लेखक परिचय

ऋतु राय

ऋतु राय

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

Posted On by &filed under कविता.


-ऋतु राय-   jharkhand-jungle-beauty
झारखण्ड के झरिया का विकास एक ऐसा विकास जिसके बारे में जानकार लगा की अब लोग बड़े निष्ठुर हो गए और ऐसा विकास तो कतिपय नहीं होना चाहिए। लालच एक सीमा त्यागने के बाद ललकारती भी है। प्रकृति के दुःख को अनसुना करना खतरनाक साबित हो सकता है। इस देश के लिए हमारे सामने उत्तराखंड का उदाहरण सबसे बड़ा है लेकिन अभी भी सभी सो रहे हैं और झारखण्ड का झरिया अपने जर्जर विकास पर रो रहा है। झरिया के बारे में जानकार मैं हतप्रभ रह गयी कि ऐसे भी अवस्था में लोग कैसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं? इस पर मैंने कविता लिखी है जिसका शीर्षक है झारखंड के झरिया का जर्जर विकास।

कैसा ये विकास है ?
जिसमें होता है तुम्हारा विकास
तुम्हारे रुपयों का विकास
तुम्हारे घर का विकास
करके हमको सर्वनाश
फिर ये कैसा विकास ?
कोयले की कालिख में
इस कदर लिपटे हैं हम
की यह जलने और जलाने का
जारी है विकास
कोयले के कारोबार से
सफ़ेद लिबास का विकास
लेकिन एक भी कालिख का
दाग नहीं है तुम्हारे सफ़ेद पोशाक के आस-पास
काश कुछ तो होता आस
रुकता ये प्रकृति और पर्यावरण का विनाश
थमता उन सांसों में दूषित धुएं का विकास
स्नायु तन्त्र से तीव्र सांसों की रफ़्तार का विकास
जीवन से तीव्र मृत्यु का विकास
बचपन से तीव्र बुढ़ापे का विकास
अब ठहराव की राह ढूंढ़ रहा
झरिया का बेरहम विकास

Leave a Reply

3 Comments on "झारखंड के झरिया का जर्जर विकास"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
देवेन्द्र कुमार
Guest

pl next poem

देवेन्द्र कुमार
Guest

फिनेवेरय fine

देवेन्द्र कुमार
Guest

वैरी fine

wpDiscuz