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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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 विश्व हिन्दू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. प्रवीणभाई तोगडि़या जी का प्रेस विज्ञप्ति 

बांग्लादेशी घुसपेठियों और मतों के लोभी राजनेता

काशी/ दिल्ली, 25 जुलाई, 2012

आसाम में भड़के हुए दंगों में मारे गए और विस्थापित किए गए अनेकों मूल वनवासियों और हिंदुओं के लिए त्वरित न्याय की माँग करते हुए विश्व हिंदू परिषद् के अन्तरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ प्रवीण तोगडि़या ने कहा, ‘‘गत कई वर्षों से भारत पर आक्रामकों के हमले होते आये हैं, भारत स्वतंत्र हुआ, फिर भी पाकिस्तान और बांग्लादेश से कश्मीर, आसाम, बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा व अन्य राज्यों में लगातार घुसपेठ चल रही है. गत 15 वर्षों में आसाम में बांग्लादेशी मुसलमानों ने सरकारी मदद से अपने पैर जमा लिए हैं कि उन्हें खुले में यह छूट मिली है कि वे आसाम के मूल वनवासियों, जनजातियों कि हत्या करें, उनके घर जलाएँ, खेतों पर कब्जा जमायें और उन्हें वहाँ से खदेड़कर वहाँ पाकिस्तान का, बांगला देश का झंडा फहराएँ! सरकारी कृपा के बिना यह संभव नहीं और मुसलमान मतों के कारण आसाम के मूल जनजातियों को और हिंदुओं को संरक्षण देना छोड़ राजनेता बांग्लादेशी आयात मतों के सामने घुटने टेके हुए हैं। इसीलिए, गत 10 वर्षों से चलती आ रही मुसलमानों की आतंकी प्रवृत्ति आज आसाम में इस तरह भड़की है! 500 से अधिक गाँव बांग्लादेशी मुसलमानों ने कब्जे कर वहाँ के हिंदुओं को, जनजातियों के घर जलाएँ हैं, 100 से अधिकों को मारा है। 1 लाख से अधिक शरणार्थी आज शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं, जब कि ये मुसलमान घुूसपेठियें सरकारी कृपा से भारत के नागरिक बन बैठे हैं और भारत के मूल नागरिकों का ही नरसंहार कर रहे हैं।’’

डॉ तोगडि़या ने आगे कहा, ‘‘भारत के प्रधानमंत्री और उनके पक्ष की प्रमुख श्रीमती गांधी इन्हांेने आसाम के मुख्यमंत्री को फोन कर केवल मुसलमानों को ही संरक्षण देने हेतु कहा, वहाँ सेना भेजी गयी, मूल जनजातियों और हिंदुओं को मारने के आदेश नहीं होते तो सरकारी बंदूकों से वनवासी और हिंदू नहीं मारे जाते। इस सरकार-प्रचालित नरसंहारी आतंक के लिए और आसाम की जनजातियों तथा हिंदुओं के मानवाधिकार हनन के लिए प्रधानमंत्री और उनके पक्ष की प्रमुख तथा आसाम के मुख्यमंत्री भारत की जनता से क्षमा माँगे। कार्बी आंगलोंग, खासी, दिमासा, जैंतिया, बोडो, चोंगलोई, हाओलाई और अन्य कई जन जातियों पर बांग्लादेशी मुसलमानों के मतों के लिए अत्याचार किए गए हैं। यहाँ तक कि जनजातियों के छोटे छोटे बच्चों को तक नहीं छोड़ा! उनकी शालाएँ आज जलाई गयी हैं और देश का ‘सेक्युलर’ मीडिया आँख मूंदे एकांगी जानकारी सरकार के कारण दे रहा है।’’

विश्व हिंदू परिषद् माँग करती है कि:-

01. आसाम में वहाँ की मूल जनजातियों, वनवासियों और अन्य हिंदुओं का नरसंहार करने के लिए बांग्लादेशी मुसलमान घुसपेठियों को खुली छूट देने के लिए और आसाम तथा भारत को असुरक्षित बनाने के लिए प्रधानमंत्री और उन के पक्ष की प्रमुख भारत की जनता से क्षमा माँगें। 02. आसाम एवं भारत के अन्य राज्यों में घुसे सभी बांगलादेशी मुसलमान घुसपेठियों को त्वरित भारत बाहर कर उन के भारत आने पर प्रतिबंध लगाया जाय. जिन बांगला देशी मुसलमानों को भारत का नागरिक अधिकार दिया गया है, उन्हें भी बांग्लादेश वापस भेज उन के सभी अधिकार छीन लिए जाय।

03. जो कोई नेता ऐसे घुसपेठियों के मतों से चुनकर आये हो, उन सभी का चुनाव खारिज कर उन का चुनाव लड़ने का अधिकार समाप्त किया जाय।

04. आज तक आसाम और अन्य कई राज्यों में बांग्लादेशी मुसलमानों ने अनेक जनजातियों की और अन्य हिंदुओं की जमीने, घर कब्जे किए हैं. उन सभी जमीनों, घरों की मालिकी फिर से मूल नागरिकों को दी जाय।

05. आसाम में नरसंहार में बांग्लादेशी मुसलमानों के हाथों सरकार की गोलियों से मारे गए सभी हिंदुओं को रु 7 लाख मुआवजा त्वरित दिया जाय और उनके परिवारों के बच्चों की शिक्षा और कन्याओं के विवाह की संपूर्ण जिम्मेदारी आसाम सरकार उठाएँ।जिन घरों में कमानेवाले मारे गए हो, उन्हें मुआवजे के अतिरिक्त परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाय।

06. .इस नरसंहार में व पहले भी आतंक में बांगला देशी मुसलमानों के या स्थानीय मुसलमानों के कारण जो हताहत हुए हैं उन सभी जनजातियों और अन्य हिंदुओं को भी यहीं मुआवजा व अन्य सुविधाएँ दी जाय. जो जख्मी हुए हैं, उन के वैद्यकीय उपचारों का खर्चा सरकार उठाएँ और उन्हें रु. 4 लाख मुआवजा दिया जाय.

07. ये सभी हमलें बांग्लादेशी मुसलमानों ने किए हैं इसलिए उन में से या उन्हें सहयोग करने वाले किसी भी स्थानीय मुसलमानों को उपर्युक्त कोई भी मुआवजा या सुविधाएं न दी जाय.

08. भारत के सीमावर्ती प्रदेशों, राज्यों की सीमाएँ सरकार त्वरित बंद करें ताकि भविष्य में भारत को फिर से पाकिस्तान या बांग्लादेश से आनेवाले घुसपेठी जेहादियों से खतरा ना हो.

09. संयुक्त राष्ट्रसंघ (यू. एन.) मानवाधिकार कार्यालय, भारत के महामहिम राष्ट्रपति और भारत के उच्चतम न्यायालय सभी आसाम में हुए इस नरसंहार के लिए बांग्लादेशी मुसलमानों पर और उन्हें सहयोग करने वाले स्थानीय जेहादी मुसलमानों पर तथा उन्हें संरक्षण देनेवाले राजनेताओं पर मुकदमा चलाकर उन्हें सख्त सजा दें.

विश्व हिंदू परिषद् आसाम में घट रही घटनाओं के प्रति सजग है और इशारा देती है, कि आनेवाले 24 घंटों में आसाम के जनजातियों और अन्य हिंदुओं पर होनेवाले अत्याचार रोके नहीं गए तो देशव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन का विचार करने पर सभी हिंदुओं को बाध्य होना होगा.

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4 Comments on "आसाम में मूल वनवासियों और हिंदुओं के नरसंहार का कारण"

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श्रीराम तिवारी
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शुक्र है कि संगमा राष्ट्रपति नहीं बन पाए और अगाथा कि कुर्सी भी खतरे में है.जो लोग इनका समर्थन कर रहे थे उन्हें इस आलेख को पड़कर अपनी भयानक भूल स्वीकार करनी चाहिए और कोकराझार के नरसंहार की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए.

श्रीराम तिवारी
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सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक गैरबराबरी के पलीते को जब निहित स्वार्थों की चिंगारी का संसर्ग मिलता है तो कोकराझार,गोधरा,गुजरात और मुंबई जैसी अमानवीय हिंसक घटनाओं की ज्वाला धधकती है. झगड़े की जड़ पर मठ्ठा डाला जाना चाहिए न कि इस तरह की घटनाओं पर राजनैतिक रोटी सेंकी जानी चाहिए.सरकार ,प्रशाशन सभी अपने-अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करें और विपक्ष भी संयुक्त संसदीय प्रतिनिधि मंडल के रूप में उन जगहों पर तूफानी दौरे करे और मीडिया संयम से काम ले यही वक्त का तकाजा है.

mukesh jain
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धर्म रक्षक श्री दारा सेना 77 खेड़ा खुर्द]नई दिल्ली 110082 दूरभाष 9212023514 प्रेस विज्ञप्ति 27-7-12 कोकराझार में मुसलमानों के घरों में आग लगाना] पूर्वोत्तर से हिन्दुओं और मुसलमानों को मार भगाकर एक अलग ईसाई देश बनाने की आतंकवादी अंग्रेज मिश्निरियों की भयानक साजिश –दारा सेना धर्म रक्षक श्री दारा सेना ने असम के कोकराझार में चर्च के बोड़ो ईसाई आतंकवादी गिरोहों द्वारा मुसलमानो को मार मार के भगाने और लाखों मुस्लिमों के घरों में आग लगाने पर गहरी चिन्ता व्यक्त की।और इसे पूर्वोत्तर से हिन्दुओं और मुसलमानों को मार भगाकर एक अलग ईसाई देश बनाने की आतंकवादी अंग्रेज मिश्निरियों की… Read more »
Anil Gupta
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असम में हालत बिगड़ने के लिए कांग्रेस की वोट बेंक की निति और उनका असीमित मुस्लिम प्रेम है. आज़ादी के बाद से ही असम में पूर्वी पाकिस्तान ( अब बंगलादेश)से घुसपेंठ चल रही है. नेहरूजी के ज़माने में जब इंटेलिजेंस ने इसकी जानकारी नेहरु जी को दी और बताया की इस काम में बिमल प्रसाद चालिहा,मोयिनुल हक़ चौधरी और फखरुद्दीन अली अहमद मदद कर रहे हैं तो नेहरु जी उन्हें रोकने की जगह उन्हें आसाम से हटाकर केंद्र में बुला लिया.अस्सी के दशक के प्रारंभ में जब ओल असम स्टुडेंट यूनियन ने जबरदस्त आन्दोलन किया तो सर्कार ने उन्हें अवैध… Read more »
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