लेखक परिचय

विजय कुमार

विजय कुमार

शिक्षा : एम.ए. राजनीति शास्त्र, मेरठ विश्वविद्यालय जीवन यात्रा : जन्म 1956, संघ प्रवेश 1965, आपातकाल में चार माह मेरठ कारावास में, 1980 से संघ का प्रचारक। 2000-09 तक सहायक सम्पादक, राष्ट्रधर्म (मासिक)। सम्प्रति : विश्व हिन्दू परिषद में प्रकाशन विभाग से सम्बद्ध एवं स्वतन्त्र लेखन पता : संकटमोचन आश्रम, रामकृष्णपुरम्, सेक्टर - 6, नई दिल्ली - 110022

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विजय कुमार

गत 18 सितम्बर, 2012 को रामपुर (उ0प्र0) में मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर एक विश्वविधालय का उदघाटन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया। इस अवसर पर उनके पिता श्री मुलायम सिंह तथा प्रदेश की लगभग पूरी सरकार वहां उपस्थित थी।

इस वि0वि0 के सर्वेसर्वा रामपुर से विधायक तथा प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खां हैं। उन्होंने इसे अपना स्वप्नदर्शी प्रकल्प बताते हुए मो0 अली जौहर को महान देशभक्त बताया। मुख्यमंत्री महोदय ने भी इस संस्थान को भरपूर धन देने तथा अलीगढ़ वि0वि0 की तरह विश्वविख्यात बनाने की घोषणा की।

पर ये मौलाना मोहम्मद अली जौहर कौन थे, इस बारे में जानना रोचक होगा। कांग्रेस के इतिहास में जिन अली भाइयों (मोहम्मद अली तथा शौकत अली) का नाम आता है, ये उनमें से एक थे। रोहिल्ला पठानों के यूसुफजर्इ कबीले से सम्बद्ध जौहर का जन्म 10 दिसम्बर, 1878 को रामपुर में हुआ था। देवबंद, अलीगढ़ और फिर आक्सफोर्ड से उच्च शिक्षा प्राप्त कर इनकी इच्छा थी कि वे प्रशासनिक सेवा में जाकर अंग्रेजों की चाकरी करें। इसके लिए इन्होंने कर्इ बार आर्इ.सी.एस की परीक्षा दी; पर सफल नहीं हो सके।

अब इन्होंने रामपुर नवाब और फिर बड़ोदरा दरबार में नौकरी की। इसके बाद इन्होंने कोलकाता से कामरेड, दिल्ली से हमदर्द, इंग्लैंड से मुस्लिम आउटलुक तथा पेरिस से एको डील इस्लाम नामक पत्रिकाएं निकालीं। फिर ये हिन्दुओं को धर्मान्तरित कर इस्लाम की सेवा करने लगे। इसके पुरस्कारस्वरूप इन्हें मौलाना की पदवी दी गयी।

प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की ने अंग्रेजों के विरुद्ध जर्मनी का साथ दिया। इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने युद्ध जीतकर तुर्की को विभाजित कर दिया। तुर्की के शासक को मुस्लिम जगत में ‘खलीफा कहा जाता था। उसका साम्राज्य टूटने से मुसलमान नाराज हो गये। अली भार्इ तुर्की के शासक को फिर खलीफा बनवाना चाहते थे।

इधर गांधी जी चाहते थे कि मुसलमान भारत की आजादी के आंदोलन से किसी भी तरह जुड़ जाएं। अत: उन्होंने 1921 में ‘खिलाफत आंदोलन की घोषणा कर दी। कांग्रेसजन गांधी जी के आदेश पर जेल भरने लगे। यधपि इस आंदोलन की पहली मांग खलीफा पद की पुनस्र्थापना तथा दूसरी मांग भारत की स्वतंत्रता थी। इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा0 हेडगेवार इसे ‘अखिल आफत आंदोलन तथा हिन्दू महासभा के डा0 मुंजे ‘खिला-खिलाकर आफत बुलाना कहते थे; पर इन देशभक्तों की बात को गांधी जी ने नहीं सुना। कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टीकरण का जो देशघाती मार्ग उस समय अपनाया था, उसी पर आज भारत के अधिकांश राजनीतिक दल चल रहे हैं।

इस आंदोलन के दौरान ही मो0 अली जौहर ने अफगानिस्तान के शाह अमानुल्ला को तार भेजकर भारत को दारुल इस्लाम बनाने के लिए अपनी सेनाएं भेजने का अनुरोध किया। इसी बीच खलीफा सुल्तान अब्दुल माजिद अंग्रेजों की शरण में आकर माल्टा चले गये। आधुनिक विचारों के समर्थक कमाल अतातुर्क नये शासक बने। देशभक्त जनता ने भी उनका साथ दिया। इस प्रकार खिलाफत आंदोलन अपने घर में ही मर गया; पर भारत में इसके नाम पर अली भाइयों ने अपनी रोटियां अच्छी तरह सेंक लीं।

अब अली भार्इ एक शिष्टमंडल लेकर सऊदी अरब के शाह अब्दुल अजीज से खलीफा बनने की प्रार्थना करने गये। शाह ने तीन दिन तक मिलने का समय ही नहीं दिया और चौथे दिन दरबार में सबके सामने उन्हें दुत्कार कर बाहर निकाल दिया।

भारत आकर मो0 अली ने भारत को दारुल हरब (संघर्ष की भूमि) कहकर मौलाना अब्दुल बारी से हिजरत का फतवा जारी करवाया। इस पर हजारों मुसलमान अपनी सम्पत्ति बेचकर अफगानिस्तान चल दिये। इनमें उत्तर भारतीयों की संख्या सर्वाधिक थी; पर वहां उनके मजहबी भाइयों ने उन्हें खूब मारा तथा उनकी सम्पत्ति भी लूट ली। वापस लौटते हुए उन्होंने देश भर में दंगे और लूटपाट की। केरल में तो 20,000 हिन्दू धर्मांतरित किये गये। इसे ही ‘मोपला कांड कहा जाता है।

उन दिनों कांग्रेस के अधिवेशन वंदेमातरम के गायन से प्रारम्भ होते थे। 1923 का अधिवेशन आंध्र प्रदेश में काकीनाड़ा नामक स्थान पर था। मो0 अली जौहर उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष थे। जब प्रख्यात गायक विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ने वन्देमातरम गीत प्रारम्भ किया, तो मो0 अली जौहर ने इसे इस्लाम विरोधी बताकर रोकना चाहा। इस पर श्री पलुस्कर ने कहा कि यह कांग्रेस का मंच है, कोर्इ मस्जिद नहीं; और उन्होंने पूरे मनोयोग से वन्दे मातरम गाया। इस पर जौहर विरोधस्वरूप मंच से उतर गये।

इसी अधिवेशन के अपने अध्यक्षीय भाषण में जौहर ने 1911 के बंगभंग की समापित को अंग्रेजों द्वारा मुसलमानों के साथ किया गया विश्वासघात बताया। उन्होंने पूरे देश को कर्इ क्षेत्रों में बांटकर इस्लाम के प्रसार के लिए विभिन्न गुटों को देने तथा भारत के सात करोड़ दलित हिन्दुओं को मुसलमान बनाने की वकालत की।

उनकी इन देशघाती नीतियों के कारण कांग्रेस में ही उनका प्रबल विरोध होने लगा। अत: वे कांग्रेस छोड़कर अपनी पुरानी संस्था मुस्लिम लीग में चले गये। मुस्लिम लीग से उन्हें प्रेम था ही। चूंकि 1906 में ढाका में इसके स्थापना अधिवेशन में उन्होंने भाग लिया था। 1918 में वे इसके अध्यक्ष भी रहे थे।

मो0 जौहर 1920 में दिल्ली में प्रारम्भ किये गये जामिया मिलिया इस्लामिया के भी सहसंस्थापक थे। 19 सितम्बर, 2008 को बटला हाउस मुठभेड़ में इस संस्थान की भूमिका बहुचर्चित रही है, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मोहन चंद्र शर्मा ने प्राणाहुति दी थी।

मो0 जौहर ने 1924 के मुस्लिम लीग के अधिवेशन में सिंध से पशिचम का सारा क्षेत्र अफगानिस्तान में मिलाने की मांग की। 1930 के दांडी मार्च के समय गांधी जी की लोकप्रियता देखकर उन्होंने ही कहा था कि व्यभिचारी से व्यभिचारी मुसलमान भी गांधी से अच्छा है।

1931 में वे मुस्लिम लीग की ओर से लंदन के गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने गये। वहीं चार जनवरी, 1931 को उनकी मृत्यु हो गयी। मरने से पहले उन्होंने दारुल हरब भारत की बजाय दारुल इस्लाम मक्का में दफन होने की इच्छा व्यक्त की थी; पर मक्का ने इसकी अनुमति नहीं दी, अत: उन्हें येरुशलम में दफनाया गया।

यह भी ध्यान देने की बात है कि मो0 अली जिन्ना पहले भारत भक्त ही थे। उन्होंने इस खिलाफत आंदोलन का प्रखर विरोध किया था; पर जब उन्होंने गांधी जी के नेतृत्व में पूरी कांग्रेस को अली भाइयों तथा मुसलमानों की अवैध मांगों के आगे झुकते देखा, तो वे भी इसी मार्ग पर चल पड़े। जौहर की मृत्यु के बाद जिन्ना मुसलमानों के एकछत्र नेता और फिर पाकिस्तान के निर्माता बन गये।

भारत और भारतीयता, हिन्दू और हिन्दुत्व के प्रबल विरोधी के नाम पर बने विश्वविधालय से कैसे छात्र निकलेंगे, यह समझना कठिन नहीं है

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25 Comments on "हिन्दुद्रोही मौलाना मोहम्मद अली जौहर"

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इंसान
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मेरे विचार में रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के उद्घाटन को लेकर स्वयं मोहम्मद अली जौहर के व्यक्तित्व पर लिखा यह लेख भारतीय सद्भावना के प्रतिकूल है| लेखक में अवश्य परिपक्वता की कमी है लेकिन अज्ञान के कारण यहां टिप्पणीकारों को लेख में प्रस्तुत विषय के अनुकूल बह हिन्दुद्रोही शब्द के नाम पर विष घोलते देख मैं अति चिन्तित हूँ| क्यों न हम लगे हाथों इतिहास में कुछ और पीछे जा गुरु नानक के भाई मरदाना का भी बहिष्कार कर दें? भाई मरदाना मुसलमान थे| आज भारत में भ्रष्टता व अनैतिकता के बीच कानून और न्याय के भंग होते… Read more »
Mahesh Bhargav
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मुसलमानों को तो हर बार अपनी देश भक्ति साबित करनी होगी. क्यूंकि वो कई बार पीठ में छुरा घोंप चुके है. चाहे हमलावर बन कर भारत में आना हो. १९४७ का बंटवारा हो या कश्मीर का मसला .. हर बार मुसलमान ने ही देश का बंटवारा करवाया है. और फिर से मुसलमान चाहते है की उन पर भरोसा किया जाये क्यूंकि वो देशभक्त है…?

डॉ. मधुसूदन
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Edward Said, a Columbia University professor,
writes, “For the right, Islam represents barbarism; for the left,
medieval theocracy; for the center, a kind of distasteful exoticism.
In all camps, however, there is agreement that even though little
enough is known about the Islamic world there is not much to be
approved of there.”

Soham Anarya
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Madhusudan Uwach seems an illiterate guy who knows to read only that much which soothes his eyes!

Edward Said was a Middle East Strategist and a Palestinian Christian by birth. He wrote all those that USA Govt. wanted. Still I will not say he responded unjustly but Mr. Uwach opened his hatred card just by playing a dirty trick (which the Arya Samajis usually do) when he quoted Said’s words that were but his mere reaction upon the trend to spew Islam then and which never was to malign it!

इंसान
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It is sad how Dr. Madhusudan Uvach grossly violated the essence of the statement in what Professor Edward Said, a Palestinian–American, said in his book, Covering Islam, and put it coarsely to mean what the commentator wanted to convey. It has no relevance whatsoever except to add further malice to the already fractured article here. Why do we always seem to barge in where we do not belong?

Mohammad Athar Khan, Faizabad Bharat
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Mohammad Athar Khan, Faizabad Bharat

आप इस देश के मालिक हैं क्या जो आपके सामने हम अपनी देशभक्ति साबित करें. आप से कौन कह रहा है कि आप हमें देश भक्त मानें. आप अपने भाजपा नेता जसवंत सिंह की किताब पढ़िए, इस देश का बटवारा नेहरु ने करवाया था. पैसे लेकर पाकिस्तान को ख़ुफ़िया सूचनाये आप लोग देते हो मुसलमान नहीं. देश को लूट कर विदेशों में काला धन आप लोग जमा कर रहे हो मुसलमान नहीं. गाँधी या इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की हत्या क्या मुसलमानों ने की थी?

Shafeeq
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ऐसा कोई गाँव ; शहर देश नही जिसमे अच्छे और बुरे लोग न पाए जाते हो और न ही कोई ऐसा धर्म है यह अपने ऊपर निर्भर करता है कि हम अपने देश और अपने धर्म अच्छा बनाते है या बुरा जब हम बुरा बोलते है या बुरा करते तो हमे बुरी नजर से देखा जाता है चाहे हंम किसी भी देश या किसी भी धर्म से हो और अगर हम अच्छा करते है तो सभी हमारी तारीफ करते है फैसला हमे करना है कि हम क्या बनना चाहते है हिन्दुस्तानी या पाकिस्तानी हिन्दू या मुसलमान या फिर अच्छा या… Read more »
संजय कुमार (कुरुक्षेत्र)
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Excellent .

Shafeeq
Guest

ना हिन्दू बुरा है ना मुसलमान बुरा है आ जाए बुराई जिसमे बस वो इन्सान बुरा है

डॉ. मधुसूदन
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एक और विश्व विद्यालय खोलिए ==> “ओसामा बिन लादेन विश्व विद्यालय”<=== और फिर आतंकवादी विज्ञान में गुणवत्ता सहित पढ़ाई करवाइए. गुणवत्ता गुणवत्ता ही होती है. चाहे किसी भी विषय में क्यों न हो? कसाब को उदघाटन के लिए बुलाइए.

Mohammad Athar Khan, Faizabad Bharat
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Mohammad Athar Khan, Faizabad Bharat

उदघाटन के लिए प्रज्ञा सिंह और कर्नल पुरोहित को बुलाएँगे. आप लोगो ने बहुत अफवाह फैलाई लेकिन सच्चई सामने आचुकी है, कि इस देश में आतंवाद संघ वाले फैला रहे हैं. समझौता एक्स., मक्का मस्जिद हैदराबाद, अजमेर शरीफ और माले गांव के धमाकों में संघ का हाथ साबित हो चुका है. मालेगांव के आरोपी ने अपना जुर्म क़ुबूल भी किया है.
इसराइल की मदद से आप लोगों ने आतंकवाद में अच्छी गुणवत्ता मेंटेन की है.

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