लेखक परिचय

अशोक बजाज

अशोक बजाज

श्री अशोक बजाज उम्र 54 वर्ष , रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से एम.ए. (अर्थशास्त्र) की डिग्री। 1 अप्रेल 2005 से मार्च 2010 तक जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष पद का निर्वहन। सहकारी संस्थाओं एंव संगठनात्मक कार्यो का लम्बा अनुभव। फोटोग्राफी, पत्रकारिता एंव लेखन के कार्यो में रूचि। पहला लेख सन् 1981 में “धान का समर्थन मूल्य और उत्पादन लागत” शीर्षक से दैनिक युगधर्म रायपुर से प्रकाशित । वर्तमान पता-सिविल लाईन रायपुर ( छ. ग.)। ई-मेल - ashokbajaj5969@yahoo.com, ashokbajaj99.blogspot.com

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– अशोक बजाज

वह दृश्य अभी भी आँखों से ओझल नहीं हो पाया है जब 31 अक्टूबर 2000 को घड़ी की सुई ने रात के 12 बजने का संकेत दिया तो चारों तरफ खुशी और उल्लास का वातावरण बन गया। लोग मस्ती में झूमते- नाचते एक दूसरे को बधाइयाँ दे रहे थे .प्रधानमंत्री माननीय अटलबिहारी वाजपेयी की चारोँ तरफ जय-जयकार हो रही थी .घर घर में दीपमल्लिका सजा कर रोशनी की गई थी.आतिशबाज़ी का नजारा देखते ही बनता था . पहली सरकार कांग्रेस की बननी थी सो कुर्सी के लिए उठापटक का दौर बंद कमरे में चल रहा था. लोग एक तरफ नए राज्य निर्माण की खुशी मना रहे थे तो दूसरी तरफ कौन बनेगा प्रथम मुख्यमंत्री इस जिज्ञाषा में अपना ध्यान राजनीतिक गलियारों की ओर लगायें थे.

राज्य का गठन करना कोई हंसी खेल तो था नहीं। कई वर्षों से लोग आवाज उठा रहे थे अनेक तरह से आंदोलन भी करते रहे लेकिन राज्य का निर्माण नहीं हो पाया था। इस बीच प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने सन 1998 में सप्रेशाला रायपुर के मैदान में एक अटल-प्रतिज्ञा की कि यदि आप लोकसभा की 11 में से 11 सीटों में भाजपा को जितायेंगे तो मैं तुम्हें छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा। लोकसभा चुनाव का परिणाम आया। भाजपा को 11 में से 8 सीटे मिली लेकिन केंद्र में अटल सरकार फिर से बनी। प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप राज्य निर्माण के लिए पहले ही दिन से प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। मध्यप्रदेश राज्य पुर्निर्माण विधेयक 2000 को 25 जुलाई 2000 में लोकसभा में पेश किया गया। इसी दिन बाक़ी दोनों राज्यों के विधेयक भी पेश हुए। 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में और 9 अगस्त को राज्य सभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर मुहर लगी। 25 अगस्त को राष्ट्रपति ने इसे मंज़ूरी दे दी। 4 सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया और एक अटल- प्रतिज्ञा पूरी हुई .

सी.पी. बरार

छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले हम मध्यप्रदेश में थे। मध्यप्रदेश का निर्माण सन 1956 में 1 नवम्बर को ही हुआ था। हम 1 नवम्बर 1956 से 31 अक्टूबर 2000 तक यानी 44वर्षों तक मध्यप्रदेश के निवासी थे तब हमारी राजधानी भोपाल थी। इसके पूर्व वर्तमान छत्तीसगढ़ का हिस्सा सेन्ट्रल प्रोविंस एंड बेरार ( सी.पी.एंड बेरार ) में था तब हमारी राजधानी नागपुर थी। इस प्रकार हम पहले सी.पी.एंड बेरार,तत्पश्चात मध्यप्रदेश और अब छत्तीसगढ़ के निवासी है। वर्तमान छत्तीसगढ़ में जिन लोंगों का जन्म 1 नवम्बर 1956 को या इससे पूर्व हुआ वे तीन राज्यों में रहने का सुख प्राप्त कर चुकें है।

परंतु छत्तीसगढ़ राज्य में रहने का अपना अलग ही सुख है। अगर हम भौतिक विकास की बात करे तो छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि हमने 10 वर्षों से लंबी छलांग लगाई है। मैं यह बात इसीलिए लिख रहा हूँ क्योंकि हम 1 नवम्बर 2000 के पहले देश की मुख्य धारा से काफी अलग थे। गरीबी, बेकारी, भूखमरी, अराजकता और पिछड़ापन हमें विरासत में मिला। छत्तीसगढ़ इन दस वर्षों में गरीबी, बेकारी, भुखमरी, अराजकता एवं पिछड़ापन के खिलाफ संघर्ष करके आज ऐसे मुकाम पर खड़ा है जहां देखकर अन्य विकासशील राज्यों को ईर्ष्या हो सकती है। इस नवोदित राज्य को पलायन व पिछडापन से मुक्ति पाने में 10 वर्ष लग गये। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं से नगर, गांव व कस्बों की तकदीर व तस्वीर तेजी से बदल रही है। छत्तीसगढ़ की मूल आत्मा गांव में बसी हुई है, सरकार के लिए गांवों का विकास एक बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन इस काल-खण्ड में विकास कार्यों के सम्पन्न हो जाने से गांव की नई तस्वीर उभरी है। गांव के किसानों को सिंचाई, बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ जैसी मूलभूत सेवाएं प्राथमिकता के आधार पर मुहैया कराई गई है। हमें याद है कि पहले गाँवों में ग्राम पंचायतें थी लेकिन पंचायत भवन नहीं थे, शालाएं थी लेकिन शाला भवन नहीं थे, सड़के तो नहीं के बराबर थी, पेयजल की सुविधा भी नाजुक थी लेकिन आज गांव की तस्वीर बदल चुकी है। विकास कार्यों के नाम पर पंचायत भवन, शाला भवन, आंगनबाड़ी भवन, मंगल भवन, सामुदायिक भवन, उप स्वास्थ केन्द्र, निर्माला घाट, मुक्तिधाम जैसे अधोसंरचना के कार्य गांव-गांव में दृष्टिगोचर हो रहे हैं। अपवाद स्वरूप ही ऐसे गांव बचें होंगे जहाँ बारहमासी सड़कों की सुविधा ना हो ; गांवों को सडकों से जोड़ने से गांव व शहर की दूरी कम हुई है। अनेक गंभीर चुनौतियों के बावजूद ग्रामीण विकास के मामले में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है। छत्तीसगढ़ को भूखमरी से मुक्त कराने के लिए डा. रमन सिंह की सरकार ने बी. पी. एल. परिवारों को 1 रुपये/२ रुपये किलों में प्रतिमाह 35 किलों चावल देने का एतिहासिक निर्णय लिया जो देश भर में अनुकरणीय बन गया है। किसानों को 3 %ब्याज दर पर फसल ऋण प्राप्त हो रहा है। स्कूली बच्चों को मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रहीं है। वनोपज संग्रहणकर्ता मजदूरों को चरण -पादुकाएं दी जा रहीं है। अगर यह संभव हो पाया तो केवल इसलिए कि माननीय अटलबिहारी वाजपेयी ने एक झटके में छत्तीसगढ़ का निर्माण किया; छत्तीसगढ़ की जनता उनका सदैव ऋणी रहेगीं।

चित्र परिचय:  छत्तीसगढ़ के निर्माता माननीय अटल जी का 36लाख पंखुड़ियों की पुष्पमाला से अभिनन्दन

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1 Comment on "छत्तीसगढ़ : एक अटल-प्रतिज्ञा जो पूरी हुई"

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पंकज झा
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वास्तव में वो रात किसी छत्तीसगढ़जनों के लिए कभी न भूलने वाली रात है. उसकी याद इस सुन्दर तरीके से दिलवाने के लिए बजाज जी को बहुत-बहुत बधाई. हम जैसे लोग जो अवसर देख कर इस कारवाँ में बाद में शामिल हुए उनके लिए भी सदा स्मरणीय रहेगा वह अटल क्षण जब भौगोलिक दृष्टि से बिहार से भी बडे भू-भाग ने खुद को एक छोटे राज्य का विनम्र पहचान हासिल कर गौरवान्वित हुआ. वास्तव में यही इस अनोखे प्रदेश की संस्कृति भी है. कई दृष्टि से अपने हमसफ़र राज्यों से आगे रहने के बाद भी अपने बड़प्पन का किसी भी… Read more »
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