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प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार जेलों में बंद मुस्लिम अपराधियों को छोड़ने की बात कहती आ रही है और समाचार पत्रों से प्राप्त समाचारों के अनुसार कुछ मुस्लिम अपराधियों को छोड़ भी दिया गया है। सपा सरकार का कहना है उसने चुनावों के समय मुसलमानों से वादा किया था कि वह सत्ता में आने के बाद इन अपराधियों को छोड देगी। अब आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ब्राह्यणों के खिलाफ एससी, एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों को वापस लेने का वादा किया। अपने आप को सेकुलर कहने वाले मुलायम सिंह सत्ता पाने के लिए मजहब एवं जातिवाद आधारित राजनीति कर रहे है। मुस्लिमों की सभा में मुस्लिम अपराधियों को छोड़ने की बात कही जाती है और उसे पूरा भी किया जाता, ब्राह्यमणों की सभा में उन पर चल रहे मुकदमों को वापस लेने की कही जाती है। आज उत्तर प्रदेश सरकार संविधान तथा न्यायपालिका के विरूद्ध जाकर लगातार अपराधियों को छोडने का प्रयास कर रही है। जबकि पूरे प्रदेश के अधिसंख्य अधिवक्तागण व अन्य सामाजिक संगठन इस प्रकार से मुस्लिम अपराधियों को छोड़ने का लगातार विरोध कर रहे है। अगर इस प्रकार अपराधियों को छोडा जायेगा तो अन्य अपराधियों के हौसले अत्याधिक बढ़ जायेंगे और पुलिस का मनोबल टूटेगा जिससे प्रदेश में आपराधिक गतिविधियां भी बढेगीं। सरकार को प्रदेश की जनता की सुरक्षा की चिंता करते हुए प्रदेश के विकास पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

आजम खां आदि मुसलमान नेताओं से घिरे रहकर केवल एक पक्ष की बात करके घोर साम्प्रदायिकता के व्यवहार से समाजवादी पार्टी जनता को क्या संदेश देना चाहती है। पिछले दिनों दो गुटों की आपसी रंजिश में दुर्घटनावश मारे गये मुस्लिम डीएसपीे के परिवार जनों को दो नौकरी तथा 50 लाख दिए जाते है वहीं दूसरी तरफ सीमा पर शत्रु से लड़ते अपना सिर गवाने वाले हिन्दू सिपाही के परिवार वालों को सिर्फ 2 लाख रुपये दिए जाते है। इसके अतिरिक्त मुस्लिम लड़कियों को 30 हजार रूपये व अन्य विभिन्न योजनाओं द्वारा मुस्लिम समुदाय को लाभान्वित करने के कार्यक्रमों ने पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि को बेनकाब कर दिया है। इस प्रकार समाजवादी पार्टी की एकतरफा मुस्लिम भक्ति के कारण बहुसंख्यक समाज अपने आपको ठगा हुआ महसूस करने लगा है।

ये नेतागण मुस्लिम अपराधियों को छोडने की बात करते है और अपनी जान पर खेलकर इन अपराधियों को पकड़ने वाले पुलिसकर्मियों को दंडित करने की सोचते है। यदि सपा सरकार का यही रवैया रहा तो वह दिन दूर नहीं जब प्रदेश सरकार इन अपराधियों की इच्छा अनुसार चलेगी। अगर मुलायम सिंह का सपना पूरा हो गया और वह प्रधानमंत्री बन जाते है तो फिर क्या वह सेना के जवानों को भी आतंकवादियों को पकड़ने तथा मारने के आरोप में जेलों में डाल देंगे तथा इस्लामी आतकंवादियों को ढेरों पुरस्कार देकर उन्हंे रिहा कर देगें।

प्रदेश तथा देशवासियों को सोचना होगा कि अपने आप को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले मुलायम सिंह जब मुस्लिम आधारित राजनीति करके साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे है जिससे समाज में भेदभाव के कारण साम्प्रदायिक वैमनस्य बढ़ रहा है तो फिर राष्ट्र की एकता व अखंडता कैसे सुरक्षित रह पायेगी। अतः समाज को समान रूप से स्वस्थ व निष्पक्ष परंपरा अपनाने से ही प्रदेश व देश का विकास होगा।

आर. के. गुप्ता

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3 Comments on "मुलायम सिंह की मजहब आधारित राजनीति"

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इक़बाल हिंदुस्तानी
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Mulaym की स्पा सरकार मुसिम वोट थ्लोक में मिलने से बनी है इसलिए उनके jayz काम करने मेंकोइ बाई नही है रहा आपके विरोधका सवाल आप भाजपा रथक लगते अं लेकिन दख की बात हैके तीसरी बार
भी उसकी सरकार नही बनेगी.

बीनू भटनगर
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बीनू भटनगर

ये कैसी धर्मनिरपेक्षता है

mahendra gupta
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कहने को धरम निरपेक्ष हैं,लेकिन मुलायम का मुस्लिम प्यार छुपा नहीं है.इसीलिए मीडिया ने इन को मौलाना मुलायम नाम दे दिया था.इसी प्रकार की धरम निरपेक्षता कांग्रेस व अन्य दलों में भी देखि जा सकती है.वैसे देखा जाये तो सत्य यह है कि अपने आपको धरम निरपेक्ष कहने वाले सबसे ज्यादा साम्प्रदायिक हैं.ये सब मुसलमानों को झांसे के अलावा कुछ नहीं देना चाहते,पर जब ज्यादा गले में आ जाती है,तब ऐसे कदम उठा लिए जाते हैं,जैसे मुकदमें उठाना,अन्य समुदाय के लोगों को फंसाना ,आदि बी एस पी ,रा.ज.दल भी कोई पीछे नहीं.सब का चरित्र लघभग एक जैसा ही तो है.संप्रदाय… Read more »
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