कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

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भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं! और हर व्यक्ति धड़ल्ले से उसका प्रयोग कर रहा है! अगर पूरे जोरशोर से प्रयास किया जाये तो निश्चय ही लोग कॅश के स्थान पर कार्ड व्यवस्था को रोजमर्रा की जिंदगी का भाग बना लेंगे और एक बार जब उन्हें इसकी सुविधा की आदत पड जाएगी तो फिर देखते ही देखते भारत भी इस क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में दिखाई देगा!

अंग्रेजी और चोगा, दोनों हटें

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संघ हिंदी की बात बहुत जोर से करता रहा है लेकिन उसे पता नहीं कि हिंदी आएगी कैसे? वह नौकरानी से महारानी बनेगी कैसे? यह रास्ता डा. लोहिया ने खोला था। उन्होंने कहा था, अंग्रेजी हटाओ। सिर्फ हटाओ, मिटाओ नहीं। संघ अभी तक हिंदी की लड़ाई खाली हाथ लड़ रहा था। कोठारी ने उसके हाथ में ब्रह्मास्त्र दे दिया है। देखें, जावड़ेकर क्या करते हैं? वे टीवी या सिनेमा के पर्दे से उतरकर मंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठे हैं। वे जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं। एक पत्रकार-परिवार के वारिस हैं। वे जरुर कुछ हिम्मत दिखाएंगे।

औद्योगिक नीतियों में हम केंद्र के पूरक – शिवराज सिंह चौहान

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विशेष बात यह है कि मध्यप्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जिसने Analog Semiconductor Fabrication नीति जारी की है। आज राज्य भर में Electronic Manufacturing Cluster विकसित किये जा रहे हैं, ताकि आने वाली इकाइयों को अत्याधुनिक आधारभूत ढाँचा प्रदान किया जा सके। इसके अतिरिक्त राज्य की आईटी नीति और Analog Semiconductor Fabrication नीति के तहत वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किये जा रहे हैं।

अविरल और निर्मल गंगा

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गंगा को सुधारना है, तो राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामाजिक जागरूकता, विशेषज्ञों द्वारा निर्मित समयबद्ध योजना, कठोर कानून और उनका पालन, धर्म, विज्ञान और वर्तमान जनसंख्या की जरूरतों में व्यावहारिक समन्वय जैसे मुद्दों पर एक साथ काम करना होगा, तब जाकर जगत कल्याणी मां गंगा स्नान और ध्यान, वंदन और आचमन के योग्य बन सकेगी।

अब नहीं होगी उनकी जिंदगी धुंआ-धुंआ…

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श्रीमती शांति मोहन साहू का अब अपनी सास और बेटी रिश्ता और अधिक मजबूत हो रहा है। छुरिया विकासखंड की ग्राम खुर्सीपार निवासी श्रीमती शांति साहू उज्ज्वला योजना के तहत मिले गैस चूल्हे से अब अपनी बेटी को उसकी मन-पसंद सब्जी और अपनी सास को उनका पसंदीदा खाना आधे घंटे में बनाकर दे देती है। इस गैस कनेक्शन के कारण अब शांति साहू की बेटी और सास जब चाहे तब गरमा-गरम खाना पका कर आसानी से खा लेते है।

एक पाती आदरणीय रविश जी के नाम डॉ नीलम महेंद्र की कलम से

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अफसोस है कि आप इस देश की मिट्टी से पैदा होने वाले आम आदमी को पहचान नहीं पाए । यह आदमी न तो अमीर होता है न गरीब होता है जब अपनी पर आ जाए तो केवल भारतीय होता है । इनका डीएनए गुरु गोविंद सिंह जी जैसे वीरों का डीएनए है जो इस देश पर एक नहीं अपने चारों पुत्र हंसते हंसते कुर्बान कर देते हैं।इस देश की महिलाओं के डीएनए में रानी लक्ष्मी बाई रानी पद्मिनी का डिएनए है कि देश के लिए स्वयं अपनी जान न्यौछावर कर देती हैं ।

जैन-संसदः आंदोलन का आह्वान

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हर व्यक्ति कम से कम एक मांसाहारी व्यक्ति को शाकाहारी बनाने की भरपूर कोशिश करेगा ताकि जीव-दया को अमली जामा पहनाया जा सके। हर व्यक्ति कम से कम एक पेड़ लगाएगा और उसकी देखभाल भी करेगा।

महिलाओं के लिए बकरियां एटीएम से कम नही

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मालुम हो कि बदायूं में बकरी चराने की कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि ज्यादातर परिवारों के पास अपनी कृषि भूमि हैं, वह अपनी बकरियों को गेहूं, मक्का और अन्य फसलों के अपशिष्ट खिलाकर उनका पालन पोषण करते हैं। बिस्मिल्लाह समूह की सभी दस महिला सदस्य इस समय बकरियां-पालन कर रही हैं, पुरुष भी महिलाओं के साथ इस काम को बढ़ावा देकर अच्छा मूल्य प्राप्त कर रहे हैं।

मप्र: शिक्षा में क्रांति

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मध्यप्रदेश की सरकार को मैं हृदय से बधाई देता हूं। हिंदी दिवस पर उसने अपने इंजीनियरी के छात्रों को अनुपम भेंट दी है। मप्र के लगभग 200 इंजीनियरी कालेजों के छात्र अब चाहें तो अपनी परीक्षा हिंदी माध्यम से दे सकेंगे। मप्र के ये सब काॅलेज राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। अब तक… Read more »

आईआईटी खड़गपुर में प्रसन्नताविज्ञान केंद्र की स्थापना से प्रसन्नता का होगा मानकीकरण

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डॉ. शुभ्रता मिश्रा देश में एक प्रसन्नता से भरा समाचार आया है कि आईआईटी खड़गपुर में इसी साल के शरद सत्र से प्रसन्नता विज्ञान नामक एक नए विषय की शुरुआत होने जा रही है, तो सभी का आश्चर्यमिश्रित प्रसन्न होना स्वाभाविक है। विश्व में विज्ञान के विकास ने विशुद्ध प्रसन्नता का प्रतिशत कम कर दिया… Read more »