जहां दारो रसन हो शाहिद

बेगुनाह कौन है इस शहर में कातिल के सिवा…..?

एक तरफ आंसूओं से डबडबाई आंखें……पिछले २५ सालों के जख्मों को महसूस कर रही होगीं….तो दूसरी तरफ सत्तासीन कहीं दूर शादी के जश्न मे डूबे तमाम लोग……..ये दो चेहरे हैं एक हैं अपने हक के लिए लड़ रहे उन मासूम लोगों का जिन्होनें अपने जीवन का सब कुछ लुटा दिया है….. दूसरा चेहरा है….उन सफेदपोशों का जिन्होंने कुछ दिनों पहले ही कोर्ट के फैसले को लेकर हाय तौबा की थी…………कुछ महीने ही बीते हैं लेकिन अब इन सफेदपोशों के लिए हजारों लोगों के आंसूओं का मोल शायद ही कुछ बचा हो…..कभी राज्य और कभी केंद्र के पालों के बीच झूलते ये बेबस ना जाने कितनी बार छले गये हैं….इनके लिए आज वो रात उतनी भयावह और डरावनी नहीं जितनी कि इन नेताओं की बातें हैं…….हर साल भोपाल गैस त्रासदी के नाम पर हो रहे पाखंड के बीच फंसी जनता को इंतजार है तो इस बात का किआखिर कब उन्हें सही न्याय मिल पायेगा….लंबी लडाई के बाद जिन्हें अगर कुछ मिला भी तो किसी मजाक से कम नहीं था………..जिन लोगों को मुआवजा मिला और जितना मिला यदि प्रति व्यक्ति हिसाब लगाया जाया तो मौत के इस तांडव की कीमत महज ५ रू दिन है……ये मलहम है उन हुक्मरानों का जिन्होंनें इन अभागे जिंदा बच गये लोगों की कीमत लगाई……। शुरूआती समय में यह राशि तय की गई थी महज कुछ हजार जानों औऱ लाखों के घायलों के लिए जिस बांटा गया कई गुना ज्यादा लोगों के बीच……। पर हालात अब भी नहीं बदलें हैं….लोगों के बीच अपनों को खोने का दुख आज भी उतना ही ताजा है……आज भी लोग जब उन गलियों से गुजरते हैं तो बिछडों की यादें बरबस ही उन्हें रूला जाती हैं…..यह भोपाल की बिडंवना है कि भोपाल गैस कांड की बरसी पर प्रदेश के तमाम जिम्मेदाराना लोग दूर कहीं….सफेदपोशों के माफिख जीहुजूरी में लगें होगे…….कोई मातहत को खुश करने प्लेट लिये दौडा जा रहा होगा तो कोई…..किसी के लिए शरबत का इंतजाम करने की भागमभागम में लगा होगा…..ये वही लोग हैं जो कुछ दिन पहले ही भोपाल गैस कांड पर आये फैसले को न्याय की बलिवेदी पर इन मरहूम आत्माओं की आत्महत्या मान रहे थे….और आज जब भोपाल में तमाम जिंदा और चलती फिरती लाशें अपनों को याद कर रही होगीं…..तो ये नदारत होगें….। २६ सालों का दर्द आज भी इनके सीने में उसी रफ्तार से दौड रहा है ….यह अलग बात है कि इन सवा पांच लाख लोगों का दर्द सरकार और उनके हुक्मरानो के लिए महज एक मंहगी दुर्घटना के बदले

मे निकले धुएं के अलावा और कुछ भी नहीं है…तब से लेकर अब तक देश में आठ बार प्रधानमंत्री की कुर्सी बदली, मध्य प्रदेश में आठ नए मुख्यमंत्री बने ……लेकिन फिर भी इन बड़े नेताओं को कभी भी यह नहीं लगा कि भोपाल में

जो घोर अन्याय हुआ है, उसका प्रायश्चित होना चाहिए….। आज इस नरक यात्रा की २६ वीं वर्षगांठ है….और एक बार इन नरक यात्री के साथ है तो केवल उनके प्रियजनों की यादें और उनके आंसू….और एक बार फिर खत्म ना होने वाला लंबा इतंजार……ठीक इसी वक्त बाबा धरणीधर याद आते हैं…

“…हर जिस्म जहर हो गया एक दिन

मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन

फर्क था न लाश को जात पांत का

नस्ल रंग आज सब साथ साथ था

हिंदू का हाथ थामते मुस्लिम का हाथ था

जां जहाँ था मौत के हाथ था…

हर जर्रा शरर हो गया भोपाल एक दिन

मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन..”

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15 Comments on "मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन"

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pradeep sharma
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में नहीं जानता इस जंग का अंजाम …….मुझमे लड़ने का खूं सवार हे |
सीपेसालार का होंसला आपसे हे ………meri तलवार में पूरी हुंकार हे |
शायर-pradeep शर्मा,मंदसौर

Manoj Singh
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कहने को तो बहुत कुछ है आचार्य, लेकिन सोचता हूं कि सुनेगा कौन। जिस आतंकवादी ने मुंबई में २६/११ को डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों का कत्ल किया आज उसी के उपहर सजा दिलाने के नाम रोजाना लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, संसद पर हमला करने वाले को आज तक फांसी नहीं दी जा सकी, २ जी स्प्रेक्टम में करोड़ों रुपये का घोटाला सिर्फ इस्तीफे से माफ किया जा रहा है……तो फिर हम कैसे उम्मीद करें की भोपाल गैस कांड के आरोपियों को सजा मिल सकेगी।

nandkishor kushwah
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घर की दीवार पे कौवे नहीं अच्छे लगते, मुफ़लिसी में ये तमाशे नहीं अच्छे लगते कुछ ऐसा ही सोचते हैं भोपाल गैस हादसे में अपने रिश्तों को खो चुके लोग…२५ साल गुजरने के बाद भी सभी के जखम ताजा हैं….और मुफलिसी आज भी उनके आँखों में खुश हाली भरे सपने पनपने नहीं दे रही…अब तो हमारे देश की राजनीति को सोचना चाहिये की वह भले ही दोषी को सजा न दे पाए…लेकिन अपने उन लोगों का तो ख्याल रखे जो आज भी गैस के जखम को अपने आँचल में सहेजे हुए हैं….एंडरसन को सजा देना सायद उतना जरुरी नहीं है… Read more »
केशव पटेल
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@ dr.rajesh कपूर…..डा साहब ये शायद अब हमारी नियति बनती जा रही है….या फिरहमें चुपचाप सहने की आदत सी पडती जा रही है……….ना जाने और कब तक इन्ही त्रासदियों से जूझना और लडना पडता रहेगा………

Meena
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Sorry Keshav Ji….had no idea so just googled to find out…although we are so far away from our motherland its really really sad to know about this ….”‘May the souls of those who lost their lives RIP and those suffering the aftermath have their pains eased” May Justice Prevail……God bless all!!!!

मीना शर्मा एंड फॅमिली
न्यू ज़ीलैण्ड

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