संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा Part 9

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कुछ आदर्शों को लेकर महाराणा करते रहे अकबर से युद्घ राकेश कुमार आर्य इतिहास के पन्नो से  भारत में राजधर्म की महत्ता भारत का क्षात्र धर्म अति व्यापक है। महाभारत ‘शांति-पर्व’ (63 : 29) में कहा गया है :- सर्वेत्यागा राजधर्मेषु दृष्टा:। सर्वादीक्षा राजधर्मेषु योक्ता। सर्वाविद्या राजधर्मेषु युक्ता:। सर्वे लोका: राजधर्मेषु प्रविष्ठा। इसका अभिप्राय… Read more »

स्वदेश, स्वधर्म और स्वसंस्कृति का रक्षक सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य

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किया गया हेमचंद्र विक्रमादित्य को इतिहास में उपेक्षित जिस समय अकबर कलानौर के दुर्ग में भारत में अपने पिता द्वारा विजित क्षेत्रों का राजा बनाया गया, उस समय आगरा पर सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (1501-1556 ई.) उपनाम हेमू का शासन था। मां भारती के जिन अमर हुतात्मा वीरों को इतिहास में उनके वीरतापूर्ण कृत्यों से खींझकर… Read more »

संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part – 8)

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अकबर की महानता और भारतीय परंपरा में राजा के गुण राकेश कुमार आर्य भारत के विषय में बाबर के विचार भारत के विषय में बाबर ने लिखा है-‘‘हिन्दुस्थान में बहुत कम आकर्षण है। यहां के निवासी न तो रूपवान होते हैं, और न ही सामाजिक व्यवहार में कुशल होते हैं। ये न तो किसी से… Read more »

संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part 7)

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हम रहे हैं मोक्ष और लोक की स्वतंत्रता के सनातन साधक राकेश कुमार आर्य इतिहासकार कानूनगो का कथन इतिहासकार कानूनगो ने शेरशाह के विषय में लिखा है –“ऐतिहासिक दस्तावेजों की कमी के उपरांत जो कुछ सामग्री उपलब्ध है वह यह बात स्पष्ट कर देती है कि अकबर और उसके उत्तराधिकारियों के साम्राज्य जिन विचारों पर… Read more »

संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part 6)

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तथाकथित ‘न्यायशील’ शेरशाह सूरी का हिंदुओं के प्रति न्याय राकेश कुमार आर्य महर्षि दयानंद जी महाराज के जीवन की एक घटना महर्षि दयानंद जी महाराज के जीवन की एक घटना है। एक बार स्वामीजी सोरों गये तो वहां के लोगों ने स्वामी कैलाश पर्वत को बुला लिया, कि आपका यहां वराह मंदिर होने के उपरांत… Read more »

संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part 5)

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शेरशाह के काल में राजा पूरनमल और मालदेव ने जारी रखा स्वातंत्र्य समर राकेश कुमार आर्य बाबर की पंथनिरपेक्षता कुछ प्रगतिशील लेखकों ने बाबर को साम्प्रदायिक सदभाव के सृजक के रूप में प्रस्तुत किया है। इतिहास पुस्तकों में अंतिम समय में बाबर द्वारा अपने पुत्र हुमायूं को दी गयी यह शिक्षा बार-बार दोहरायी जाती है… Read more »

बंदा सिंह बहादुर ने रचा इतिहास – डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अठारहवीं शताब्दी के शुरु में ही हुई दो लड़ाइयाँ अपना ऐतिहासिक महत्व रखती हैं । इन दोनों लड़ाईयों ने पश्चिमोत्तर भारत में विदेशी मुग़ल वंश के कफ़न में कील का काम किया । ये लडाईयां थीं पंजाब में सरहिन्द और गुरदास नंगल की लडाई । इन दोनों लड़ाईयों का नेतृत्व… Read more »

संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा (Part 4)

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भारत से भागा हुआ हुमायूं परिस्थितिवश पुन: लौट आया राकेश कुमार आर्य हुमायूं के प्रति हमारे शासकों का प्रमाद प्रदर्शन यह हमारी दुर्बलता या ‘सदगुण विकृति’ का ही एक उदाहरण है कि जब हुमायूं इस देश से उसी के मजहबी भाइयों के द्वारा निकाल दिया गया था और वह इधर-उधर भटक-भटक कर समय व्यतीत कर… Read more »

गंगा दशहरा अर्थात गंगावतरण की पौराणिक कथा

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अशोक “प्रवृद्ध” भारतवर्ष के पौराणिक राजवंशों में सबसे प्रसिद्ध राजवंश इक्ष्‍वाकु कुल है। इस कुल की अट्ठाईसवीं पीढ़ी में राजा हरिश्‍चन्द्र हुए, जिन्‍होंने सत्‍य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया । इसी कुल की छत्‍तीसवीं पीढ़ी में अयोध्या में सगर नामक महाप्रतापी , दयालु, धर्मात्‍मा और प्रजा हितैषी राजा हुए। गर अर्थात विष… Read more »

14 जून : विश्व रक्तदान दिवस

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डा. राधेश्याम द्विवेदी वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 100 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नींव डाली है। संगठन ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को ही बढ़ावा दें। मक़सद यह था कि रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं… Read more »