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डॉ. कैलाश चन्द्र

श्रीमती सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनाई गई राष्‍ट्रीय सलाहकार परिषद(NAC) द्वारा तैयार किया गया प्रस्तावित “साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक’’ यदि संसद द्वारा पारित कर दिया गया तो मुस्लिम, ईसाई आदि अल्पसंख्यक समूहों को हिन्दुओं के प्रति घृणा फैलाने, हिन्दुओं को प्रताडित करने और हिन्दू महिलाओं से बलात्कार करने के लिए प्रोत्साहन मिल जायेगा क्योंकि इस प्रस्तावित कानून के अन्तर्गत यदि बहुसंख्यक वर्ग अर्थात हिन्दू किसी अल्पसंख्यक समूह के प्रति घृणा फैलाएं या हिंसा करें या यौन उत्पीडन करें तो हिन्दुओं को दंडित करने का प्रावधान है किन्तु मुस्लिम, ईसाई आदि अल्पसंख्यक समूहों द्वारा हिन्दुओं के प्रति घृणा फैलाई जाये या हिंसा की जाये या बलात्कार आदि यौन शोषण किया जाये तो उन अल्पसंख्यकों को किसी प्रकार का दण्ड देने का कोई प्रावधान नहीं है।

इतना ही नहीं यदि कोई अल्पसंख्यक उपरोक्त अपराधों के लिये किसी बहुसंख्यक व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध शिकायत करता है तो उसकी जांच किये बिना ही उस व्यक्ति एवं संगठन को अपराधी मानकर उसका संज्ञान लिया जायेगा। इस अपराध की असत्यता सिद्ध करना अपराधी का दायित्व होगा।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस विधेयक में ‘समूह की परिभाषा’ धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक वर्ग ही है बहुसंख्यक वर्ग के लिए समूह शब्द का प्रयोग नहीं है और केवल समूह के विरुद्ध घृणा, हिंसा आदि किया गया अपराध ही अपराध माना जायेगा। इस विधेयक के भाग दो की धारा 7 में निर्धारित किया गया है कि किसी व्यक्ति को उस स्थिति में यौन संबंधी अपराध के लिए दोषी माना जाएगा यदि वह अल्पसंख्यक समूह से संबंध रखने वाले व्यक्ति से यौन अपराध करता है। इस विधेयक कि धारा 8 में यह निर्धारित किया गया है कि घृणा संबंधी प्रचार उस स्थिति में अपराध माना जाएगा जब कोई व्यक्ति किसी अल्पसंख्यक समूह से संबंध रखने वाले व्यक्ति के विरूद्ध घृणा फैलाता है। धारा 9 में साम्प्रदायिक हिंसा संबंधी अपराधों का वर्णन है। कोई व्यक्ति अकेले या मिलकर या किसी संगठन के कहने पर किसी अल्पसंख्यक समूह के विरूद्ध कोई गैर कानूनी कार्य करता है तो उसे संगठित साम्प्रदायिक एवं लक्षति हिंसा के लिए दोशी माना जाएगा। धारा 10 में उस व्यक्ति को दंड दिए जाने का प्रावधान है जो किसी अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ किसी अपराध को करने अथवा उसका समर्थन करने हेतु पैसा खर्च करता है या पैसा उपलब्ध कराता है।

इस प्रस्तावित विधेयक में यह मान लिया गया है कि साम्प्रदायिक हिंसा केवल बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा ही पैदा की जाती है और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य कभी ऐसा नहीं करते। अतः बहुसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ किए गए साम्प्रदायिक अपराध तो दंडनीय हैं, अल्पसंख्यक समूहों द्वारा बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ किए गए ऐसे अपराध कतई दंडनीय नहीं माने गए हैं। अतः इस विधेयक के तहत यौन संबंधी अपराध इस हालात में दंडनीय हैं यदि वह किसी अल्पसंख्यक समूह के किसी व्यक्ति के विरूद्ध किया गया हो। अल्पसंख्यक समुदाय के विरूद्ध घृणा संबंधी प्रचार को अपराध माना गया है जबकि बहुसंख्यक समुदाय के मामले में ऐसा नहीं है। संगठित और लक्षित हिंसा, घृणा संबंधी प्रचार, ऐसे व्यक्तियों को वित्तीय सहायता, जो अपराध करते हैं, यातना देना या सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपनी ड्यूटी में लापरवाही, ये सभी उस हालात में अपराध माने जाएंगे यदि वे अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य के विरूद्ध किए गए हो अन्यथा नहीं। अल्पसंख्यक समुदाय का कोई भी सदस्य इस कानून के तहत बहुसंख्यक समुदाय के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। केवल बहुसंख्यक समुदाय का सदस्य ही ऐसे अपराध कर सकता है और इसलिए इस कानून का विधायी मंतव्य यह है कि चूंकि केवल बहुसंख्यक समुदाय के सदस्य ही ऐसे अपराध कर सकते हैं अतः उन्हें ही दोशी मानकर उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।

इस विधेयक में धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव क्यों किया गया है? अपराध तो अपराध है चाहे वह किसी भी वर्ग के व्यक्ति ने किया हो।

इस विधेयक को तैयार करने वाली एनएसी के सदस्य सोनिया जी द्वारा चुने हुए लोग ऐसे लोग है जोकि प्रायः माओवादियों के पक्ष में वक्तव्य देते रहे हैं। इस विधेयक से श्रीमती सोनिया गांधी की हिन्दू विरोधी मानसिकता का पता चलता है।

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