लेखक परिचय

सत्येन्द्र गुप्ता

सत्येन्द्र गुप्ता

M-09837024900 विगत ३० वर्षों से बिजनौर में रह रहे हैं और वहीं से खांडसारी चला रहे हैं

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उबाल ने कुछ बवाल ने तोड़ दिया

कुछ दिल के मलाल ने तोड़ दिया।

 

जो कमाता था वो ही खाता था वो ।

एक दिन की हड़ताल ने तोड़ दिया।

 

उमीदों ने पंख नए खरीद लिए थे

पर बेतरतीब उछाल ने तोड़ दिया।

 

सिखाई थी अदाकारीहालात ने तो

क्या करें उसी कमाल ने तोड़ दिया।

 

कितना गुलाबी मौसम था देखिये

पता नहीं किस ख़्याल ने तोड़ दिया।

 

ख़िदमत तो उस ने बहुत की मगर

हमें उसकी सम्भाल ने तोड़ दिया।

 

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