लेखक परिचय

रमेश पांडेय

रमेश पांडेय

रमेश पाण्डेय, जन्म स्थान ग्राम खाखापुर, जिला प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश। पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन में शौक। सामयिक समस्याओं और विषमताओं पर लेख का माध्यम ही समाजसेवा को मूल माध्यम है।

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-रमेश पाण्डेय- manmohan
मनमोहन सिंह अर्थशास्त्री है। राजनीति में आने से पहले वह भारत जैसे महान देश के गवर्नर रहे। इस देश की महानता रही है कि जिसने परिवर्तन की आहट को महसूस किया और उसके अनुरुप खुद को ढाल लिया तो वह इतिहास पुरुष बन गया। अगर हम द्वापर युग की बात करे तो परिवर्तन की इसी आहट को महात्मा विदुर ने महसूस किया था। त्रेता युग में देखे तो परिवर्तन की इसी आहट को विभीषण ने महसूस किया था। वैसे भी भारत की महानता है कि यहां प्रकृति भी परिवर्तनशील है। यहां की ऋतुए परिवर्तनशील हैं। नदियां और पहाड़ और पठार परिवर्तनशील है। मौजूदा समय में शरद ऋतु परिवर्तित हो रही है और ग्रीष्म ऋतु दस्तक दे रहा है। सो इस गर्माहट के आहट को भांप जिम्मेदार नागरिक गर्मी की झुलसाती हुई तपिश से बचने का इंतजाम करने लगे हैं। कोई घर की एसी ठीक करा रहा है तो कोई कूलर ठीक करा रहा है। गांव में कोई चौबारा ठीक करा रहा है तो कोई ठंडे पानी का इंतजाम करने के लिए मटके की व्यवस्था कर रहा है। ऐसे ही इस देश की सत्ता के परिवर्तन का भी मौसम आ गया है। चुनाव का ऐलान हो गया है। अब रानीतिक दलों के पहलवान अपनी-अपनी बात लेकर मैदान में कूद गए है। फैसला यहां की आम जनता को करना है। यह जनता वही है जो पिछले एक दशक से मंहगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी की तपिश से झुलस रही है। इस तपिशभरी झुलसन के बचने के लिए उसके पास एक मौका आया है। इससे बचने के लिए वह कैसा इंतजाम करेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। पर इतना जरुर है कि इस देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस परिवर्तन की आहट लग गयी है। हम ऐसा इस आधार पर कह रहे हैं कि उनके लिए मोतीलाल नेहरु मार्ग पर एक बंगला तैयार किया जा रहा है, जहां वह 16 मई को आने वाले लोकसभा परिणाम से पहले ही सेवानिवृत्ति प्रवास के लिए जा सकते हैं। पीएमओ कार्यालय ने केंद्रीय लोकनिर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को 30 अप्रैल 2014 तक बंगले में सभी काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मनमोहन सिंह इस तारीख के बाद कभी भी वहां स्थानांतरित हो सकें। सीपीडब्ल्यूडी, 3 मोतीलाल नेहरु मार्ग पर बंगले का नवीनीकरण कर रहा है जिसे दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने फरवरी में खाली किया था। मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर ने बंगले के चयन से पहले फरवरी में इसे देखा था । फिलहाल वे 7 रेसकोर्स रोड स्थित प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास में रह रहे हैं। सन 1920 में निर्मित चार शयनकक्षों वाला यह बंगला 3.5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला है और इसमें एक जैव विविधता पार्क भी है। इसमें कार्यालय की जगह है जो किसी प्रधानमंत्री की जरुरतों को पूरा करती है। बंगले पर दोबारा से रंग रोगन किया गया है और सभी तल, छत तथा प्लास्टर खराबी को दुरुस्त किया गया है। एसपीजी ने बंगले का कई बार सर्वेक्षण किया है। सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने कहा कि एसपीजी जल्द ही जरुरतों की सूची सौंप सकती है, जिसके आधार पर सुरक्षा प्रबंधों के लिए ढांचा तैयार किया जाएगा। सुरक्षा इंतजामों में सीसीटीवी कैमरे और तलाशी बूथ शामिल होंगे। लुटियंस बंगले के आवंटन के साथ मनमोहन और उनकी पत्नी जीवनभर इस बंगले में रहने के हकदार होंगे। देश में चलरही सत्ता परिवर्तन की इस लहर को अगर मनमोहन सिंह ने समझ लिया है तो वह अकारण नहीं। आखिर पूरे जीवन उन्होंने इसी परिवर्तन को बारीकी से देखने का काम किया है और उसी के अनुरुप उसका अनुसरण भी किया है। मै समझ रहा हूं कि परिवर्तन की यह लहर अब बयार बन चुकी है। बयार चलेगी ही क्योंकि यह सत्ता के परिवर्तन की बयार है, मौसम के परिवर्तन की बयार है। इतना ही नही यह देश में एक राजनैतिक युग के परिवर्तन की बयार है।

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