लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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कामिनी कामायनी

भटकते राह मे बर्बादिओ के सुर्ख किस्से हैं ,

जकड़ लेगा तुम्हें मत जाओ उन बदनाम सड़कों पर ।

जहां पर जुल्म ढाए थे दरिंदे आशिकों की जात ,

अभी तक रो रही है आह बन बदनाम सड़कों पर ।

सिमटती है बहाने से बिलखती सूनी ये गलियां

डराता है किसी का दर्द उन बदनाम सड़कों पर ।

कई हसरत पसारे पंख निकले थे फिज़ाओं मे ,

खड़े थे कातिलों की फौज उन बदनाम सड़कों पर ।

मुकामात है नहीं महफूज वह कलियों के खिलने का

शोरे महशर मुखातिब है उन बदनाम सड़कों पर ।

*** ***

कामिनी कामायनी

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