लेखक परिचय

हिमकर श्‍याम

हिमकर श्‍याम

वाणिज्य एवं पत्रकारिता में स्नातक। प्रभात खबर और दैनिक जागरण में उपसंपादक के रूप में काम। विभिन्न विधाओं में लेख वगैरह प्रकाशित। कुछ वर्षों से कैंसर से जंग। फिलहाल इलाज के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से रचना कर्म। मैथिली का पहला ई पेपर समाद से संबद्ध भी।

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-हिमकर श्याम- holi1

फिर बौरायी मंजरियों के बीच

कोयल कूकी,

दिल में एक टीस उठी

पागल भोरें मंडराने लगे,

अधखिली कलियों के अधरों पर

पलाश फूटे या आग

किसी मन में,

चूड़ी की है खनक कहीं,

कहीं थिरकन है अंगों में,

ढोल-मंजीरों की थाप

गूंजती है कानों में

मौसम हो गया है अधीर,

बिखर गये चहूं ओर रंग-अबीर

पर बिन तुम्हारे

रंग नहीं होली के रंगों में |

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2 Comments on "रंग नहीं होली के रंगों में"

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Rajaish
Guest

Bahut Khoobsoorat Rachna Hai.

Himkar Shyam
Guest

रचना की प्रशंसा के लिए सहृदय आभार !

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