अंग्रेजी वर्चस्व के चलते संकट में आईं मातृभाषाएं

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संदर्भः 21 फरवरी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर विषेश- प्रमोद भार्गव यह एक दुखद समाचार है कि अंग्रेजी वर्चस्व के चलते भारत समेत दुनिया की अनेक मातृभाषाएं अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। जबकि राष्ट्र संघ द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा का प्रमुख उद्देश्य था कि विश्व में लुप्त हो रहीं भाषाएं सरंक्षित हों,… Read more »

आरक्षण का अनचाहा पहलू: एक विचार-प्रवर्तक टिप्पणी

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डॉ. मधुसूदन (एक) सारांश: अपनी टिप्पणी में, पिछडे समाज का,एक टिप्पणीकार अपना अनुभव बताता है; ==> ***आरक्षण के कारण समाजपर होनेवाले मानसिक दुष्परिणाम*** ***सभी से बुरा है, आरक्षित समाज में, हीन ग्रंथि का उदय*** ***और समग्र देश में फैलती परस्पर अलगाव की भावना*** अंत में टिप्पणीकार अपना निश्चय व्यक्त करता है: ***इस लिए, आरक्षण की… Read more »

अमेरिका की राह पर कुवैत

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प्रमोद भार्गव अमेरिका की नीति का पालन करते हुए कुवैत ने कट्टरपंथियों का प्रवेश कुवैत में न होने पाए, इस नजरिए से पांच देशों के नगरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक और सीरिया हैं। अब इन देशों के लोग पर्यटन, व्यापार और आगुंतक वीजा के आधार पर कुवैत में… Read more »

‘भगवान के घर’ में वामपंथ का आतंक

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केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं पर वामपंथियों के हमले बढ़े, अब तक 300से अधिक निर्दोष लोगों की हत्या   – लोकेन्द्र सिंह ‘ईश्वर का अपना घर’ कहा जाने वाला प्राकृतिक संपदा से सम्पन्न प्रदेश केरल लाल आतंक की चपेट में है। प्रदेश में लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी… Read more »

लीला भंसाली की पदमावती को लेकर उठा विवाद

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डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री पिछले दिनों दो ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिनकी निन्दा किया जाना जरुरी है । 19 जनवरी को केरल के कण्णूर जिला में वहाँ के मुख्यमंत्री विजय के चुनाव क्षेत्र में कुछ लोगों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता संतोष के घर में घुस कर उसकी हत्या कर दी । कहा जाता… Read more »

ज़ायरा का सवाल और बित्ते भर का छेद-

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डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री आमिर खान ने एक नई फ़िल्म बनाई है, दंगल । दंगल हरियाणा की खिलाड़ी गीता फोगट को लेकर बनाई गई है जिसने पिछली कामनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीता था । लड़के कोई भी पदक नहीं ले सके और लड़कियों ने हिन्दुस्तान की लाज रख ली । शायद इसी से प्रोत्साहित… Read more »

नये साल में पुरानी योजनाएं : कितनी सफल होंगी ?

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नकेल काला धन पर….. -अनिल अनूप कालाधन रखने वालों को केंद्र सरकार ने एक और मौका दिया है. कालाधन पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद अब केंद्र सरकार ने इसी दिशा में एक और कदम बढ़ाया हैं. केंद्र सरकार ने कालाधन को सफेद… Read more »

भारतीय शिक्षाव्यवस्था का इतिहास करवट लेगा : निकट भविष्य में डॉक्टरी की पढ़ाई हिन्दी में कर पाएंगे भारतीय बच्चे

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इसके पहले भी अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल इंजीनियरिंग के कोर्स हिन्दी में शुरू करने की घोषणा कर चुका है और वहां इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल तथा सिविल के कोर्स हिन्दी में शुरू भी कर दिए गए हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के चैयरमैन अनिल डी. सहस्रबुद्धे ने कहा था कि हिन्दी या क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई हो सकती है। उनका कहना था कि कालेज को सिर्फ एआईसीटीई के मानक पूरे करने अनिवार्य हैं।

अर्थक्रांति और राष्ट्रवाद की और देश

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अनेक उच्च वर्गीय लोगो का कहना था कि मोदी के नोट वापसी के फैसले के बाद वे निराश हें और या तो काम करना बंद कर देंगे अथवा विदेश चले जायेंगे। मेरा उनसे कहना है कि अगर वो ऐसा करते हें तो इस देश पर अहसान ही होगा क्योकि वो देश में कमाते भी हें तो टैक्स चोरी कर कालाधन विदेश भेज देते हें या विदेशो से नकद में आयात कर देश के उद्योगों की कमर तोड़कर युवा पीढ़ी को बेकार कर रहे हें। कृपया अपने साथ लंपट नेताओ और नोकरशाहों को भी ले जाइयेगा और जल्द हमें बताइये कि किस देश में आप बिना कानून माने और टैक्स दिए बिना अय्याशी कर रहें हें।

टेक्सास में हुई अद्भुत भ्रूण शल्यक्रिया का विश्लेषण

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देखा जाए तो अतिप्राचीन युग में भी भारत की चिकित्सा प्रणाली का उद्देश्य वृहत रुप से व्यापक और सर्वज्ञान पद्धति से परिपूर्ण था। ‘चरक संहिता’ सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु विदेशों में भी इसका अध्ययन किया जा रहा है। इसी आधार पर आज भी पाश्चात्य चिकित्सक इस बात को सार्वजनिकतौर पर बोलने से भले ही कतराते हों, परन्तु आंतरिकरुप से स्वीकार करते हैं कि चरक-सुश्रुत के काल में भारतीय चिकित्सा विज्ञान आधुनिक पश्चिमी चिकित्सा विज्ञान से कहीं अधिक आगे था।