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Archive for the Category ‘कला-संस्कृति’


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आओ मनाऐं नया साल-विक्रमी संवत 2069

आओ मनाऐं नया साल-विक्रमी संवत 2069  विनोद बंसल पाश्चात्य देशों के अंधानुकरण व अंग्रेजियत के बढते प्रभाव के बावजूद भी आज चाहे बच्चे के गर्भाधान की बात हो या जन्म की, नामकरण की बात हो या शादी की, गृह प्रवेश की हो या व्यापार प्रारम्भ करने की, सभी में हम एक कुशल पंडित के पास जाकर शुभ ...

February 3rd, 2012 | लेखक : विनोद बंसल | 122 views | 4 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: new year according to hindu mythology, विक्रमी संवत 2069

नकल, एक और कालिख ?

नकल, एक और कालिख ? राजकुमार साहू निश्चित ही छत्तीसगढ़ विकास की दिशा में अग्रसर हो रहा है, लेकिन कई रोड़े भी नजर आ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अनेक बदलाव के कारण यहां की प्रतिभाएं निखर कर सामने आ रही हैं। फिर भी शिक्षा नीति में कई बदलाव की जरूरत है। इसमें सबसे बड़ी ...

January 30th, 2012 | लेखक : राजकुमार साहू | 41 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Chhatisgarh, छत्तीसगढ़, प्रतिभा पलायन

झालरापाटन का सूर्य मंदिर

झालरापाटन का सूर्य मंदिर `अतीत में झालरों के नगर के नाम से जाना पहचाना झालरापाटन हैं। जिसका हृदय स्थल यहाँ का सूर्य मंदिर हैं। इस मंदिर का निर्माण नवीं सदी में हुआ था। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और स्थापत्य वैभव के कारण कोर्णाक के सूर्य मंदिर और ग्वालियर के विवस्वान मंदिर का स्मरण कराता ...

January 22nd, 2012 | लेखक : पंडित दयानंद शास्त्री | 117 views | 1 Comment »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: sun temple of jhalrapatan, झालरापाटन का सूर्य मंदिर

संवत्सर की विविध भारतीय परम्पराए

संवत्सर की विविध भारतीय परम्पराए मनोज श्रीवास्तव ‘‘मौन’’ हमारे देश के संवत्सर प्रारम्भ के सम्बन्ध में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की परम्परा में कुछ अन्तर है। भारत के कुछ भागों में माह कृष्ण पक्ष की अगली प्रतिपदा से प्रारम्भ होते हैं और शुक्ल पक्ष के साथ समाप्त होते हैं। ऐसे माह को पूर्णिमान्त कहते हैं ऐसे ...

January 7th, 2012 | लेखक : मनोज श्रीवास्‍तव 'मौन' | 82 views | 5 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Indian Culture, भारतीय परम्पराए, संवत्सर की विविध भारतीय परम्पराए

चश्म-ए-बद्दूर बनाम बेलगाम घोड़े

चश्म-ए-बद्दूर बनाम बेलगाम घोड़े रामकृष्ण फ़ुरसतनामा वह ज़माना फ़िल्मी दुनिया में राज कपूर के चरमोत्कर्ष का था, और के साथ ही शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी भी अपनी लोकप्रियता तब आसमान छू रहे थे. उन दिनों निर्मित होने वाली कम से कम पचास प्रतिशत फ़िल्में ऐसी ही होती थीं जिनमें शंकर-जयकिशन का सगीत हुआ करता था और ...

January 5th, 2012 | लेखक : राम कृष्ण | 70 views | 2 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: script writers in Indian movies, shailendra, शैलेन्द्र, हसरत जयपुरी

महर्षि दयानंद के महाप्रयाण (दीपावली) पर विशेष

महर्षि दयानंद के महाप्रयाण (दीपावली) पर विशेष अखिलेश आर्येन्दु महर्षि दयानंद : तमसो मा ज्योतिर्गय के युगधर्मी संवाहक उपनिशदों में अंधकार से प्रकाश की तरफ जाने की प्रेरणा दी गर्इ है। तमसो मा ज्योतिर्गमय। अंधकार मृत्यु के समान और प्रकाश जीवन और अमरता के समान माना गया है। मौत से छुटकारा पाने की एक छटपटाहट इंसान के मन में ...

October 28th, 2011 | लेखक : अखिलेश आर्येन्दु | 51 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Diwali, दीपावली पर विशेष, महर्षि दयानंद

कार्तिक माह: स्वर्ग-प्राप्ति की आसान राह

कार्तिक माह: स्वर्ग-प्राप्ति की आसान राह राजेश कश्यप कार्तिक का महीना व्रतों, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बेहद पावन होता है। कार्तिक महीने की प्रतिपदा से लेकर कार्तिक महीने की पूर्णमासी तक पूरे महीने धार्मिक अनुष्ठान चलते रहते हैं। देव उठनी एकादशी, गोवद्र्धन पूजा, दीपावली, भैयादूज, करवाचौथ, अहोई जैसे त्योहार इसी कार्तिक महीने में ही आते ...

October 24th, 2011 | लेखक : राजेश कश्यप | 67 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: kartik month, कार्तिक माह, स्वर्ग-प्राप्ति की आसान राह

भारतीय संस्कृति का केंद्र था कराची

भारतीय संस्कृति का केंद्र था कराची मुजफ्फर हुसैन कराची का पुराना नाम देवल नगर था। वहां कभी कितने मंदिर होंगे, इसका हिसाब लगाना कठिन है, पर पाकिस्तान में शामिल हो जाने के बाद भी आज वहां हिंदुओं के अनेक मंदिर हैं। कुछ बंद कर दिए गए हैं, तो कुछ ऐसे हैं, जहां शापिंग मॉल बना दिए गए ...

August 20th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 111 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Karanchi, कराची

सोने की चिड़िया क्यों लुटती थी?

सोने की चिड़िया क्यों लुटती थी? शंकर शरण महान इतिहासकार विल ड्यूराँ ने अपना पूरा जीवन लगाकर वृहत ग्यारह भारी-भरकम खंडों में “स्टोरी ऑफ सिविलाइजेशन” लिखी था। उसके प्रथम खंड में भारत संबंधी इतिहास के अंत में उन्होंने अत्यंत मार्मिक निष्कर्ष दिए थे। वह हरेक भारत-प्रेमी के पढ़ने योग्य है। हजार वर्ष पहले भारत विश्व का सबसे ...

August 13th, 2011 | लेखक : शंकर शरण | 499 views | 6 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति, महत्वपूर्ण लेख | Tags: India, भारत, सोने की चिड़िया

सांस्कृतिक साम्राज्यवाद

सांस्कृतिक साम्राज्यवाद कैलाश बुधवार देश को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो जाने के बाद भी अक्सर यह दुख दुहराया जाता है कि हमारी दास मानसिकता नहीं गई पर मेरा भय एक नई दासता के बारे में है। पिछले साम्राज्यवादी कंगूरे ढह गए पर हम बेसुधी में एक नए साम्राज्यवाद के आगे घुटने टेके जा ...

August 5th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 109 views | 1 Comment »
Posted in Category: कला-संस्कृति, विविधा | Tags: सांस्कृतिक साम्राज्यवाद

संस्कृति के हत्यारे

संस्कृति के हत्यारे राजेन्द्र जोशी (विनियोग परिवार) पांच सौ साल पहले यह दुनिया आज की तुलना में सुखी और हिंसा रहित थी। लेकिन 1492 में एक ऐसी घटना घटी जिसने सारे विश्व के प्रवाह को मोड़ दिया। पहले देश-विदेश से वस्तु के आयात-निर्यात का काम जहाजों से होता था। ऐसे जहाजों को यूरोप के ...

August 5th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 111 views | 3 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: culture, संस्कृति

कहो कौन्तेय-४

कहो कौन्तेय-४ विपिन किशोर सिन्हा पिछला भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें समस्त आवेग, आवेश उद्वेग और अशान्त हस्तिनापुर से बहुत दूर गंधमादन पर्वत के शतशृंग शिखर पर सुनील सरोवर के किनारे हमारी पर्णकुटी थी। चारों ओर हरी भरी वनस्पतियां थीं। वृक्ष फलों से लदे रहते थे। हिरणों और खरगोशों के झुंड कुटी ...

July 27th, 2011 | लेखक : विपिन किशोर सिन्हा | 81 views | 1 Comment »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Kaho Kauntey, कहो कौन्तेय

कला की कसौटी पर हुसैन

कला की कसौटी पर हुसैन शंकर शरण  प्रसिद्ध चित्रकार हुसैन के देहांत पर हमारे अधिकांश अंग्रेजी अखबारों में चर्चा राजनीति, हिन्दुत्वा, कलाकार की अभिव्यक्ति स्वाधीनता और भारत की कथित छवि की हुई। अजीब है कि वहाँ ठीक कला पर कोई विचार नहीं हुआ। दूसरी ओर, हुसैन की कुरुचिपूर्ण प्रवृत्तियों, राजनीतिक रुख और देश-बदल आदि पर आलोचनात्मक ...

July 20th, 2011 | लेखक : शंकर शरण | 97 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: MF Hussain, एम.एफ. हुसैन, कला

मध्य प्रदेश द्वारा की गई एक प्रशंसनीय सांस्कृतिक पहल

मध्य प्रदेश द्वारा की गई एक प्रशंसनीय सांस्कृतिक पहल लालकृष्‍ण आडवाणी एक अकेले कलाकार द्वारा दर्शर्कों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले एक घंटे के एकल नाटक को सर्वप्रथम देखने का अवसर मुझे सत्तर वर्ष पूर्व तब मिला जब मैं कराची के सैंट पैट्रिक हाई स्कूल का विद्यार्थी था। जहां तक मुझे स्मरण आता है तो वह कलाकार आयरलैण्ड के प्रसिध्द ...

July 2nd, 2011 | लेखक : लालकृष्‍ण आडवाणी | 50 views | 2 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: Madhya Pradesh, अनुपम खेर, नाट्य विद्यालय, मध्‍यप्रदेश, शिवराज सिंह चौहान

संस्कृति से सर्वनाश की और……………………..

संस्कृति से सर्वनाश की और.......................... आज विश्वभर में खतरे का बिगुल भयंकर नाद कर रहा है उसका सन्देश है की हम सावधान हो जाये तथा संसार की अनित्यता के पीछे जो महान सत्य अंतर्निहित है उसे पहचान ले आज चारो और अशांति असंतोष स्वार्थ और सकिर्नता का भयंकर रूप प्रकट हो गया है मानव की ...

July 1st, 2011 | लेखक : राम नारायण सुथर | 87 views | 2 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: culture, संस्कृति

दो गज जमीन भी न मिली कूए यार में

दो गज जमीन भी न मिली कूए यार में वीरेन्द्र जैन पिछले दिनों जब हम लोग 1857 की एक सौ पचासवीं जयंती मना रहे थे तब मित्रों ने बड़े जोर शोर से बहादुर शाह ज़फर की कब्र को म्यांमार से भारत लाने की भावुक माँग की थी। बहादुर शाह जफर को तो विदेशी सरकार ने म्यांमार में दफन होने के ...

June 11th, 2011 | लेखक : वीरेन्द्र जैन | 134 views | 2 Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: MF Hussain, एम.एफ. हुसैन, मकबूल फिदा हुसैन

डॉ.लाल रत्नाकार की पेंटिंग पर बैठक

डॉ.लाल रत्नाकार की पेंटिंग पर बैठक ०१ मई २०११ स्थान आर-२४,राजकुंज, राजनगर, गाजियाबाद| इस बार की बैठक डा. लाल रत्नाकार की पेंटिंग और उनकी कला यात्रा पर केंद्रित थी। पिछले महीने ही मंडी हाउस में उनकी कृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई थी और तभी से बैठक के साथी उस पर बहस करना चाहते थे। पहली मई ...

May 17th, 2011 | लेखक : प्रवक्‍ता ब्यूरो | 23 views | No Comments »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: डॉ.लाल रत्नाकार

दिल्ली के रंगमंच पर आज बुश पर पड़ेगा जूता

दिल्ली के रंगमंच पर आज बुश पर पड़ेगा जूता संजय कुमार ‘द लास्ट सैल्यूट’ नाटक के नयी दिल्ली में मंचन के जरिये भारतीय रंगमंच कल, 14 मई को इतिहास रचने जा रहा है। बुश पर जूते की दास्तान पर आधारित ‘द लास्ट सैल्यूट’ नाटक के निर्माता हैं चर्चित फिल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट। निर्देशन अरविंद गौड़ का है और पटकथा लिखी ...

May 14th, 2011 | लेखक : संजय कुमार | 50 views | 1 Comment »
Posted in Category: कला-संस्कृति |

कैकई का राष्ट्रहित

कैकई का राष्ट्रहित "कोशलोनाम मुदित, स्फीतो जनपदो महान। निविश्टः सरयू तीरे, प्रभूत धनधान्यवान ॥" प्राचीन काल में कोशल जनपद की महत्ता का वर्णन वाल्मीकि रामायण के उक्त श्लोक से स्वतः सिद्ध हो जाती है। ऐसे महान जनपद में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली महान समरांगणी एवं अद्वितीय बुद्धिमती माता कैकेयी ने आसन्न महासंकट का अनुभव ...

May 3rd, 2011 | लेखक : जगदम्बा प्रसाद गुप्ता ”जगत” | 103 views | 1 Comment »
Posted in Category: कला-संस्कृति | Tags: National interest

जानि सरद रितु खंजन आए

जानि सरद रितु खंजन आए ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’- बाहर की मुर्गी मुर्ग मुसल्लम, अर्थात घर की मुर्गी दाल समान तुच्छ! मानव स्वभाव भी कितना विचित्र है! यह कहावत केवल मुर्गी पर ही नहीं, जोगी पर भी, ‘लॉन’ पर भी, ‘‘पड़ोसी की लॉन ज्यादा हरी होती है’’ और अनेकों पर लागू होती है। इसलिए ...

May 2nd, 2011 | लेखक : विश्‍वमोहन तिवारी | 83 views | No Comments »
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