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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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कुदरत ने मनुष्य के लिए बहुत से खजाने इकट्ठे कर रखे हैं। प्राकृतिक चिकित्सा उनमें से एक है। आज के युग में इसकी विशेषता बढ़ गयी है। ये शक्तिवर्धन, तरल वनस्पति पदार्थ, फूल की अंतरात्मा को हम तक पहुंचा सकते हैं।

अग्नि, जल, पृथ्वी और वायु, ये तत्व जिंदगी के अटूट हिस्से हैं। ये दवाईयां इनका मिश्रण हैं। बेहद सुरक्षित हैं। यह छह महीने के बच्चे को भी दी जा सकती है। मनुष्य के ऊर्जा कें द्रों को संतुलित रखने में इनका योगदान है। हमारे सोचने की शक्‍ति, स्मरण शक्‍ति, आध्यात्मिक क्रियाएं एवं हमारी भावनाओं पर इनका प्रभाव पड़ता है। क्‍योंकि अब साबित हो चुका है कि बीमारी / रोग पहले विचार में, फिर शरीर में प्रवेश करती है। तन, मन और आत्मा तीनों को शुद्ध रखने से जीवन जीया जा सकता है।

इस चिकित्सा की पहली बार 1930 में डॉक्‍टर एडवर्ड बैच ने खोज की थीजो विश्वभर में ”बैच फ्लॉवर रेमेडीज” के नाम से प्रचलित है। दिल्ली शहर में डॉक्‍टर मालती खेतान ने इन पर शोध करके, वेदों के सार से भारत में उग रहे फूलों से दवाएँ बनाई हैं। वे करीब 70 प्रकार के फूंलों एवं पौधों के साथ काम करती हैं। फूलों को हाथ से तोड़कर, फिर गंगाजल में भिगोकर रखते हैं उसके बाद सूरज की किरणों में रखी जाती हैं। ब्रह्मांड के सकारात्मक ऊर्जाओं को एकत्रित करके डॉ. खेतान इस तरल पदार्थ को बनाते हैं।

इनको ग्रहण करने से हमारा तेजस्व बढ़ता है। हम अपने आपको बेहतर समझ पाते हैं, हमारे भीतर यीन-यांग यानि कि स्त्री-पुरुष तत्वों का समागम करते हैं। ये रोग को जड़ से निकालने का प्रयास करती हैं और हमारे शरीर के टिसुज को मजबूत बनाती है। हमें स्वस्थ और युवा रखने में सहायता करती हैं।

इनका प्रयोग इस प्रकार है: चार बूंद एक ग्लास पानी में, दिन में चार बार लेनी है। किसी दूसरी चिकित्सा में ये दखल नहीं करती हैं। दमा, सर्दी, पेट के विकार, नींद की बीमारी, डिप्रेशन, दर्द, जख्म, पीठ दर्द, ऐसिडिटी, जोड़ों का दर्द, अ?य मनोवैज्ञानिक तकलीफों पर असर करती हैं। हमारे दोष जैसे कि क्रोध, अहंकार, डर, शक, ग्लानि, नफरत, जलन/ईर्ष्‍या, लोभ, काम, वगैरह पर भी फूलों की चिकित्सा काम करती है।

ज्यादा जानकारी के लिए पुस्तक ”फ्लॉवर दैट हील”-डॉ. मालती खेतान, पढ़ी जा सकती है।

-लेखिका चिकित्सक है।

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1 Comment on "फूलों की चिकित्सा – पुनीता बिरिंग"

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Rinku Rai
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lekin manushya ne kudarat ke liye kya eektha kiya hai – kewal pradushan…

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