पर्यावरण से छेड़छाड़ के बिना ही मिलने लगा भरपूर पानी

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“जब मैं छोटा था बहुत बारिश और बर्फ होती थी। मई के अंत तक पहाड़ बिल्कुल सफेद रहते थे। लेकिन अब बर्फ बहुत ही कम हो गए हैं। सफेद की जगह हरे नजर आते हैं। क्योंकि बारिश ज्यादा होने लगी है”। ये वाक्य है लद्दाख के फ्यांग गांव में रहने वाले 80 वर्षीय टुंडुप वांगाईल का। इसी गांव के 51 वर्षीय रींचेन वांगड़ूज़ बताते हैं कि “साल दर साल वाहनो से निकलने वाले धुंए के कारण वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है”।

हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रकट होहिं मैं जाना

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-संतोष कुमार त्रिपाठी-        मैं विवेकानंद का पुनर्जन्म और इस जन्म में कल्कि अवतार हूँ। नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणियों का चंद्रमा नामक भारतीय और एंटी क्राइस्ट भी मै हूँ। अमेरिकन महिला भविष्यवक्ता   जीन डिक्सन द्वारा बोला गया गांधी जन्म भी मै हूँ। यह बात मैं वर्ष 1997 से ही , जब मै आईआईटी दिल्ली से यम… Read more »

इन ‘ललितों’ का तो एेसा ही है…!

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-तारकेश कुमार ओझा- उन दिनों किसी अखबार में पत्रकार होना आइएएस – आइपीएस होने से किसी मायने में कम महत्वपूर्ण नहीं था। तब किसी भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी के कार्यालय के सामने मुलाकातियों में शामिल करोड़पति से लेकर अरबपति तक को भले ही अपनी बारी के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़े, लेकिन पत्रकार को… Read more »

23-24 जून को उत्तरखण्ड विकास संवाद

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-अरुण तिवारी- नीति आयोग ने इस नीति पर काम करना शुरु कर दिया है कि राज्य, केन्द्र की ओर ताकने की बजाय, अपने संसाधनों के विकास पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान कैसे दे ? इसके लिए नीति आयोग के दलों ने राज्यों के दौरे भी शुरु कर दिए हैं। इस नीति से किन राज्यों को… Read more »

शर्म उनको मगर नहीं आई?

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-तनवीर जाफरी- ऋषियों-मुनियों, साधू-संतों, पीरों-फकीरों तथा अध्यात्मवादियों की धरती समझा जाने वाला हमारा भारतवर्ष अपनी इसी पहचान के चलते सहस्त्राब्दियों से पूरे विश्व की नज़रों में आदर व सम्मान का पात्र रहा है। भारतवर्ष ने अहिंसा परमो धर्म:, विश्व शांति तथा वसुधैव कुटंबकम का पाठ सारी दुनिया को पढ़ाया । सर्वे भवंतु सुखिन: की आवाज़… Read more »

समाज और धर्म की समापन किस्त

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-गंगानंद झा- जब अपने बड़े बेटे के हाई स्कूल में नामांकन का अवसर उपस्थित हुआ तो मेरे सामने चुनाव की समस्या आई, किस स्कूल में नामांकन कराया जाए? तब सीवान में लड़कों के तीन और लड़कियों के दो हाई स्कूल हुआ करते थे । लड़कों के स्कूलों के नाम थे डी.ए. वी. हाई स्कूल, इस्लामिया… Read more »

तीसरी किश्त

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-गंगानंद झा- इस्लाम साहब से हमारी मुलाकात कई वर्षों के बाद हुई । अब वे बाकायदा प्रतिष्ठित और सम्पन्न पाकिस्तानी नागरिक और उद्योगपति हो चुके थे, बाकायदे पासपोर्ट, विसा पर आए थे । पाकिस्तान की बातें करते हुए उन्होंने कहा, ‘अरे हम लोग तो बनिया हैं । रोजगार की खातिर दूर-दराज जाना हमारी फितरत रही… Read more »

धार्मिक परिवेश का एक सच ऐसा भी

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-गंगानंद झा- मैं समझता था कि मेरी चेतना में  मुसलमानों की पहचान समझे जाने वाले प्रतीकों के विरुद्ध कोई पूर्वाग्रह नहीं था । पर सीवान ने मुझे बतलाया कि मेरे अवचेतन में कितने विकृत पूर्वाग्रह थे । मैं अपनी ही प्रतिक्रिया से चौंक गया जब एक दिन किश्वर के घर पर बैठा फैज साहब से… Read more »

हर-हर गंगे घर-घर गंगे

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-एम. अफसर खां सागर- शिव की जटाओं से निकलने वाली मोक्षदायीनी गंगा शिव की नगरी काशी में आकर अपनी पवित्रता भले न त्यागती हो मगर उसकी चमक जरूर फीकी पड़ जाती है। मोक्ष की नगरी काशी सम्पूर्ण विश्व के लिए धर्म और आस्था का केन्द्र है बावजूद इसके मानवता के स्वार्थ और पाप को ढ़ोते… Read more »

रुद्राक्ष की माला, त्रिशूल, कमंडल व योग क्रिया ही शुद्ध देशी! बाकी सब विदेशी है !

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-श्रीराम तिवारी- मैं बचपन  से ही योग -अभ्यास और शारीरिक व्यायाम करता आ रहा हूँ। इक्कीस जून को भी करूंगा। यदि  मोदी जी नहीं करवाते तो भी करता। यदि किसी कारण से वे इस सामूहिक आयोजन को निरस्त भी करते हैं फिर  भी मैं तो उस दिन भी सुबह ६ बजे  निश्चय  ही करूँगा। क्योंकि यह मेरी दिनचर्या का… Read more »