लेखक परिचय

डॉ. राजेश कपूर

डॉ. राजेश कपूर

लेखक पारम्‍परिक चिकित्‍सक हैं और समसामयिक मुद्दों पर टिप्‍पणी करते रहते हैं। अनेक असाध्य रोगों के सरल स्वदेशी समाधान, अनेक जड़ी-बूटियों पर शोध और प्रयोग, प्रान्त व राष्ट्रिय स्तर पर पत्र पठन-प्रकाशन व वार्ताएं (आयुर्वेद और जैविक खेती), आपात काल में नौ मास की जेल यात्रा, 'गवाक्ष भारती' मासिक का सम्पादन-प्रकाशन, आजकल स्वाध्याय व लेखनएवं चिकित्सालय का संचालन. रूचि के विशेष विषय: पारंपरिक चिकित्सा, जैविक खेती, हमारा सही गौरवशाली अतीत, भारत विरोधी छद्म आक्रमण.

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-डॉ राजेश कपूर

पश्चिमी प्रभाव में हमने सीखना शुरू कर दिया है कि कण्डोम साथ लेकर चलो ताकि एड्स से बचाव हो। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे अश्लील विज्ञापन देखने को मिल जाते हैं कि कण्डोम साथ लेकर चलो। क्या मायने हैं इसके? भारतीयों की ऐसी पतित सोच तो कभी नहीं रही, पर हमें ऐसा बनाने का एक सोचा-समझा प्रयास चलता नज़र आ रहा है।

पश्चिमी जगत के लोग हर पल काम वासना पूर्ति के लिए मल-मूत्र त्याग से अधिक तत्परता से, कभी भी, कहीं भी की तरह तैयार रहते है। पर क्या भारत की ऐसी दुर्दषा कभी रही हैं? नहीं रही, इसीलिए हमारी ऐसी दुर्गति करने की योजनाएं और तैयारी करोड़ों नहीं अरबों रु खर्च करके देश भर में प्रारम्भ की गई है, और वह भी हमारे कल्याण के नाम पर। ये विनाशकारी योजनाएं एड्स के बचाव के नाम पर लागू की जा रही हैं। स्वदेशी-विदेशी स्वयंसेवी संस्थाएं इस कार्य को करने के लिए सरकारी खजाने और विदेशी सहायता से भारी भरकम अनुदान प्राप्त करती रही हैं।

यानी एड्स से बचाव के नाम पर हर बच्चे बूढ़े को हर पल काम वासना के सागर में गिराने का, पश्चिम के षड्यंत्र को लागू करने का काम सरकारी संरक्षण में खूब फल-फूल रहा है। चरित्र, संयम के स्वभाव में विकसित भारतीय समाज, विदेशी आकाओं की भावी योजनाओं में बाधक है। अतः उसे समाप्त करने का कुटिल प्रयास व्यापक स्तर पर सफलता पूर्वक चल रहा है। आपको कोई ऐतराज तो नहीं कि आप और आपके बेटे-बेटियाँ, बहुएं अपने साथ कण्डोम लेकर चलें? कृपया शर्म के कारण इस पर मौन रहकर सहयोगी न बनें। लाखों साल से संयम और चरित्र की प्रतिष्ठा को प्राप्त समाज की होने वाली इस दुर्दशा और विनाश के प्रयासों को हम और खुलकर अपना मत प्रकट करें।

भारतीय समाज की व्यवस्थाओं को तोड़ने वाले पूरी बेशर्मी से बात को कहते और प्रचार करते हैं और हम अपने संस्कारों से बंधे चुप-चाप सब सह जाते हैं। यह सब यूं ही चलने देना आने वाले विनाश की भूमिका बना रहा है। इसमें आपका मौन सहायक हो रहा है। अतः इस पर सोचें, इसे हम और जो उचित लगे वह कहें, पर कुछ करें जरूर। याद रखें कि मनुष्य की हर जरूरत से धन कमाना और उसके लिये उन्हें अति की सीमा तक भोगों को भोगने के लिए उकसाना, हमें पतन और विनाश की खाई में धकेलने वाला है।

‘कंण्डोम साथ लेकर चलने’ जैसे विज्ञापन देखकर सर झुककर गुज़र जाने से काम नहीं चलेगा। बच्चों और युवाओं के कोमल मन को विकृत बनाने पाले इन कुप्रयासों का विरोध दर्ज करवाना एक बार शुरू तो करें, आप जैसे कइ लाग होंगे जो आपके साथ़ जुड़जाएंगे।

अन्यथा पूरी संस्कृति पतन के खाइ में गिरकर समाप्त होती जाएगी।

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16 Comments on "कल्याण के नाम पर कण्डोम"

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dilip
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‘जागतिक षड्यंत्र’ ‘आज़ादी बचाओ आन्दोलन, २१-बी, मोतीलाल नेहरु रोड, इलाहाबाद-२११००२’ इनका इमेल या फोन नबर देने की कृपा करे मेरा नबर है 09370133070

डॉ. राजेश कपूर
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हे इन्डियन , सही नाम छुपाने की क्या ज़रूरत आ पडी, पहले ही एक नकली नाम वाली / वाला जो है वह काफी नहीं क्या? खैर आपकी जानकारी के लिए फिर भी बतला दूँ कि एड्स का वायरस जानबूझकर बनाने और इसके अत्यंत दुर्बल होने की बात हवाई या निराधार नहीं है. प्रमाणों के लिए ‘गूगल’ में धुंध कर देख लें. साईट्स निम्न हैं———— * Conspiracy Planet. Com इसमें विस्तृत जानकारी मिलेगी कि किस जासुउसे संस्था ने किसके कहने पर एड्स का वायरस बनाकर कैसे और कहा, क्यूँ फैलाया. * Mercola.com में सर्च के विकल्प में आपको वैक्सीनेशन की भयानक… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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हे इन्डियन महोदय, अपना सही नाम लिख देते तो आप की पहचान छुपाने के प्रयास से कोई संदेह तो न उपजते. खैर आप की जानकारी में लादूं कि माननीय मनमोहन सिंह जी के वश में एड्स आदि के कार्यक्रमों को रोकना या चलाना नहीं है. ये सब तो संसार की ऐसी ताकतों के आदेश पर चलता है जो अमेरिका की सरकार तक को संचालित करते हैं. हम लोग पढने-पढ़ाने का प्रयास तो करते नहीं, बस अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्रकारियों के प्रचार के शिकार बन कर अपनी बर्बादी का कारण स्वयं बन बैठते हैं. मेरा सुझाव है कि आप मुझ पर तो विश्वास… Read more »
Indian
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सरकार बेवक़ूफ़ है रेड रिबन पर इतना खर्चा कर रही है मनमोहन सिंह जी अगर आप मेरी आवाज़ सुन रहे हो तो फालतू खर्च रोक दो क्योंकि एड्स की दवा श्री कपूर जी के पास है

डॉ. राजेश कपूर
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AIDS को लेकर कुछ प्रश्न उठाये गए हैं जो की आज के सन्दर्भ में बड़ा महत्व का विषय है. इस बारे में मेरी दृष्टी में जानने योग्य जो ज़रूरी बातें हैं वे ये हैं——– *१* AIDS का इलाज अत्यंत आसान है. मेरी इस बात पर आसानी से विश्वास नहीं आयेगा. पर पूरी बात के बाद आशा है की आप विश्वास करने लगेंगे. *यदि तुलसी, नीम, बिल्ब या बेल गिरी के पत्ते ( प्रत्येक के ५-७ पत्ते) प्रातः काल ४-७ काली मिर्च के साथ चबाये जाएँ तो एड्स रोग ठीक हो जाएगा. इसका वायरस वास्तव में अत्यंत दुर्बल होता है जो… Read more »
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