लेखक परिचय

वैदिका गुप्ता

वैदिका गुप्ता

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लिखना बहुत कुछ चाहती हूँ
पर आखिर में क्या लिखूं !!

जीत लिखू या हार लिखूं
या दिल के सारे जज्बात लिखूं
आपनो के प्यार का एहसास लिखूं
या सपनो की सोगात लिखूं।।

वो पल में बीते साल लिखूं
या सदियों लम्बी रात लिखूं
वो उगता सूरज आज लिखूं
या बड़ता हुआ आपराध लिखूं ।।

कोख में मारती बेटी लिखूं
या तेजाब से जलतीं लड़की लिखूं
आंगन में खेलती बिटिया लिखूं
या 16 दिसंबर की घटी घटना लिखूं ।।

सत्ता का हुआ परिवर्तन लिखूं
या विकास के नये रंग लिखूं
पट्रोल के घटते दम लिखूं
या विश्व में हो रहा सम्मान लिखूं ।।

मंदिर में होती पूजा लिखूं
या मस्जिद की नमाज लिखूं
धर्म के नाम पर हो रहे विवाद लिखूं
या भारत की एकता पर खुलकर आज लिखूं।।

आंतक के गन्दे खेल लिखूं
या बच्चो के खून से रंगे हाथ लिखूं
इराक में बढता आंतकवाद लिखूं
या आंतक को मिटाने में सबका साथ लिखूं ।।

लिखना बहुत कुछ चाहती हूँ
पर आखिर में क्या लिखूं ।।

वैदिका गुप्ता

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