लेखक परिचय

अमित शर्मा

अमित शर्मा

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MY choiceमुन्ना आज बहुत खुश था. मैंने पूछा, ‘का हुआ मुन्ना, आज बड़ा खुश दिख रहा है. बात का है? कोई लाटरी-वाटेरी निकल गयी है क्या?’

‘लो, अब कर लो बात. इनको तो कुछ पता इच नहीं’ मुन्ना मेरे ऊपर झल्लाने वाले अंदाज़ में बोला, ‘आपको कुछ पता बी है क्या? अबी अपनी कंट्री में असली वाला डेमोक्रेसी आएला है. डेमोक्रेसी बोले तो लोकतंत्र. ‘अरे वो तो 1947 में ही आ गयी थी, जब गांधी, सुभाष और भगत सिंह ने आज़ादी दिलाई थी. तो अब ये कौन सा नया लोकतंत्र आ गया.’ मैंने पूछा. मुन्ना आज फुल मूड में था. बोला,

‘अरे अंकल उनकी बात छोडो. उन्होंने जो आज़ादी दिलाई थी, वो इनकम्पलीट, बोले तो अधूरी थी. कैसे मालुम? इधर घर में पहिले मां-बाप की दादागिरी, उदर स्कूल जाओ तो मास्टर की दादागिरी…बाद में बीबी की दादागिरी.. जरा सी इदर-उदर कर दो तो पुलिस की दादागिरी..सबी ने वाट लगा रखी थी.. काये कू डेमोक्रेसी..घंटा..जब अपन बी इसी कंट्री का है…टैक्स देता है…तो अपना बी तो कोई राईट होना मांगता है कि नहीं, पर नही, अपना कुछ नहीं. पन अबी बोत हो गया. अबी अपन खुश है…अब दीपू आ गयेली है, दीपू बोले तो दीपिका पादुकोण..वो सब ठीक करेगी.. अख्खा कंट्री में उसके जैसा कोई बिंदास छोकरी नहीं है. जो बोलती है सीधा दिल से बोलती है. लगता है बात सीधे दिल में उतर गयी.’

मुन्ना बोला, ‘अबी असली वाला लोकतंत्र आयेला है.’ ‘वो कैसे’, मैंने पूछा. मुन्ना बोला, ‘वो कल दीपू ने बोला..दीपू ने बोला इट्स माय चॉइस. ये करने का है या नहीं करने का है, वो मैं डिसाइड करेगी, बोले तो माय चॉइस. किससे इश्क करना है, कब करना है, कब नहीं करना है, वो सब अपन डिसाइड करेगी, बोले तो माय चॉइस. मैंने बोला तो इसमें तुम्हारा लोकतंत्र कहाँ गया. मुन्ना खुश होते हुए बोला, अबी तू लाइन पे आया. देख, अब अपन बी डिसाइड करेगा कि किसकी पॉकेट काटना है और किसका गला काटना है, बोले तो माय चॉइस…आखिर डेमोक्रेसी तो मेरे लिए बी है न.

अबी दीपू ने बोला, वो किससे कब सेक्स करेगी, कब करेगी, कब नहीं करेगी, अंदर वाले से करेगी या बाहर वाले से करेगी ये उसकी चॉइस है. बोले तो ये इच बात अपन पे बी तो लागू होएगी ना…बीबी से प्यार करना है या किसी और से करना है वो अपना चॉइस होंगा, बोले तो माय चॉइस..ये अन्दर वाली-बाहर वाली का लफड़ा ही ख़त्म हो गया रे मामू..अबी किससे कितने दिन शादी रखेंगा..कबी तोड़ेंगा.. वो माय चॉइस….बोले तो अपन फ्री हो गया रे…

अंकल क्या है…डेमोक्रेसी तो सबी को इक्वल, बोले तो बराबरी का मौका देती है न…फिर अबी अपन जो बी करेगा वो अपनी डेमोक्रेसी होगा न रे बाबा, बोले तो माय चॉइस होगा ना…अबी कोई लड़का लोग किसी लडकी को छेड़ेगा तो उसकी चॉइस है न, कब छेड़ेगा, किदर छेड़ेगा, ये उसकी चॉइस होगा न…कोई रेप-वेप का लफड़ा नहीं..अभी तो ये अपन लोग आज़ाद हुए ना. दैट्स ट्रू डेमोक्रेसी… माय चॉइस इज़ राईट चॉइस..दूसरे की चॉइस माने नथिंग, बोले तो घंटा..

मुन्ना ने मुझे आगे समझाया. क्या है अंकल, अबी अपन लोग एक मार्च निकलेगा, कैंडल मार्च. उसीका तो फैशन है ना..काये कू? दीपू को अपना लीडर बनाने कू. अपन लोग ने तो स्लोगन, बोले तो नारा बी बना लिया है…

माँ की, न बाप की; नहीं किसी भी खाप की,

चलेगी तो चलेगी, सिर्फ दीपिका वाले छाप की…

 

–अमित शर्मा

 

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