Archive for the Category ‘गजल’
पड़ौसी पड़ोसी है हिंदू न मुस्लिम…….
इक़बाल हिंदुस्तानी
हरेक तश्नालब की हिमायत करूंगा,
समंदर मिला तो शिकायत करूंगा।
अगर आंच आई किसी जिंदगी पर,
हो अपना पराया हिफ़ाज़त करूंगा।
अभी तो ग़रीबों में मसरूफ हूँ मैं,
मिलेगी जो फुर्सत इबादत करूंगा।
तरक्की की ख़ातिर वो यूं कह रहा था,
मैं जिस्मों की खुलकर तिजारत करूंगा।
ज़मीर अपना बेचंू जो दौलत कमाउ,
अब इक रास्ता है सियासत ...बह रही इस मुल्क में कैसी बयार देखिए….
हिमकर श्याम
कल के रहजन बन गये शहरयार, देखिए
वैशाखियों पे चल रही ये सरकार, देखिए
तारीकियाँ, मायूसियाँ, तबाहियाँ और बलाएँ
बह रही इस मुल्क में कैसी बयार देखिए
दुकान सजाये बैठे हैं सदाक़तो ईमान बेचने
रिश्वतों पे चल रहा सारा कारोबार, देखिए
किस मुक़ाम पे जा पहुँची तर्जे सियासत यहाँ
हुकूमतों में बैठे जम्हूरियत के ठेकेदार देखिए
हदे ...

















