साम्यवादी गढ़ों में योग का उत्सव

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इस बार पूंजीवादी देश अमेरिका के नेशनल माॅल में हजारों लोग योग दिवस मनाएंगे। अमेरिका में ही नहीं दुनिया योग आंदोलन, तमाम राजनीतिक और आर्थिक आंदोलनों को पीछे छोड़ता जा रहा है।  योग शब्द अपने भावार्थ में आज अपनी सार्थकता पूरी दुनिया में सिद्ध कर रहा है। योग का अर्थ है जोड़ना। वह चाहे किसी भी धर्म जाति अथवा संप्रदाय के लोग हों, योग का प्रयोग सभी को शारीरिक रूप से स्वास्थ्य और मानसिक रूप से सकारात्मक सोच विकसित करता है।

सावरकर

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कांग्रेस के नेतृत्व की इन भूलों पर सावरकर बहुत खिन्न थे। वह ये नही समझा पा रहे थे कि जब चीन जैसे देश अणुबम बनाने की बात कर रहे हैं, तो उस समय भारत ‘अणुबम नही बनाएंगे’ की रट क्यों लगा रहा है? क्या इस विशाल देश को अपनी सुरक्षा की कोई आवश्यकता नही है? वह नही चाहते थे कि इतने बड़े देश की सीमाओं को और इसके महान नागरिकों को रामभरोसे छोड़कर चला जाए। इसलिए उन्होंने ऐसे नेताओं को और उनकी नीतियों को लताड़ा जो देश के भविष्य की चिंता छोड़ ख्याली पुलाव पका रहे थे।

भारत मुसलमानों के लिए स्वर्ग क्यों है ?

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विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानी भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, विश्व… Read more »

कांग्रेस रानी की दुर्दशा पर दासी वामपंथियों का विधवा-विलाप

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मनोज ज्वाला १४ अगस्त सन १९४७ की आधी रात को दिल्ली में हुआ सत्ता-हस्तान्तण वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतिनिधि लार्ड माउण्ट बैटन और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू के बीच हुई एक दुरभिसंधि का परिणाम एवं एक सियासी साजिस का क्रियान्वयन था । भारत पर अंग्रेजों की सत्ता को कायम… Read more »

अमेरिका में बढ़ती नस्लीय नफरत

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प्रमोद भार्गव   प्रवासी मुक्त अमेरिका के मुद्दे पर चुनाव जीते डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अवसरों की भूमि माने जाने वाले अमेरिका में नस्लीय भेद हिंसा का रूप लेने लगा है। इस हिंसा के पहले शिकार दो भारतीय युवा इंजीनियर हुए हैं। इनमें से हैदराबाद के एक श्रीनिवास कुचिवोतला की मौके… Read more »

कितना असाधारण अब सौ फीसदी कुदरती हो जाना

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परिस्थिति के हिसाब से किसानों के तर्क व्यावहारिक हैं। उनकी बातों से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे केचुंआ खाद, कचरा कम्पोस्ट आदि से परिचित नहीं है। गोबर गैस प्लांट उनकी पकड़ में नहीं है। हरी खाद पैदा करने के लिए हर साल जो अतिरिक्त खेत चाहिए, उनके पास उतनी ज़मीन नहीं है। ज़िला कृषि कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी गांव में आते-जाते नहीं। सच यही है कि जैविक खेती के सफल प्रयोगों की भनक देश के ज्यादातर किसानों को अभी भी नहीं है।

जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के छिपे समर्थक

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डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री जम्मू कश्मीर तीन दशकों से भी ज़्यादा समय से आतंकवादियों की चपेट में है । यह आतंकवाद पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित है , इसमें भी कोई संशय नहीं है । सुरक्षाबलों पर हमला करने के लिए आतंकवादी अपनी रणनीति बनाते हैं ताकि वे उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा नुक़सान पहुँचा सकें । इस… Read more »

अंग्रेजी वर्चस्व के चलते संकट में आईं मातृभाषाएं

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संदर्भः 21 फरवरी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विषेश- प्रमोद भार्गव यह एक दुखद समाचार है कि अंग्रेजी वर्चस्व के चलते भारत समेत दुनिया की अनेक मातृभाषाएं अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। जबकि राष्ट्र संघ द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा का प्रमुख उद्देश्य था कि विश्व में लुप्त हो रहीं भाषाएं सरंक्षित हों,… Read more »

आरक्षण का अनचाहा पहलू: एक विचार-प्रवर्तक टिप्पणी

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डॉ. मधुसूदन (एक) सारांश: अपनी टिप्पणी में, पिछडे समाज का,एक टिप्पणीकार अपना अनुभव बताता है; ==> ***आरक्षण के कारण समाजपर होनेवाले मानसिक दुष्परिणाम*** ***सभी से बुरा है, आरक्षित समाज में, हीन ग्रंथि का उदय*** ***और समग्र देश में फैलती परस्पर अलगाव की भावना*** अंत में टिप्पणीकार अपना निश्चय व्यक्त करता है: ***इस लिए, आरक्षण की… Read more »

अमेरिका की राह पर कुवैत

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प्रमोद भार्गव अमेरिका की नीति का पालन करते हुए कुवैत ने कट्टरपंथियों का प्रवेश कुवैत में न होने पाए, इस नजरिए से पांच देशों के नगरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक और सीरिया हैं। अब इन देशों के लोग पर्यटन, व्यापार और आगुंतक वीजा के आधार पर कुवैत में… Read more »