लेखक परिचय

रवि कुमार छवि

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(भारतीय जनसंचार संस्थान)

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-रवि कुमार छवि-
johra sahgal

विख्यात फिल्म, रंगमंच कलाकार और नृत्यांगना जोहरा सहगल के निधन से भारतीय सिनेमा को बड़ी क्षति पहुंची जिसकी लंबे समय तक भरपाई नहीं हो पाएगी.. जोहरा सहगल ने अपने लंबे करियर में हिन्दी के अलावा अंग्रेजी फिल्मों में भी काम किया था. वो भारतीय सिनेमा की सबसे बुजुर्ग अभिनेत्री थी लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर वो काफी जिंदादिली की मिसाल थी। उनकी चंचलता और अभिनय के प्रति उनके जुनून ने ही उन्हें अभिनेत्रियों की अलग जमात में लाकर खड़ा कर दिया था. उन्होंने कई फिल्मों में अपने अभिनय से लोगों की दिलों में मिठास घोल दी लेकिन उनकी असल जिंदगी में शायद चीनी कम रह गई। जोहरा थिएटर को अपना पहला प्यार मानती थी। वहीं से उन्होंने अभियन की कई बारिकियां सीखीं।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के एक छोटे से शहर में जन्मी जोहरा सहगल की आंखों में कुछ बड़ा करने के ख्वाब थे. एक नृत्य दल में डांसर के रुप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली जोहरा सहगल ने पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थियेटर से जुड़ी जहां उन्होंने कई नाटकों में अपनी अभिनय प्रतिभा की छाप छोड़ी। लंबे समय तक सक्रिय रहना ही उनकी लंबी उम्र का राज था ज़ोहरा सहगल कहती थीं, “अगर आप निष्क्रिय होकर घर पर बैठ गए तो समझ लीजिए आप खत्म हो गए.”

फिल्म के क्षेत्र में उन्होंने ख्वाजा अहमद अब्बास द्वारा निर्देशित धरती के लाल से फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। जोहरा सहगल के मुरीदों में महानायक अमिताभ बच्चन भी है उन्होंने साल 2012 में ज़ोहरा सहगल को 100 साल पूरे करने पर ‘100 साल की बच्ची’ कहा था. अमिताभ कहते हैं, “एक प्यारी छोटी सी बच्ची की तरह हैं वो. इस उम्र में भी उनकी असीमित ऊर्जा देखते ही बनती है. मैंने उन्हें कभी भी निराश या किसी दुविधा में नहीं देखा. वो हमेशा हंसती, खिलखिलाती रहती हैं.” वह पहली ऎसी भारतीय थी जिसने सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय मंच का अनुभव किया। उन्होंने 1960 के दशक के मध्य में रूडयार्ड किपलिंग की “द रेस्कयू ऑफ प्लूफ्लेस” में काम किया।

उनके सौ साल पूरे होने के मौके पर उनकी बेटी और ओडिसी नृत्यांगना किरन सहगल ने उनकी जीवनी प्रकाशित की थी, “जोहरा सहगलः फैटी.” फैटी इसलिए कि मां वजन को लेकर बहुत सजग रहती थीं लेकिन वो कम न होता था और बेटी ने मां को फैटी कहकर चिढ़ाया. किरन ने अपनी मां के जीवन संघर्ष को बहुत गहराई और दिली तसल्ली के साथ इस किताब में उकेरा था. उनकी अदाओं में एक अजीब सा अल्हड़पन था। जो उन्हें समकालीन अभिनेत्रियों से अलग करता था. यकीन ही नहीं होता कि इतनी विख्यात अभिनेत्री के होने के बावजूद भी उनके अंतिम संस्कार में एकाध सितारों को छोड़कर कोई भी शामिल नहीं हुआ। अधिकतर सितारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें विदाई दी। शायद आज की जिंदगी में सोशल मीडिया एक नए रिश्ते के रूप में उभर गया। यूं तो जोहरा सहगल ने खूब नाम कमाया लेकिन भारत सरकार के संस्कृति और शहरी विकास उन्हें पहचान ही नहीं पाया तभी तो आर्टिस्ट कोटे के तहत ग्राउंड फ्लोर के आवास की अपील की थी क्योंकि ऊपरी मंजिलों पर चढ़ना उतरना उनके लिए मुमकिन नहीं रह गया था. लेकिन सौ साल पार कर चुकीं जोहरा सहगल की ये मांग ठुकरा दी गई! सिर्फ मंत्रालय को लिखे गए पत्र को कोई जवाब भी नहीं आया। बॉलीवुड की लाडली से ऐसे व्यवहार की जितनी भी निंदा की जाए वो कम होगी. जोहरा सहगल हमेशा लोगों के दिलों में रहेगी कभी मां तो दादी बनकर.

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