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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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– भरतचंद्र नायक

अयोध्या में ढांचा गिरने के बाद 1992 में मध्यप्रदेश सहित चार राज्‍यों की भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को तत्कालीन नरसिंहराव सरकार ने भंग कर एकतरफा कार्यवाही का संकेत दिया। बाद में हुए चुनावों में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में बनी और दस वर्षों में इतनी निरंकुश हो गयी कि बिजली, सड़क और पानी के लिए हुए हा-हाकार ने बीएसपी मुद्दा बना दिया। वर्ष 2003 में हुए विधानसभा में जनता ने भारी बहुमत देकर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता सौंप दी और उमा भारती के नेतृत्व में पंच-ज अभियान के साथ नयी पारी आरंभ हुई। लेकिन तिरंगा यात्रा से उत्पन्न गतिरोध के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने पार्र्टी सरकार का नेतृत्व करते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए अयोध्या बस्ती और गोकुल ग्राम की कल्पना को साकार किया। किसान के बेटे शिवराज सिंह चौहान ने बाद में मध्यप्रदेश में सरकार की बागडोर संभालते हुए भारतीय राजनीति के कई मिथक ध्वस्त कर दिये। कहा जाता था कि भारतीय जनता पार्टी की राज्‍य सरकार अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाती है। दूसरा मिथक था कि राज्‍य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोबारा नहीं बनती। शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता संभालते ही विकास का ताना-बाना बुनकर गांव के ठेठ चौपाल तक पैठ बनायी। उनकी सांसद जीवन में पांव-पांव वाले भैया की पहचान थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज ने जिस तरह प्रदेश के किशोरों, युवकों, छात्राओं और छात्रों को राहत देने का सिलसिला शुरु किया, उनकी पहचान सार्वजनिक मामा की बन गयी। महिलाओं के विकास की जो योजनाएं उन्होंने आरंभ कर सफलतापूर्वक क्रियान्वित कर दिखायी, तो उन्हें गांवों में भैया को संबोधन प्राप्त हो गया।

भारतीय जनता पार्टी सरकार प्रदेश में उल्लेखनीय उपलब्धियां अंकित कर विकास के नये आयाम तय करने में सफल हुई है। गत छ: वषोँ में 3152 मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन करने का क्षमता का सृजन किया जा चुका है जिसे 2013 तक 4796 मेगावाट तक पहुंचाने की रणनीति पर कदम बढ़ रहे हैं। ट्रांसमीशन प्रणाली की क्षमता 6493 मेगावाट से बढ़ाकर 8050 मेगावाट पहुंचा दी गयी है। परिषण हानिया 8 प्रतिशत से घटकर 4.09 प्रतिशत रह गयी है। गांवों में नियमित 24 घंटा और खेतों की सिंचाई के लिए प्रतिदिन आठ घंटा बिजली की सुनिश्चितपूर्ति के लिए फीडरों का विभक्तीकरण करने की योजना 5 हजार करोड़ रु. लागत की दो चरणों में पूरी का जा रही है। प्रदेश में घरेलु उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली पूर्ति के साथ औद्योगिक इकाईयों को बिना इंटरपसन के 24 घंटा बिजली पूर्ति की व्यवस्था की जा चुकी है।

2003 तक सड़क परिवहन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की सड़कों की पहचान गङ्ढे के रूप में बन चुकी थी। सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने भगीरथ प्रयास आरंभ किये। राजधानी भोपाल से संभागीय मुख्यालयों को जोड़ने वाली, सँभाग से जिला और जिला से अनुविभाग को जोड़ने वाली सड़कों पर युh स्तर पर कार्य किया गया और अब मध्यप्रदेश में सड़क यात्रा सुहावने सफर और निरापद यात्रा बन चुकी है। 34 हजार किलोमीटर सड़कें

बनायी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री सड़क योजना वरदान बनी

शिवराजसिंह चौहान ने महसूस किया कि प्रदेश के सुदूर अंतवर्ती गांवों में सड़क का अभाव अभिभाष है। मुख्यमंत्री सड़क योजना में 500 आबादी वाला प्रत्येक गांव जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गयी और अप्रैल

2010 से उस पर अमल शुरु हो चुका है। जनजातीय क्षेत्रों में अढाई सौ आबादी के गांवों और टोलों को भी शामिल किया गया है। इस तरह अगले तीन वर्षों में प्रदेश में 2013 तक 9338 गांव मुख्यमंत्री सड़क योजना से जुड़ जावेंगे। तीन चरणों में 19386 किलोमीटर लंबी ग्रेवल रोड का निर्माण किया जावेगा। इस परियोजना पर करीब 3300 करोड़ रु. की लागत आवेगी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के गुणवत्तापूर्ण अमल में देश में मध्यप्रदेश को सराहा गया है। इसके तहत 34719 कि.मी. लंबी सड़कें पूर्ण हो गयी है। सड़क निर्माण की प्राथमिकता के पीछे उद्देश्य गांवों, मंडियों और शहरों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाकर गांवों में आर्थिक क्रांति लाना है। प्रदेश की 73.54 प्रतिशत जनता गांवों में रहती है। कहा तो जाता है कि भारत की आत्म गांवों में बसती है। लेकिन आजादी के बाद गांवों के आर्थिक पोषण के लिए संचार वाहनी सड़कों की ओर ध्यान नहीं गया। अब यह काम प्राथमिकता से हो रहा है।

सूखे कंठ को पानी, हर खेत को पानी

प्रदेश में निरंतर विकास के चलते बढ़ती जल किल्लत से निपटने के कार्य को चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया। चौंतीस हजार बसाहटों में पेयजल की व्यवस्था करने के साथ सवा नौ हजार शालाओं में भी पीने के पानी का बंदोबस्त किया गया। 58 नगरीय क्षेत्रों में जल योजनाएं पूर्ण कर सूखे कंठों को गीला किया गया। प्रदेश में साढ़े सात लाख हेक्टर अतिरिक्त सिंचन क्षमता का सृजन करते हुए अतिरिक्त भूमि पर सिंचाई की व्यवस्था की गयी। प्रदेश के पश्चिमी अंचल में सिंचाई और बिजली की पूर्ति बढ़ाने के लिए नर्मदा घाटी विकास परियोजना के क्रियान्वयन में गति लायी गयी। इससे 1 लाख 18 हजार हेक्टर सिंचन क्षमता का सृजन हुआ। मान, जोबट, परियोजना की क्षमता का दोहन करते हुए पच्चीस हजार हेक्टर भूमि की व्यास बुझायी गयी।

जलाभिषेक अभियान में हो रही नदियों को पुनजीर्विन प्रदान करने का बीड़ा उठाया। ऐसी 133 नदियों को चिन्हित कर कार्य आरंभ हो चुका है। जल विरासत और धरोहरों के प्रति चेतना जगायी गयी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के बड़े तालाब से जल नायक के रूप में खुदायी का जो अभियान चलाया, उसने प्रदेश के जिलों में हजारों जल नायकों को विरासत को सहेजने के काम में लगा दिया है। कुएं, बावडियों, पोखर नदी सज-धज के साथ जल संग्रहण के रूप में वाटर बाडीज की गणना में शामिल होकर निस्तार के काम आ रहे हैं।

सीहोर जिले के जैतगांव में मध्यम वर्गीय किसान परिवार के यहां जन्म लेने वाले शिवराज सिंह चौहान में परिवर्तन के लिए क्रांति की आग शैशव से थी। गांव में मजदूरी करने वालों के परिवारों की बेहतरी की चाह ने दस वर्ष के शिवराज को मजदूरों का नेता बना दिया। उन्होंने चौपाल पर मजदूरों को जमा किया और कहा कि जब तक गांव वाले मजदूरी नहीं बढ़ाते, काम से गैर हाजिर रहो। अगले दिन जब परिवार का चरवाहा, हलवाला काम पर नहीं आया तो शिवराज की घर वालों ने मरम्मत की और परिवार के जानवर उनके मत्थे मढ़ दिये। शिवराज उन्हें जंगल ले गये और घर का काम निपटाया। लेकिन मजदूरों की मजदूरी बढ़ गयी। पाठशाला में पढ़ने गये और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गये। सोलह वर्ष की आयु में छात्र संघ के अध्यक्ष चुन लिये गये। आपातकाल में जब उन्हें मीसा में निरुh किया गया वे भोपाल सेंट्रल जेल में सबसे कम किशोरवय के मीसाबंदी थे और उन्हें जेल में सभी का खूब स्नेह मिला और संस्कार भी मिले। इसी बीच उनकी दादी का निधन हो जाने पर उन्हें क्षमा याचना की सलाह मिली जिससे वे अंतिम संस्कार में भाग ले सकें। लेकिन उन्होंने माफी से इंकार कर दिया। भारतीय दर्शन, गीता और पं.दीनदयाल के एकात्म मानव दर्शन में वे रम गये। बाद में जब लोकसभा के चुनाव आये तो शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव प्रचार में वक्ताओं में सबसे कम उम्र के वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनायी। उन्होंने विद्यार्थी परिषद में संगठन मंत्री, संगठन महामंत्री और बाद में 1984 में युवा मोर्चा के गठन के बाद प्रादेशिक संयुक्त सचिव का दायित्व संभाला। तत्पश्चात 1988 में उनके नेतृत्व के जादू ने उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद से गौरवान्वित किया। 1990 के विधानसभा चुनाव में बुधनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुन लिये गये। सबसे कम उम्र के विधायक थे। उन्हें मंत्रिपद का प्रस्ताव आया तो उन्होंने नम्रतापूर्वक ठुकरा दिया। लेकिन जल्दी ही जब विदिशा संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव लड़ने का

प्रस्ताव आया शिवराज सिंह चौहान ने चुनौती स्वीकार की। अटलजी दो संसदीय क्षेत्रों से विजयी हुए थे। तब उन्होंने विदिशा से इस्तीफा दे दिया था। चुनाव जीतकर सांसद बन गये। शिवराज सिंह चौहान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जिम्मेदारियां ओढ़ते गये। सफलता के झंडे गाढ़ते गये इसी बीच उन्हें युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेवारी भी मिल गयी। जिस तरह स्नातकोत्तर शिक्षा (दर्शन शास्त्र) में उन्हें स्वर्ण पदक मिला, वे राजनीति के क्षेत्र में भी शिखर की ओर बढ़ते गये। आंदोलन को सफल बनाना, नई क्रांति करना शिवराज का शगल बन गया है। उन्होंने 1988 में क्रांति मशाल यात्रा निकालने की ठानी और राजमाता विजयाराजे सिंधिया क्रांति मशाल यात्रा में शामिल हुई तो 40 हजार की भीड़ देखकर दंग रह गयी। बोली बेटा हो तो शिवराज जैसा, शिवराज विदिशा संसदीय क्षेत्र से अनवरत पांच बार सांसद के रूप में विजयी हुए।

जहां चाह है, वहां राह है। शिवराज के विधानसभा क्षेत्र में एक बंजारा परिवार की कन्या की शादी तय हो गयी। लेकिन माता-पिता की निर्धनता आड़े आयी। जब पांव वाले भैया शिवराज को यह पता चला तो उन्होंने कहा कि बोरना गांव (बुधनी) की कन्या वासंती का कन्यादान खुद लूंगा। धूमधाम से शादी होगी और शिवराज बासंती के मामा बन गये। यही से कन्यादान योजना ने मध्यप्रदेश के साथ देश के अधिकांश राज्‍यों में सामाजिक कल्याण कार्यक्रम का रूप ले लिया। यही कन्यादान योजना मध्यप्रदेश के समाजोन्मुखी कार्यक्रम का अंग बन गयी। शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की कन्याओं के मामा के रूप में लोकप्रिय हो चुके हैं। आजादी के बाद जनतंत्र की स्थापना हुई। लेकिन सामाजिक समरसता के वातावरण में जन और तंत्र की दूरियां समाप्त करने का लगभग प्रयास ही नहीं हुआ। इस काम को शिवराज सिंह ने मिशन बनाया। महिला सशक्तीकरण की बहुप्रतीक्षित लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, गांव की बेटी योजना ने सामाजिक क्रांति को दिशा दी है। कन्या जन्म अभिषाप से वरदान बन रहा है। स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया है। इसका अनुसरण करने को केन्द्र सरकार को भी विवश होना पड़ा है। जन सुनवाई, जन दर्शन, औचक निरीक्षण, लोक कल्याण शिविर, समाधान आन लाईन जैसे अनेक कार्यक्रमों से समाज अंगड़ाई ले रहा है। जन चेतना प्रस्फुटित हो रही है। जन और तंत्र की भागीदारी विकास के नये आयाम दे रही है।

मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने की जब शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की लोग अवाक रह गये। लेकिन उन्होंने एक कलम से गेहूं, धान के समर्थन मूल्य पर प्रदेश से एक सौ रु. क्विंटल और पचास रु. का बोनस दे दिया। फसल कर्ज पर ब्याज की दरें घटाकर तीन प्रतिशत कर दी। आसमानी सुलतानी से फसलों, पशुओं को होने वाली क्षति पर क्षतिपूर्ति राशि को कई गुना बढ़ाकर अपनी किसानों के प्रति प्रतिबध्दता को प्रमाणित कर दिया। जैव खेती की नीति बना दी है।

मध्यप्रदेश को स्वर्णिण प्रदेश बनाना शिवराज सिंह चौहान का सपना है। स्वर्णिम मध्यप्रदेश यात्राएं गांव-गांव में कुतुहल पैदा कर रही है। राजनीति को लोक सेवा के रूप में प्रतिष्ठित करना उनका मिशन बन चुका है। शिवराज सिंह चौहान खुद को मुख्यमंत्री की बजाय प्रदेश की जनता का सेवक बताने में अधिक गर्वित होते हैं। उनके लिए मध्यप्रदेश मंदिर जनता भगवान है। अपने को वे पुजारी कहकर गौरव का अनुभव करते हैं।

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5 Comments on "खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान"

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Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
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Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

श्री श्री राम तिवारी जी धन्यवाद और आभार!

श्रीराम तिवारी
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ऐसे संकलित समाचारों का द्रुतगामी सम्पादन .भी देशभक्तिपूर्ण कार्य है .राजनेतिक हितग्राहिता पर आपका यह करारा एवं समसामयिक घोडा पछाड़ दाव;मध्यप्रदेश की उस जनता के बड़े काम का है jo अभी लड़ना सीख रही है .मध्यप्रदेश का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा की नागनाथ और सापनाथ दो ही विकल्पों के बीच पिसते रहना नियति है .संभवत मीडिया.पूंजीपति और बड़ी जोतों के मालिक भी इन दोनों भृष्ट दलों को पालते पोषते रहे हैं .तीस्ररी ताकत याने निर्धन मजूर ;किसान और आवाम को सही एकजुट विकल्प के रूप में खड़े होने की दरकार है .

श्रीराम तिवारी
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२००४ से पूर्व जब केंद्र में “फील गुड “वालों की सरकार थी और आंध्र में चन्द्र बाबु नायडू ने शाइनिंग इंडिया का उद्घोष किया था तब भी मीडिया का एक बड़ा हिस्सा ;तत्कालीन शाशकों की इसी तरह की भडेती कर रहा था . दिग्विजय सिंह जी ने या कांग्रेस ने जो मध्यप्रदेश में किया उसी का परिणाम है की वे अब सत्ता से बाहर हैं .किन्तु वर्तमान विकाश पुरुष श्री शिवराजसिंह जी कितने पानी में हैं यह मध्यप्रदेश की जनता को अच्छी तरह से मालूम हो गया है . मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष पर एम् पी हाई कोर्ट में मानहानि के… Read more »
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
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Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
मध्यप्रदेश सरकार इतनी अच्छे है तो ये क्या हो रहा है? =================================== बृहस्पतिवार, १९ अगस्त २०१० सरकारी धन को लूटने में जुटी सरकार मध्यप्रदेश सरकार के फ़ैसलों को देखकर “अँधी पीसे-कुत्ते खाएँ” कहावत चरितार्थ होती दिखाई देती है । सत्ता के नशे में डूबी भाजपा को विपक्ष की निष्क्रियता ने निरंकुशता के पंख लगाकर भ्रष्टाचार के आसमान में लम्बी और ऊँची उड़ान भरने के लिये स्वतंत्र छोड़ दिया है । कैबिनेट के एक के बाद एक फ़ैसले बताते हैं कि किस तरह सरकारी खज़ाने का दुरुपयोग कर नेता अपने उद्योग धंधे आगे बढ़ा रहे हैं । इस तरह की योजनाएँ… Read more »
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
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Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

यह विवरण सरिता अरगरे जी की सहमती से उनके ब्लॉग “नुक्ताचीनी” से लिया गया है. जिसका उल्लेख मैंने इस विवरण को पोस्ट करते समय भी स्त्रोत के रूप में किया था, जिसे न जाने किस कारण से यहाँ दिखाया नहीं गया है, इसलिए इसे स्पष्ट करना जरूरी है.

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