लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

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daniel-andes-goat-boyअविकसित मानव बच्चों की सच्ची कहानियां (तीन)

डा. राधे श्याम द्विवेदी

यह एक लड़का एण्डीज ,पेरू देश के जंगलों में 1990 में देखा गया था। उस समय उस लड़के की उम्र 12 साल थी। वह जब 4 साल का था तब या तो वह बकरी द्वारा उठा लिया गया था या किसी ने उसे बकरियाके के झुण्ड के साथ छोड़ दिया था। आठ वर्षो तक वह बकरियों के झुण्ड से दोस्ती करके जंगल मे प्राकृतिक रूप में पला था। वह दूध पीकर, पेड़ों की जड़ें खाकर तथा जामुन खा खाकर अपनी जिन्दगी बचा लिया था। जंगल में रहने व वहां के पर्यावरण में पलने के कारण वह जंगल जैसे तथा वकरी जैसे विशेषताओं से युक्त हो गया था। उसके हाथ व पैर कठोर हो गये थे। वह हाथ और पैर चारों की सहायता से चलता फिरता था। उसके हाथ और पैर बकरी के खुरों की तरह काम करते करते कठोर हो गये थे। उसकी मांस पेशिया तथा हड्डियां कुछ अलग तरह से ही बनी हुई थी। उसके हाथ व पैर के तलवे बहुत कठोर बन गये थे। वह मानव भाषा नहीं सीख पाया था । अलबत्ता वह बकरे व बकरी से संवाद कर लेता था। सभी बकरा बकरी उसकी आवाज को समझते भी थे एवं तदनुरूप आचरण भी करते थे।

उसके खोजे जाने के बाद वहां के केन्सास राज्य विश्वद्यिालय की एक टीम गठित की गयी थी। उसने इस बकरी द्वारा पाले जाने वाले लड़़के की सारी गतिविधियों का अध्ययन किया और उसे मानवीय संवेदनाये विल्कुल नहीं पनप पायी थी। फिर भी नये पर्यावरण में जीवन यापन करने के लिए प्रयास भी शुरू कर दिया था। इस जांच दल ने इस बच्चे का डेनियल नाम रखा था।

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