लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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विपिन किशोर सिन्‍हा

kejriwal sabhaभाजपा के प्रधान मंत्री के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ ताल ठोंक रहे आप के संयोजक अरविन्द केजरीवाल दिनांक १७-४-१४ को दिन भर बनारस और आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे। उन्हें हर जगह खट्टे-मीठे और तीखे अनुभवों से गुजरना पड़ा। उनके साथ भ्रमण करने वाली टीम में स्थानीय कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व लगभग शून्य था। वे हमेशा दिल्ली से आये कार्यकर्ताओं के घेरे में ही रहे जो आप की टोपी लगाए थे। कई स्थानों पर उनको सुनने वालों से अधिक भीड़ सुरक्षा बलों की थी। जिन स्थानों पर उन्होंने जनता से सीधा संवाद स्थापित किया, उनमें से कुछ के दृश्य —–

लंका – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से लेकर अस्सी तक फैले क्षेत्र को लंका कहा जाता है। विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में लंका से संबन्धित दृश्यों का मंचन कभी यही किया जाता था। इसीलिये इस जगह का नाम लंका पड़ा जो आज भी अपरिवर्तित है। राजनीतिक दृष्टि से यह बहुत संवेदनशील क्षेत्र है। यहां से आप पूरे बनारस की नब्ज़ टटोल सकते हैं। अन्ना आन्दोलन के दौरान यहा २४ घंटे सभायें हुआ करती थीं और वातावरण अन्ना और केजरीवाल के ज़िन्दाबाद के नारों से गूंजता रहता था। भ्रष्टाचार के विरोध में नित्य ही प्रभात फेरी निकलती थीं और सायं जुलूस। लंका में रविदास गेट पर बनारसी पान की सर्वाधिक चर्चित केशव पान भंडार है। यहां आकर पान खाना बनारसी ग्लैमर का अंग बन चुका है। कई फिल्मी सितारे और राजनेता स्वयं चलकर केशव की दूकान पर खड़े होकर पान खा चुके हैं जिनकी तस्वीरें दूकानदार ने बड़े करीने से अपनी दूकान में लगा रखी है। ऐसे में केजरीवाल भला केशव की दूकान का पान खाने के लोभ से अपने को कैसे रोक पाते? वे पहुंच गये केशव पान भंडार, पान खाने। दूकान पर हमेशा १५-२० लोगों की भीड़ रहती है। पान नंबर से ही मिलता है। केजरीवाल को भी पान के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ी। इस समय का उपयोग उन्होंने लोगों की राय जानने और नरेन्द्र मोदी को गाली देने के लिये करना शुरु किया। देखते ही देखते माहौल गरम हो गया। मोदी के लिये अभद्र भाषा का इस्तेमाल सुनकर स्थानीय जनता भड़क उठी। अरविन्द केजरीवाल को चप्पल-जूते दिखाये गये, उनपर टमाटर और अंडे फेंके गये, उनके खिलाफ़ जबर्दस्त नारेबाज़ी आरंभ हो गई। डरकर केजरीवाल को बेसमेन्ट में शरण लेनी पड़ी। अगर पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज नहीं किया होता, तो कुछ भी अप्रत्याशित हो सकता था। पुलिस ने बड़ी कठिनाई से उन्हें बाहर निकाला। केजरीवाल ने केशव की दूकान से मीठा पान खाया, सादा पान खाया या सूरती वाला कड़वा पान खाया, यह तो वही जाने, लेकिन इस घटना की चर्चा मुंह में पान घुलाते हुए बनारसी हफ़्तों करेंगे।

दिन के समय केजरीवाल ने बनारस के गांवों का दौरा किया। भीषमपुर गांव में चौपाल के दौरान केजरीवाल ने लोगों से पूछा कि कितने लोग नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। अधिकांश लोगों ने हाथ उठाए, तो उन्होंने दूसरा सवाल जड़ा कि वे मोदी को क्यों पसन्द करते हैं? इसपर किसी ने मोदी को डिसिजन मेकर, तो किसी ने क्षमता वाला नेता कहा। कुछ लोगों ने कहा कि वे भाजपा के पक्ष में नहीं हैं लेकिन मोदी को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं क्योंकि वे भारत का विकास चाहते हैं। केजरीवाल ने जब अपने बारे में जनता की राय पूछी तो लोगों ने बेबाकी से कहा कि उनमें अनुभव और हिम्मत की कमी है। वे जिम्मेदारी संभालने के बदले भागना पसन्द करते हैं। फिर क्या था दिल्ली से आए केजरीवाल के समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच लहज़ा इतना सख्त हो गया कि माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों को चौपाल बीच में ही रुकवानी पड़ी।

गुरुवार को ही जलालपुर, रसूलहा, बरस्तां, बरियारपुर और मुबारकपुर में भी केजरीवाल ने चौपाल लगाई। इस दौरान भी उन्हें तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। जलालपुर में बेरुका निवासी सत्य नारायण सिंह ने केजरीवाल से पूछा कि आपने अपने बच्चों की कसम खाई थी, बावजूद इसके कांग्रेस से समर्थन क्यों लिया? अरविन्द ने अपने उत्तर से उन्हें संतुष्ट करने का भरसक प्रयास किया लेकिन बात और उलझती गई। सत्यनारायण के तेवर सख्त होने पर पुलिस ने उन्हें चौपाल से बाहर कर दिया। केजरीवाल ने प्रत्येक चौपाल में मोदी पर सीधा हमला किया और हर जगह उन्हें भयंकर विरोध का सामना करना पड़ा। सभी चौपालों में खास बात यह रही कि जन-संवाद में अधिकतर लोग आप की टोपी पहने थे लेकिन सवाल-जवाब के दौरान उनका ही लहज़ा इतना सख्त हो गया कि हर चौपाल में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

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32 Comments on "आंखों देखा हाल : बनारस में केजरीवाल की चौपाल"

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हिमवंत
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आर.सिंह. जी केजरीवाल से अत्यधिक प्रभावित है. मुझे उनके भोलेपन पर दया आती है.

आर. सिंह
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एक युवक को उस आदमी के भोलेपन पर दया करने की आवश्यकता तो नहीं, जो कॅम से कॅम स्वतंत्र भारत के उतार चढ़ाव और नेताओं के बॅड बोला पॅन को पच्चास के दशक से देखता आ रहा है।रही बात किसी व्यक्ति विशेष से प्रभावित होने की बात,तो वह उस व्यक्ति विशेष पर नहीं ,बल्कि उसके विचारों और चरित्र पर निर्भर करता है।प्रवक्ता के पृष्ठों पर मेरी जितनी भी टिप्पणियाँ या मेरी रचनाएं हैं,वे इसको प्रमाणित करती है। ऐसे बहुत बार मेरे दूसरों को समझाने के प्रयत्न उसी तरह व्यर्थ हो जाते हैं, जैसे की कुत्ते की दूम सीधी करने के… Read more »
Himwant
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दूध का जला छाछ को भी फूंक कर पीता है. आपकी अपेक्षाओं और विगत में भारत पर शाषण करने वालो ने जो दिया उसके बीच का फर्क बड़ा था, लगता है की आपका भरोसा चुक गया है. लेकिन मैं आपसे थोड़ा जवान हूँ, मैंने उतने पतझड़ नहीं देखे जितने आपने देखे है. मै आशाओं से भरा हूँ. लेकिन मैं किसी ऐसे आदमी पर विश्वास नहीं कर सकता जिसकी पैदाइश विदेशी धन से चलने वाले आई.एन.जी.ओ. के रूप में हुई, मै ऐसे आदमी पर विश्वास नहीं कर सकता जिसने वादें तो ढेरों किए लेकिन दिल्ली की सत्ता मिलने के बाद बड़ी… Read more »
इंसान
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हिमवंत के विचार वास्तविकता के विचार हैं क्योंकि विनोबा भावे के “गीता प्रवचन” में बकरी की मैं मैं स्वरूप वातावरण में पल रहे भारतीय युवा अब ऊब से गये है और कुत्ते की दुम सीधी करने के अप्राकृतिक प्रयास में समय न व्यर्थ कर देश की दयनीय दशा को सुधारने का सोचते हैं| जहां तक मुहावरे की बात है, तनिक सोचें दुम का टेडापन (यदि यह आपको घृणित प्रतीत होता है) सचमुच देश में दयनीय दशा ही है| इस टेड़ेपन का सीधा संबंध भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कुशासन से है और इसे सीधा करने जैसा भीमकाय कार्य बच्चों से नहीं… Read more »
आर. सिंह
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मंदिर किसलिये? पत्थर के सामने शीश झुकाने या उसकी गंदगी साफ करने? एक लघु कथा का रूपांतरण आप ही जैसे युवाओं के लिये किया था। यह लिंक देखिये।http://www.pravakta.com/short-stories-the-priest-of-the-temple रही बात कुत्ते की दुम सीधी करने की,तो वह मुहावरा भारत के यथास्थिति पसंद करने वालों के लिये है। भारत का एक बहुत बड़ा वर्ग,जिसमे युवा भी शामिल हैं,यथास्थिति से चिपटे रहना चाहता है और उन्हे इस स्थिति से इतना प्यार है कि वे किसी भी नवीनता को स्वीकार नहीं करना चाहते।इस पर मैं इतना लिख चुका हूँ कि अब लिखने या उसको दुहराने की इच्छा भी नहीं हो रही है।मुझे इन्ही… Read more »
इंसान
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आपको मंदिर नहीं तो चौपाल पर आ बुढ़ापे को शिष्टाचार और मनोहर ढंग से काटने के लिए अपनी टिप्पणी पर जो निमंत्रण दिया था वह अभी आपके समक्ष नहीं आया है लेकिन मैं आपको अच्छी नीयत (आपकी मंदिर के पुजारी की कहानी) से सीख देने के विचार से फिर यहाँ लौट आया हूँ| आप मंदिर में मर्यादा पुरुषोतम श्री भगवान राम जी की प्रतिमा को पत्थर समझ शीश नहीं झुकायेंगे लेकिन आर्य समाज में निष्ठा रखते आप अपने तर्क की पुष्टि के लिए राम चरित मानस का उद्धरण अवश्य देंगे| अब बुढ़ापे की हठधर्मी को तनिक छोड़ सोचें कि क्या… Read more »
इंसान
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रमश सिंह जी, यदि मंदिर नहीं तो चलो चौपाल पर ही जा कर बैठते हैं| मैं आयु में आप से कुछ वर्ष बड़ा ही हूँ। आपके विस्तृत अभ्यास और मुझ पंजाबी गंवार के समझे-बूझे विचारों के लेन देन से बुढ़ापे को शिष्टाचारपूर्वक और मनोहर ढंग से बिताने की युक्ति ढूँढ निकालेंगे|

आर. सिंह
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सिन्हा जी अच्छा हुआ आपकी मेरे बारे में ग़लतफहमी दूर हो गयी. मैं तो स्वयं अपने को समझदार नहीं मानता. आज के सब समझदार नमो की तलवे चाटने की होड़ में लगे हुए हैं,उस अवस्था में भी जो व्यक्ति उस महान अवतार के विरुद्ध आवाज़ उठाता है,वह समझदार हो ही नहीं सकता. न मैं इतना प्रसिद्ध हूँ न मुझसे किसी को कुछ अपेक्षा है,अतः थप्पड़ खाने की उम्मीद तो नहीं है. अगर किसी ने यह हिमाकत कर ही दीतो मैं उसे एक के बदले दो थप्पड़ लगाने के बाद पूछूँगा कि उसने मुझे थप्पड़ क्यों मारा? रही समझने की और… Read more »
pramod
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kejriwaal congress ki B Team aur aap uske agent

आर. सिंह
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प्रमोद जी ,बहुत लोगों ने आआप को कांग्रेस का बी टीम कहा है,पर आज तक किसी ने इसको सप्रमाण सिद्ध नहीं किया। उसमे आपने अपना नाम भी लिखवा लिया।ऐसे कांग्रेसी इसको भाजपा का बी टीम कहते हैं। मुझे तो राम चरित मानस की यह चौपाई याद आ रही है। जाकि रही भावना जैसी ,प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

Bipin Kishore Sinha
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आप कांग्रेस का एजेंट है, क्या इसे अब भी सिद्ध करने की जरुरत है? AK-49 और आपको स्मृति-दोष हो सकता है लेकिन भारत की जनता को नहीं. दिल्ली में 49 दिन की अल्पमत सरकार किसके समर्थन से चली?

pramod
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kejriwal congress ki B team hai

आर. सिंह
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शिवेंद्र मोहन जी,मैं नहीं मानता कि किसी ख़ास दिशा में अनुभव का सीधा सम्बन्ध उम्र से है.मेरे विचार से आपलोगों की सुई एक जगह पर इसलिए अंटकी हुई है,क्योंकि वह आपलोगों के लिए सुविधा जनक है. जो लोग अपनी बात कहते समय अन्य सभी पहलुओं को ताक पर रख देते हैं,उनके लिए मैं भर्तृहरि के नीति शतक के इस श्लोक का प्रयोग करता हूँ.अगर मैं सप्रमाण यह कहता हूँ कि Modi’s turf flops on edu. Health ,तो मैं यह उम्मीद करता हूँ कि आप सप्रमाण कहें कि यह गलत है.अगर मैं किसी न्यूज चॅनेल का हवाला देकर और नमो के… Read more »
शिवेंद्र मोहन सिंह
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शिवेंद्र मोहन सिंह
जब बोलना जानते हैं तो सुनने का भी दम होना चाहिए। आप लोगों की सबसे बड़ी यही कमजोरी हैं सिर्फ बोलना जानते हैं, जवाब सुनना आप लोगों की आदत नहीं है और यही मैंने अपनी पिछली टिप्पणी में भी लिखा था। “आप” (आआपा) का सिर्फ यही एक एजेंडा है आरोप लगाओ भाग जाओ, और आप बखूबी इसी का पालन कर रहे हैं। आप लोग पार्टी से बंधे हैं और सिर्फ उतना ही देख सकते हैं जितना आपको देखने सुनने की इजाजत है। जैसे घोड़े को चमड़े चश्मा लगा दिया जाता है की वो सिर्फ सामने ही देखे, उससे इतर देखने… Read more »
pramod
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aap party bhagoda party

आर. सिंह
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शिवेंद्र मोहन जी,अगर तर्क संगत बात की जाए तो मैं हमेशा सुनने और बोलने केलिए तैयार हूँ,पर अगर किसी का मष्तिष्क पूर्वाग्रह पूर्ण हो तो,वहां विचार पूर्ण वार्तालाप का कोई स्थान नहीं रहता .अभी जहाँ मैंने वार्तालाप बंद करने की बात कही है,वहां चंद प्रश्न उठाये हैं .अच्छा होता अगर आप उन प्रश्नो का समुचित उत्तर देते हुए वार्तालाप को आगे बढ़ाते,पर आपने वह तो किया नहीं ,अपनी राग अलापने लगे ,जिसमे कुछ भी नया नहीं है,अतः इस तरह के वार्तालाप को आगे बढ़ाने में केवल समय की बर्बादी के अतिरिक्त कुछ भी नहीं.

narendrasinh
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snatak hone se ya bada hone se koi gyata nahi ban jata bat hai koman sens ki usase aage ek general sense hoti hai vo sabhi jivo me hoti hai jaise ki bhay ke karan bhagna pashu or insan me dono me ye general sens hai magar bhed isme apvad hai —— aap ki bato se muje aisa lagta hai ki aap ki chal bhed chal hai aap idhar udhar ki kuch nahi sochte —iske liye aap ko kya kahu ap me or mujme 9 sal ka antar hai —–mai to sirf itna janta hun ki aaj desh ko majbut… Read more »
आर. सिंह
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मान्यवर समीर जी,आपके अंग्रेजी टिप्पणी का हिंदी में उत्तर दे रहा हूँ,बुरा तो नहीं मानियेगा. अगर आप किसी को देश द्रोही इसलिए कह रहे हैं कि आपके वह आपके आराध्य नमो का विरोध कर रहा है तो मैं उस श्रेणी में जाने के लिए तैयार हूँ.ऐसे देश द्रोही कौन है ,इसपर मेरा एक आलेख भी प्रवक्ता डाट कम पर मौजूद है,जिसका लिंक है:http://www.pravakta.com/who-traitor मोदी के विरोध के कारणों पर प्रकाश डालते हुए ,मेरे एक या दो आलेख के अतिरिक्त मेरी अनगिनत टिप्पणियां भी है. अगर परिपक्वता का मतलब लकीर का फ़क़ीर बनना या भेंड़ों की तरह जिधर झुण्ड जा रहा… Read more »
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