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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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चेतना शर्मा

7 अक्टूबर 2011 को पहली बार उत्तर प्रदेश के सरकारी सिस्टम द्वारा लवजेहाद की स्वीकृती का समाचार किसी समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ। इस समाचार में एक सांसद की पोती को नासिर नामक युवक ने कैसे लविंग जेहाद का शिकार बनाया,यह बताया गया है।

उपरोक्त समाचार किसी ऐसे वैसे समाचार-पत्र में नहीं,अपितु उत्तर भारत के सबसे विश्वसनीय हिन्दी दैनिक”दैनिक जागरण” में प्रकाशित हुआ है। कुछ लोगों को “लव जेहाद”या लविंग जेहाद शब्द शायद अच्छा न लगे और इसे हम कट्टरपंथी दकियानूसी लोगों के मस्तिष्क की उपज मान लें,पर यह एक वास्तविकता है जो काफिरों अर्थात् गैर मुस्लिमों के विरूद्ध इस्लाम का सबसे बड़ा हथियार है। अपने प्रारंभिक काल से ही इस्लाम ने इसे बहुत सुनियोजित तरीके से प्रयोग करके अनेक सभ्यताओं और संस्कृतियों को समाप्त कर दिया है।

मैं इतिहास की ओर आज ज्यादा नहीं जाना चाहती,बल्कि लविंग जेहाद के वर्तमान स्वरूप से आप सभी को परिचित करवाना चाहती हूँ।

इस्लामिक धर्मगुरू अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी कौम को समाप्त करने से पहले उसके स्वाभिमान और मान बिन्दुओं को समाप्त करना बहुत आवश्यक है। किसी भी समाज का सबसे महत्वपूर्ण मान बिन्दु उस समाज की स्त्रियां होती हैं। पूरे विश्व में काफिरों (अर्थात् गैर मुस्लिमों की महिलाओं को फंसाने के लिए जो संगठित अभियान चलाया जाता है उसे ही लविंग जेहाद कहते हैं।

मै इस समय हमारे क्षेत्र में और आस-पास चल रहे लविंग जेहाद के विषय में आपको बताना चाहती हूँ।

लविंग जेहाद के अन्तर्गत किसी काफिर (गैर मुस्लिम) की स्त्री या बेटी को किसी मुसलमान द्वारा फंसाकर,बहकाकर,अपवित्र करके उसे मुसलमान बना देने या इस तरह बर्बाद करने का कार्य किया जाता है कि वह स्त्री या लड़की कहीं की न रहे।

इस कार्य के लिए प्रत्येक मस्जिद में एक अघोषित कमेटी होती है जो इमाम के मार्गदर्शन में काम करती है ओर इस कमेटी में क्षेत्र के सभी बुजुर्ग मुसलमानों से लेकर मस्जिद के पास वाले हिन्दू क्षेत्रों में चक्कर लगाने वाले कबाड़ी तथा अन्य रेहड़ी वाले तक सम्मिलित होते हैं। वहां इस विषय पर विस्तृत चर्चा होती है कि आसपास के हिन्दू क्षेत्रों में कौन-सी लड़की जवान हो रही है जिसे आसानी से फसाया जा सकता है या कौन-सी महिला अपने पति से असंतुष्ट प्रतीत होती है जो बाहर के लोगों से हंस-बोलकर बातचीत करती है। ऐसी महिलाओं को चिन्हित करके कुछ हट्टे-कट्टे और सुन्दर दिखने वाले जवान मुसलमानों को आर्थिक तथा दूसरी प्रकार की मदद देकर महिलाओं के इर्द-गिर्द छोड़ दिया जाता है।

आजकल हमारे स्कूल कॉलेजों में जहां सह शिक्षा है वहां अधिकांश छात्र-छात्रायें हिन्दू होते हैं। केवल कुछ ही छात्र-छात्रायें मुस्लिम होते हैं। ये मुस्लिम छात्र-छात्रायें आपस में बहुत संगठित होते हैं। इनका संगठन बहुत मजबूत होने के कारण हिन्दू लड़के इनसे मित्रता कर लेते हैं। मुस्लिम छात्र अपने हिन्दू दोस्तों या मुस्लिम छात्राओं के माध्यम से हिन्दू लड़कियों को अपने जाल में फंसा लेते हैं।

इस लविंग जेहाद का मुस्लिम समाज को बहुत लाभ मिलता है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस बात का बहुत व्यापक प्रचार अपने युवाओं में कर रखा है कि हिन्दुओं के अधिकतर दो बच्चे होते हैं,एक लड़का और एक लड़की। लड़की को भगाकर निकाह कर लिया जाये और लड़के को उचित मौका देखकर कत्ल कर दिया जाये तो बिना किसी कठिनाई के इस्लाम के हाथ में बहुत बड़ी सम्पत्ति लग जाती है। बाद में हिन्दू ल़ड़की को भी खुर्द-बुर्द करना पड़े तो कोई कठिनाई नहीं होती। इस कार्य में सारा मुस्लिम समाज बिना किसी अपवाद के अपने युवाओं के साथ रहता है।

जब कोई मुस्लिम युवक किसी हिन्दू लड़की का अपहरण करके या बहला-फुसलाकर ले जाता है तो यह सारा कार्य अचानक नहीं होता,बल्कि इसकी सारी योजना बहुत पहले से निर्धारित होती है। लड़की को लेकर लड़का तो किसी सुरक्षित और अभेद्य स्थान पर चला जाता है। उस लड़के के पक्ष में सारे मुसलमान एकजुट हो जाते हैं। मुसलमानों के स्थानीय नेता इस तरह के मामलों में सीधे जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को फोन करते हैं और उन्हें धमकाते हैं कि इस मामले में पुलिस ने यदि किसी निर्दोष का उत्पीड़न किया तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। इसका अर्थ है कि पुलिस अपहरण करने वाले या बहला-फुसलाकर लड़की को भगाने वाले बदमाश के किसी साथी या परिजन से पूछताछ करने की हिम्मत ना करे अन्यथा सारे मुसलमान मिलकर शहर को दंगों की आग में झोंक देंगे। लड़की को पूरी तरह से अपने काबू में करने के बाद जब यह तय हो जाता है कि अब यह लड़की कहीं की नहीं रही तो कानूनी कार्यवाही शुरू की जाती है जिसके लिये प्रत्येक मुस्लिम वकील व अन्य लोग सदैव तैयार रहते हैं। कोई भी हिन्दू नेता पीड़ित पक्ष की तरफ से खुलकर नहीं बोलता,क्योंकि हिन्दू राजनेता अपनी आंखों पर धर्मनिरपेक्षता की काली पट्टी बांधकर बैठ चुके हैं। इस कारण लड़की के परिजनों को किसी भी प्रकार से न्याय नहीं मिल पाता। यहां तक कि मीड़िया भी खुलकर ऐसे मामलों को प्रेम की विजय के रूप में प्रस्तुत करता है। तथाकथित बुद्धिजीवी समाज इस तरह के मामलों का बड़ा स्वागत करता है।

लेकिन कोई भी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता या बुद्धिजीवी लड़की या भविष्य में क्या हुआ और इसके पूरे परिवार को किन-किन यातनाओं से गुजरना पड़ा,इस बारे में बिल्कुल विचार नहीं करता।

मुस्लिम युवकों के प्यार में पागल लड़की यदि आर्थिक दोहन के योग्य नहीं होती तो उसकी परिणति बहुत बुरी होती है। अधिकतर लड़कियां कुछ समय के बाद उनके प्रेमियों द्वारा उन दलालों को बेच दी जाती हैं जो उनसे वेश्यावृति करवाते हैं। जो इस परिणति से बच जाती हैं उनका यौन-शोषण पूरे जीवन उनके प्रमियों के मित्रों और रिश्तेदारों के द्वारा किया जाता है और उन लड़कियों का पूरा जीवन नरक की यातनाओं में गुजारना पड़ता है। कुछ दिनों के बाद इनसे मन भर जाने पर इनके प्रेमी अपनी जाति में दूसरा विवाह कर लेते हैं क्योंकि मुस्लिम पर्सनल कानून उन्हें चार विवाहों की अनुमति देता है। उनके घरों में उनकी सजातीय बीबी का महत्व रानी जैसा होता है और काफिर की बेटी उसकी दासी की हैसियत से रहती है। वहां वह एक ऐसी वस्तु बन जाती है जिसका प्रयोग घर के मर्द वक्त बेवक्त अपनी वासना पूर्ति के लिए करते हैं।

बहुत-सी ऐसी लड़कियां अपने माता-पिता और भाई-बहनों की हत्या का कारण बनती है। उनके प्रेमी उनकी सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए उनके रक्त सम्बन्धियों को मौत के घाट उतार देते हैं। इस तरह के अधिकतर मामलों में बेचारी लड़कियों को पता ही नहीं होता कि वे किस तरह से अपने परिवार के विनाश का कारण बन गयीं।

कई घटनायें ऐसी प्रकाश में आयी हैं जहां मुसलमानों के साथ भागी लड़की कई वर्षों तक लापता रही और अपने मां-बाप की मृत्यु के बाद अचानक अपने साथ अपने कई बच्चों और अपने मुस्लिम पैरोकारों को लेकर अपने भाईयों से सम्पत्ति में हिस्सा लेने पहुंच गयी। इन निपट स्वार्थी औरतों के कारण उनके भाईयों-बहनों को कितनी पीड़ा और नुकसान पहुंचता है इसे केवल भुक्तभोगी ही समझ सकता है।

लविंग जेहाद एक विस्तृत और गंभीर विषय है जिसके विषय में तो पूरी पुस्तक ही प्रकाशित की जानी चाहिए। बहुत सारी बाते हैं जो आपको बतायी जानी चाहिएं,परंतु एक बात पूर्ण रूप से निश्चित है कि लविंग जेहाद से हिन्दू समाज को अपूरणीय क्षति हो रही है और इससे मुस्लिम समाज को हर तरह से लाभ ही लाभ हो रहा है। इनमें सबसे बड़ी चोट पीड़ित परिवार को नैतिक रूप से पहुंचती है और वह परिवार हमेशा के लिए समाज में अपना स्थान और अपना आत्म-सम्मान खो देता है।

आज हिन्दू समाज को इस विषय में बहुत गंभीरता से सोचना चाहिए। यदि इस बीमारी से लड़ा नहीं गया तो यह बीमारी सारे समाज को लील जायेगी और शेष रह जायेंगे हमारी कायरता और अकर्मण्यता के किस्से।

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3 Comments on "लविंग जेहाद: इस्लामिक जेहाद का सर्वाधिक खतरनाक स्वरूप"

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sunil patel
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बहुत चौंकाने वाली बात है। इसके बारे में डॉ. कुलदीप जी ने भी प्रवक्ता में लेख लिखा था. अगर योजनाबद्ध तरीके से ऐसा हो रहा है तो बहुत अफ़सोस चिंताजनक है. अगर सरकार की जानकारी में है और सरकार चुप बैठी है तो भविष्य में इसके परिणाम गंभीर हो सकते है . आज लगभग हर पारिवारिक टीवी सीरियल में यही दिखाया जाता है. जिस प्रकार हिंदुस्तान की लघभग ९५ प्रतिशत फिल्मो का theme हीरो हेरोइन का प्यार ही होता है वैसे है हर पारिवारिक और युवा सीरियल का मुख्य बिंदु लड़के लड़की का प्यार ही होता है. प्रत्येक परिवार में… Read more »
Jeet Bhargava
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बहुत कम लोग ऐसी खबरे/लेख लिखने की हिम्मत जुटाते हैं. बाकी सब तो राग-सेकुलर के मारे हैं. एक जानकारी तारक लेख के लिए धन्यवाद.

SARKARI VYAPAR BHRASHTACHAR
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SARKARI VYAPAR BHRASHTACHAR

||ॐ साईं ॐ|| सबका मालिक एक……
एक सवाल…..सच्चे भारतीय दे जवाब ….
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क्या कोई लुच्चा जेहादी पाकिस्तानी मुसलमान बिना १०० -२०० लुच्चे जेहादी भारतीय मुसलमानों की मदद के देश के किसी भी हेस्से को निशाना बना सकता है ? यदि नहीं तो देश के ६५% मुसलमान नमक हराम जेहादी नहीं है ?

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