गिलानी शांति पुरूष नही कुत्ते की पूंछ है!

शादाब जफर शादाब

भारत को दो दिन पहले ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ का दर्जा देने के मामले में पाकिस्तान पल्टी खा गया। अपनी बात पर पाक दो दिन भी नही टिक सका और उसने अपनी असली सूरत दिखा ही दी। भारत ने अपने जिस पडोसी पाकिस्तान को 1996 में ही ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ देश का दर्जा प्रदान कर दिया था। उसी पाकिस्तान ने वही फैसला लेने में कई सालो के असमंजय के बाद पहले तो भारत को भी ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ का दर्जा प्रदान दिया मगर अब अपनी बात से मुकर गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रज़ा ग़िलानी ने अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ‘‘ पाकिस्तान कैबिनेट ने इस मुद्दे पर केवल आगे बढने की संवेद्धांतिक अनुमति दी है और वाणिज्य मंत्रालय को व्यापार से जुड़े मामलो पर भारत के साथ बातचीत करने की अनुमति दी है। गिलानी ने बडी बेशर्मी के साथ ये भी कहा कि अगर स्थिति अनुकूल रही तो ही हम इसे मंजूरी देगे वरना इस पर रोक लगा दी जायेगी। कहने का मतलब है कि यदि हिन्दुस्तान ने हमारी हा में हा मिलाई तो सही वरना फिर वही अपने पुराने आकाओ वाला रवैया अपना लिया जायेगा। वैसे पाक हिन्दुस्तान को ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ का दर्जा देने के लिये कई वर्ष से तैयार है। पर एसएसआई और कुछ कट्ठरपंथियो की वजह से कभी हा कभी ना हो रही है। अब भी ये फांस एसएसआई और कुछ कट्ठरपंथियो की ही मारी हुई है। क्यो कि पिछले महीने 3 अक्तूबर को इस बात का मसौदा संवेद्धांतिक रूप से तैयार हो गया था। यू तो ये हमारे देश के लिये कोई बडी उपलब्धि थी ही नही इस के बावजूद हम हिन्दुस्तानियो ने एक बार नही बल्कि कई बार एक अच्छे पड़ोसी होने का फर्ज अदा किया है। चाहे वो पिछले साल पाकिस्तान में आई भीषण बाढ में राहत भेजना हो या फिर पाकिस्तान में आये भूंकम्पो या प्राकृतिक आपदाओ में मदद देना। भारत ने हमेशा एक अच्छे पडोसी की तरह पाकिस्तान की मदद की। पिछले साल रमजान के पवित्र महीने में हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में मायूसी छाई हुई थी। पाकिस्तान में आई बाढ रूपी प्राकृतिक आपदा से लगभग एक करोड 50 लाख लोग प्रभावित हुए थे, जबकि बाढ से कम से कम 14000 हजारो लोग मौत की आगोष में समा चुके थे। लाखो लोग बेघर और अपने परिवारो से बिछड चुके थे। इस बाढ से पाकिस्तान का लगभग एक लाख 32 हजार किमी क्षेत्र प्रभावित हुआ था। सब से ज्यादा नुकसान आवास, सडके, सिचाई, और कृषि क्षेत्र को पहुॅचा था। करीब 7 लाख 23 हजार घर नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गये थे। वही इस बाढ से पाकिस्तान में खडी तकरीबन एक अरब डॉलर(करीब 46 अरब रूपये) की पूरी पूरी फसलें नष्ट हो गई थी। अपने पड़ोसी देश की मदद को भारत के प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिॅह ने सरकारी सहायता देने की घोषणा की। पाकिस्तान में भारत की मदद स्वीकारने पर बहस और जम कर राजनीति भी हुई। भारत द्वारा दी गई 50 लॉख डॉलर (लगभग 23 करोड) की मदद का विरोध करने वाले कट्टरपंथियो को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने भी फटकार लगाई।

वैसे तो राजनीतिक गलियारो में पाकिस्तान के इस कदम से ये उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनो देशो के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढाने में मदद मिलेगी। हम लोगो को इस सब से ज्यादा खुश होने की जरूरत नही है क्यो कि पाकिस्तान ने खुद ही कह दिया था कि इस बात से कश्मीर मुद्दे का कुछ लेना देना नही। आईये पहले जानते है कि ये ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ क्या बला है। पाकिस्तान द्वारा भारत को ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ का दर्जा दिये जाने से पाक अपने अन्य सहयोगी देशों की तरह व्यापारिक मामले में भारत को तरजीह देगा। इस से दो देशो के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक और आर्थिक सहयोग बढने का मार्ग प्रशस्त होगा। हालाकि पिछले दिनो सितम्बर में दोनो देशों के वाणिज्य मंत्रियो की बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को अगले तीन वर्षा में बढाकर छह अरब डालर करने का इरादा जाहिर किया गया था। क्यो कि 2010-2011 में दोनो देशो के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6 अरब डालर होने के साथ ही व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में था। पाकिस्तान द्वारा भारत को ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ का दर्जा दिये जाने से पाकिस्तान के व्यापारी बहुत खुश है। इन लोगो का ये कहना है कि इस से भारत का 1.20 अरब लोगो का बाजार हमारे लिये खुल जायेगा। दरअसल पाकिस्तान ने ये कडवी गोली यू ही नही निगली एक तरफ तो उसने अपने इस फैसले से देश के व्यापारियो को खुश कर दिया। दूसरी ओर पाकिस्तान इन दिनो बिजली की भयंकर कमी से जूझ रहा है और वह भारत से बिजली खरीदना चाहता है अगर पाकिस्तान की समाचार एजेंसियो की माने तो पाकिस्तान द्वारा भारत से 500 से 1000 मेगावाट बिजली आयात करने की बात चल रही है। पाकिस्तान ने भारत को ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ का दर्जा दिल पर एक बडा पत्थर रख कर दिया। आज अमेरिका सहित पूरा विश्व आर्थिक मंदी से जूझ रहा है ऐसे में दुनिया जान रही है और भारत की आर्थिक ताकत को भी मान रही है। भारत आज तरक्की कर रहा है वही हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का बहुत बुरा हाल है नवीनतम सन् 2010 के आंकडो से अंदाजा लगता है कि पाकिस्तान साक्षरता, बाल मृत्यू दर, औसत आयु मामलो में भारत के मुकाबले काफी पिछल चुका है भारत में सन् 2010 के आकडे कहते है कि विकास दर 7.4 प्रतिशत है जब कि पाकिस्तान में केवल 2 प्रतिशत है साक्षरता भारत में 66 प्रतिशत है जब कि पाकिस्तान में अच्छी पढाई के सारे संसाधन होने के वावजूद 56.2 प्रतिशत ही लोग साक्षर है हिन्दुस्तान के पास सैन्य क्षमता 3,773,300 कुल सैन्य बल है जो कि विश्व की दूसरी सब से बडी सेना होने का गौरव भी रखता है। हिन्दुस्नान में बेरोजगारी 10.7 प्रतिशत है जब कि पाकिस्तान में 14 प्रतिशत है।

आज पाकिस्तान देश में जिस घरेलू आतंकवाद से जूझ रहा है उस की आर्थिक कमर तोड़ने में इस आतंकवाद का बहुत बडा हाथ है। हाल ही में पाकिस्तानी सेना अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत अफगानिस्तानी सीमा से लगे इलाको में हक्कानी आतंकी गिरोह की गतिविधियो पर रोक लगाने की योजना बना रही है। अमन शांति के लिये किसी भी देश से बात करने और व्यापार करने में कोई हर्ज नही। फिर पाकिस्तान तो हमारा पड़ोसी है। भारत के विषय में पाकिस्तान कि नीयत और ये बात भी जग जाहिर है कि पाकिस्तान एलओसी और सीस फायर का बार बार उल्लंघन करता है। पाकिस्तान में बैठी आईएसआई सरहद से जेहादियो को भारत में जब चाहती है पाकिस्तानी सेना की मदद से प्रवेश करा देती है। पाकिस्तानी फौज गोलाबारी कर भारतीय सेना को गुमराह करती है। ऐसे में पाकिस्तान के साथ व्यापार करना ? या पाकिस्तान द्वारा ‘‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’’ का दर्जा भारत को प्रदान कर देने या न देने से हिन्दुस्तान पर कोई फर्क नही पडने वाला पर हा इतना जरूर कहना पडेगा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसुफ रज़ा गिलानी शांति पुरूष नही बल्कि कुत्ते की पूंछ है जो बारह बरस बाद नलकी में रहने के बाद भी टेढी ही निकलती है।

3 COMMENTS

  1. सादाब जी आपका जितना भी आभार व्यक्त किया जाय कम है आप जैसे प्रगतिशील लोग आज इस बात से सहमत है की भारत के लोग पाकिस्तान की अपेक्षा सम्मानजनक स्थित में है .

    किन्तु कुछ लोगो को आज भी पाकिस्तान ज्यादा खुशहाल नजर आता है .
    इन नासमझ लोगो ने आँखों पर ना जाने कौन सा चश्मा लगा लगा रक्खा है .ऐसे लोगो को बेनकाब करने में आपके महती योगदान की देश को समाज को सख्त जरूरत है
    प्रवक्ता पर आपको पड़ते हुए आपके लेखो से निर्भीकता निष्पक्षता एवं सामाजिकता की जो खुशबु आती है उसे कभी कम मत होने देना .

  2. शादाब भाई आप सही है|
    पर पाकिस्तान के शासन में रहने के लिए मैं यह गिलानी की विवशता के रूपमें देखता हूँ|
    उन्हें कौनसे तत्व या संस्थाएं विवश करती होंगी?
    इसका कुछ निर्देश तो आपने किया ही है|
    आय एस आय को अपनी रोटी भी तो सेंकनी है| और भी संस्थाएं होंगी| मैं निर्णय उनका अपना नहीं मानता |
    वैसे भारत के द्वेष पर पाकिस्तान टिका हुआ है|
    किन्तु, भारत को पाकिस्तान से आगे होने से, कुछ संतोष करने की ज़रूरत भीं नहीं|
    हमारा भ्रष्टाचार ना होता तो हम आज चीन से भी आगे निकल चुके होते|
    बिनती, अन्य पाठक अलग मत व्यक्त करें, मैं उनके विचार जानना चाहता हूँ|

  3. शादाब भी मुबारकबाद. पाकिस्तान खुद ही तबाह हो रहा है. बोया पेड़ बबूल का तो आम कहा से आय. संपक पब्लिक ऑब्ज़र्वर, नजीबाबाद

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