लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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देश की सबसे लंबी सुरंग का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीरी नौजवानों से कहा है कि वे आतंक (टेररिज्म) की जगह पर्यटन (टूरिज्म) को अपनाएं। मोदी ने इन दो अंग्रेजी शब्दों में तुक भिड़ाते हुए एक बड़ी मार्मिक बात भी कह दी। उन्होंने कहा कि उधमपुर से रामबन तक की इस 9-10 किमी सुरंग बनाने में सरकार ने चाहे 3720 करोड़ रु. खर्च किए हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर के 2500 जवानों ने इसे बनाने में अपना खून-पसीना बहाया है।

मोदी ने कहा कि कश्मीर पर्यटन का स्वर्ग है। हर भारतीय कश्मीर की सुंदरता का रसपान करना चाहता है। इसे आतंक का अड्डा बनाने की बजाय पर्यटन का केंद्र बनाया जाए। इस मौके पर कोई प्रधानमंत्री यही कह सकता है। इस सुरंग के कारण अब कश्मीर जाने वाले यात्रियों को कम से कम दो घंटे यात्रा कम करनी पड़ेगी। सड़क मंत्री नितीन गडकरी ने बताया कि अगले दो साल में जम्मू-कश्मीर की सड़कें बनाने पर 7000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। 6000 करोड़ की लागत से एक सुरंग लेह और लद्दाख में भी बनेगी।

ये सब मीठी-मीठी बातें भी कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को कड़ुवी लगीं। आतंकियों ने प्रधानमंत्री के भाषण के तुरंत बाद विस्फोट भी कर दिया। कई लोग हताहत भी हुए। अलगाववादी नेताओं ने कहा कि ये सुरंग और सड़कें कश्मीर के आत्म-निर्णय के विकल्प नहीं हो सकते। यदि कश्मीर की सड़कों पर भारत सरकार सोना और चांदी बिछा दे तो भी कश्मीर की जनता अपनी आजादी की बात छोड़ेगी नहीं।

उन्होंने भारत सरकार की तुलना ब्रिटिश राज से की। उन्होंने कहा विकास तो अंग्रेजों ने भी किया था, फिर भी गांधीजी ने उन्हें भगाया क्यों? अलगाववादियों ने ये जो तर्क दिए हैं, इसके अलावा वे क्या कहते? उन्होंने कश्मीरी जनता को मिलने वाली बेजोड़ सुविधा के लिए भारत सरकार को धन्यवाद भी नहीं दिया। इस सुरंग के कारण पर्यटन की वृद्धि और उससे मिलनेवाली समृद्धि पर भी उन्होंने संतोष प्रकट नहीं किया।

उन्होंने मोदी के द्वारा अटलजी के जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत के नारे के दोहराए जाने पर भी कोई खुशी जाहिर नहीं की। उन्होंने कश्मीर की घाटी में हड़ताल का नारा भी दे दिया। क्या ही अच्छा होता कि कश्मीर की बेहतरी के लिए उठाए गए इस कदम की वे तारीफ करते और भारत की जनता और सरकार से उसके बदले कश्मीर-समस्या के समाधान की अपील करते। वह यह न भूलें कि प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने लाल किले से कहा था कि कश्मीर की स्वायत्ता की सीमा आकाश तक असीम है। क्या कश्मीर का विकास उसकी आजादी को बढ़ाएगा नहीं?

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