लेख अनुशासन, त्याग और पराक्रम का उत्सव-भारतीय थल सेना दिवस January 14, 2026 / January 14, 2026 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment भारतीय थल सेना विश्व की सबसे बड़ी स्वैच्छिक (वॉलंटरी) सेना मानी जाती है, जहाँ सैनिकों की भर्ती पूरी तरह स्वेच्छा से होती है और किसी भी प्रकार की जबरन भर्ती की व्यवस्था नहीं है। सैनिकों की संख्या के लिहाज़ से यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सक्रिय थल सेना है, जिसमें लगभग 14.5 लाख Read more » भारतीय थल सेना दिवस
लेख उठो राष्ट्र के नव-प्रहरी January 14, 2026 / January 14, 2026 by पवन शुक्ला | Leave a Comment उठो राष्ट्र के नव-प्रहरी, अब रणभेरी ने पुकारा है, सोया जो पुरुषार्थ तुम्हारा, Read more » उठो राष्ट्र के नव-प्रहरी
लेख राष्ट्रीय युवा दिवस और पंच प्रण January 14, 2026 / January 14, 2026 by डा. शिवानी कटारा | Leave a Comment पंच प्रण—विकसित भारत का संकल्प, गौरवशाली विरासत पर गर्व, दासता की मानसिकता से मुक्ति, एकता और नागरिक कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता तथा अधिकारों से आगे बढ़कर कर्तव्यों का बोध Read more » राष्ट्रीय युवा दिवस
लेख भारत रत्न के बनते ‘खुदरा बाजार’ से उठते सियासी सवाल? January 14, 2026 / January 14, 2026 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment बता दें कि 1980 में कांग्रेस सरकार ने पुनः इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान को प्रारम्भ किया। आमतौर पर इसे गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है जिसमें पदक और प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। प्रति वर्ष अधिकतम तीन व्यक्तियों तक सीमित रहता है हालांकि कभी-कभी इससे अधिक घोषित होते हैं। Read more » 'भारत रत्न' दिलवाने की होड़
लेख विश्व में हिन्दी की बढ़ती साखः भारत में उपेक्षा क्यों? January 10, 2026 / January 14, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment विश्व में लगभग साठ-सत्तर करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते, समझते या किसी न किसी रूप में उससे जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी की उपस्थिति निरंतर बढ़ रही है। विश्व हिंदी सम्मेलन, जिसकी शुरुआत 1975 में नागपुर में हुई थी, आज एक वैश्विक वैचारिक आंदोलन का रूप ले चुका है। इन सम्मेलनों ने यह सिद्ध किया Read more » विश्व हिंदी दिवस
लेख विश्व में भारतीयता का अहम परिचय ‘हिन्दी’ January 10, 2026 / January 14, 2026 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment बीते 76 वर्षों में भारत में हिन्दी बोलने, सुनने और समझने के साथ-साथ प्रथम भाषा के तौर पर हिन्दी स्वीकार करने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है तो वैश्विक स्तर पर भी हिन्दी ने अपना ध्वज लहराया है। Read more »
लेख समाज स्वास्थ्य-योग पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग January 7, 2026 / January 7, 2026 by शम्भू शरण सत्यार्थी | Leave a Comment आर्थिक तंगी और अधूरा इलाज Read more » People dying due to lack of money आर्थिक तंगी और अधूरा इलाज पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग
लेख सड़क दुर्घटना मुआवज़ा और संविधान : आय से परे मानवीय गरिमा की तलाश January 6, 2026 / January 6, 2026 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment मोटर वाहन अधिनियम में अपनाई गई ‘मल्टीप्लायर पद्धति’ पीड़ित की आय, आयु और आश्रितों की संख्या के आधार पर मुआवज़ा निर्धारित करती है। इसका उद्देश्य यह माना गया कि दुर्घटना से पूर्व जिस आर्थिक स्थिति में परिवार था, उसे यथासंभव पुनर्स्थापित किया जा सके। किंतु इस पद्धति की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह मनुष्य के जीवन Read more » Road Accident Compensation and the Constitution The Search for Human Dignity Beyond Income
लेख समाज विश्व पटल पर बालिकाओं का नवयुगः बदली सोच, उभरी शक्ति January 6, 2026 / January 6, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment पिछले 25 वर्षों में दुनिया ने लगभग 70 लाख बच्चियों को बचाया है, यह मानवीय प्रगति का बड़ा प्रमाण है। परंतु यह भी उतना ही कड़वा सत्य है कि आज भी हर साल दस लाख से अधिक बच्चियां गर्भ में ही खत्म कर दी जाती हैं और बीते 45 वर्षों में यह संख्या पाँच करोड़ से अधिक रही है। Read more » बालिकाओं का नवयुगः
खान-पान लेख इन्दौर की जल-त्रासदी और प्रशासनिक लापरवाही का नंगा चेहरा January 3, 2026 / January 30, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- स्वच्छता रैंकिंग में लगातार टॉप पर आने वाले इंदौर में दूषित पेयजल की वजह से हुई मौतें कथनी और करनी की असमानता की पौल खोलती भयावह लापरवाही का नतीजा हैं। स्थानीय लोगों का यह आरोप बेहद गंभीर है कि पानी की क्वॉलिटी को लेकर लगातार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई […] Read more » इन्दौर की जल-त्रासदी
लेख काल चक्र का संगम January 1, 2026 / January 14, 2026 by पवन शुक्ला | Leave a Comment भारतीय दर्शन में काल को 'चक्र' माना गया है—एक ऐसा गोलाकार पथ जिसका न कोई आदि है न अंत। पश्चिम में समय को अक्सर एक सीधी रेखा माना जाता है, जहाँ बीता हुआ कल कभी लौटकर नहीं आता। परंतु, जब हम नववर्ष मनाते हैं, तो हम इन दोनों विचारधाराओं के संगम पर खड़े होते हैं। Read more » काल चक्र का संगम
पर्यावरण लेख बढता जल संकट: भविष्य की बड़ी चेतावनी December 31, 2025 / December 31, 2025 by डॉ वीरेन्द्र भाटी मंगल | Leave a Comment भारत जैसे देश में, जहां एक ओर गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र जैसी महान नदियां हैं, वहीं दूसरी ओर करोड़ों लोग पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। अनेक शहरों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। Read more » Growing water crisis बढता जल संकट