नये साल में पुरानी योजनाएं : कितनी सफल होंगी ?

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नकेल काला धन पर….. -अनिल अनूप कालाधन रखने वालों को केंद्र सरकार ने एक और मौका दिया है. कालाधन पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद अब केंद्र सरकार ने इसी दिशा में एक और कदम बढ़ाया हैं. केंद्र सरकार ने कालाधन को सफेद… Read more »

भारतीय शिक्षाव्यवस्था का इतिहास करवट लेगा : निकट भविष्य में डॉक्टरी की पढ़ाई हिन्दी में कर पाएंगे भारतीय बच्चे

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इसके पहले भी अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल इंजीनियरिंग के कोर्स हिन्दी में शुरू करने की घोषणा कर चुका है और वहां इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल तथा सिविल के कोर्स हिन्दी में शुरू भी कर दिए गए हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के चैयरमैन अनिल डी. सहस्रबुद्धे ने कहा था कि हिन्दी या क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई हो सकती है। उनका कहना था कि कालेज को सिर्फ एआईसीटीई के मानक पूरे करने अनिवार्य हैं।

अर्थक्रांति और राष्ट्रवाद की और देश

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अनेक उच्च वर्गीय लोगो का कहना था कि मोदी के नोट वापसी के फैसले के बाद वे निराश हें और या तो काम करना बंद कर देंगे अथवा विदेश चले जायेंगे। मेरा उनसे कहना है कि अगर वो ऐसा करते हें तो इस देश पर अहसान ही होगा क्योकि वो देश में कमाते भी हें तो टैक्स चोरी कर कालाधन विदेश भेज देते हें या विदेशो से नकद में आयात कर देश के उद्योगों की कमर तोड़कर युवा पीढ़ी को बेकार कर रहे हें। कृपया अपने साथ लंपट नेताओ और नोकरशाहों को भी ले जाइयेगा और जल्द हमें बताइये कि किस देश में आप बिना कानून माने और टैक्स दिए बिना अय्याशी कर रहें हें।

टेक्सास में हुई अद्भुत भ्रूण शल्यक्रिया का विश्लेषण

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देखा जाए तो अतिप्राचीन युग में भी भारत की चिकित्सा प्रणाली का उद्देश्य वृहत रुप से व्यापक और सर्वज्ञान पद्धति से परिपूर्ण था। ‘चरक संहिता’ सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु विदेशों में भी इसका अध्ययन किया जा रहा है। इसी आधार पर आज भी पाश्चात्य चिकित्सक इस बात को सार्वजनिकतौर पर बोलने से भले ही कतराते हों, परन्तु आंतरिकरुप से स्वीकार करते हैं कि चरक-सुश्रुत के काल में भारतीय चिकित्सा विज्ञान आधुनिक पश्चिमी चिकित्सा विज्ञान से कहीं अधिक आगे था।

केंद्र की श्रेष्‍ठ शिक्षा नीति का बुरा हाल

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वस्‍तुत: सरकार को यदि शिक्षा के स्‍तर में समानता रखनी है तो सबसे पहले संपूर्ण देश में एक जैसा पाठ्यक्रम लागू करने पर जोर देना होगा, बोर्ड माध्‍यम फिर केंद्रीय हो या राज्‍य स्‍तरीय पुस्‍तकों के स्‍तर में बहुत अंतर नहीं होना चाहिए। इसमें स्‍थानीय स्‍तर पर कुछ पाठ अलग हो सकते हैं लेकिन ऐसा न हो कि पूरा का पूरा सिलेबस ही अलग हो

प्राकृत का हिन्दी को योगदान

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डाॅ. दिलीप धींग (निदेशक: अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन व शोध केन्द्र) आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में हिन्दी का प्रमुख स्थान है। यह लगभग डेढ़ हजार वर्ष पुरानी भाषा है। भारत की बहुसंख्यक आबादी द्वारा हिन्दी बोली, लिखी, पढ़ी और समझी जाती है। देश के विभिन्न भागों और भाषाओं की सम्पर्क भाषा होने के कारण हिन्दी में… Read more »

अंतरिक्ष में भारतीय मितव्ययता का परिचायक : स्‍क्रेमजेट परीक्षण

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डॉ. शुभ्रता मिश्रा किसी भी राष्ट्र, समाज और परिवार के विकास में मितव्ययता का अपना विशेष महत्व होता है। विश्व में आज अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण कर निवेश के माध्यम से विकास प्रक्रिया को आगे बढाने की महती आवश्यकता है। निवेश किसी भी क्षेत्र में हो सकता है, चाहे वह विज्ञान और तकनीकी का क्षेत्र… Read more »

भाषा विषयक ऐतिहासिक भूलें ?

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डॉ. मधुसूदन (एक) सारांश:: ***जापान संसार की ५-६ उन्नत भाषाओं के शोधपत्रों का जापानी अनुवाद अपने संशोधकों को उपलब्ध कराता है। और आगे बढता है।*** ***अफ्रिका के ४६ देश परदेशी माध्यमों (फ्रान्सीसी, अंग्रेज़ी,पुर्तगाली और स्पेनी) में, सीखते हैं? और सारे के सारे पिछडे हैं। क्या इसमें हमारे लिए भी, कोई पाठ छिपा है?**** ****हिन्दी माध्यम… Read more »

भारत खो गया-भारत मिल गया

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राकेश कुमार आर्य 15 अगस्त 1947 को जब स्वतंत्र हुआ तो उससे पूर्व 14 अगस्त को भारत का विभाजन हो चुका था, और पाकिस्तान नाम का एक नया देश विश्व मानचित्र पर उभर आया था। भारत से प्रेम करने वाले लोगों को देश का यह विभाजन बहुत ही कष्टकर प्रतीत हुआ। इस कष्ट को मिटाने… Read more »

वर्तमान शिक्षा पद्धति या गुलामी की पाठशाला

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कल मेरे घर पर एक विवाह समारोह का आमंत्रण आया ।आमंत्रण पत्र में मुझे जो सबसे ज्यादा लुभाता है वो है बाल मनुहार “मेली बुआ या चाचा की छादी में जलूल जलूल आना जी “और कार्ड पर लिखे समस्त घर के बुजुर्गवार और जिम्मेदार रिश्तेदारों के नाम ,सबसे ऊपर लिखी विघ्न विनाशक की वन्दना ।मगर… Read more »