लेखक परिचय

गिरीश पंकज

गिरीश पंकज

सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार गिरीशजी साहित्य अकादेमी, दिल्ली के सदस्य रहे हैं। वर्तमान में, रायपुर (छत्तीसगढ़) से निकलने वाली साहित्यिक पत्रिका 'सद्भावना दर्पण' के संपादक हैं।

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calf-cowअब आओ ऊपर वाले तुम, गायों को अगर बचाना है,

इंसान के बस की बात नहीं, वह स्वारथ में दीवाना है।।

जिस माँ का दूध पिया सबने, उस माँ पर नित्य प्रहार किया।

बदले में दूध-दही देकर, माता ने बस उपकार किया।

जो है कपूत उन लोगो को, गायों का पाठ पढ़ना है।। …..

कहने को हिंदू-जैनी है, लेकिन गो-वध भी करते है।

स्वारथ में अंधे हो कर के, पैसों की खातिर मरते है।

जो भटके है उन पथिकों को, अब तो रस्ते पर लाना है।

ये गाय नहीं है धरती पर, सबसे पावन इक प्राणी है,

यह अर्थतंत्र है जीवन का, भारत की मुखरित वाणी है।

भारत ही भूल गया सब कुछ, इसको नवपथ दिखलाना है।। ….

गायो को भोजन मिल जाए, बछडों को उनका दूध मिले,

तब मानव औ गौ-माता के रिश्तों का सुंदर फूल खिले।

बछडे को भी हक़ जीने का, गोपालक को समझाना है।। …..

हो धर्म कोई, भाषा कोई, सबने गायों को मान दिया,

इसलाम मोहब्बत करता है, बाइबिल ने भी सम्मान दिया।

क्या महावीर, क्या बुद्ध सभी ने, गौ को माता माना है।। …

कुछ स्वाद और पैसों के हित, मानव पापी बन जाता है,

पशुओं का भक्षण करता है, फ़िर अपनी शान दिखता है।

मानव के भीतर दानव का, बढ़ता अस्तित्व मिटाना है।।…

अब उठो-उठो चुप ना बैठो, अपने घर से बाहर आओ,

माता को अगर बचाना है तो उसकी खातिर मिट जाओ।

गौ हित में जान गयी तो फ़िर बैकुंठ्लोक ही जाना है।। …

हिन्दू आओ, मुसलिम आओ, सिख, ईसाई सारे आओ,

सबने गौ माँ का दूध पिया, अपनी माँ पर बलि-बलि जाओ।

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13 Comments on "अब आओ ऊपर वाले तुम, गायों को अगर बचाना है…"

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मानव गर्ग
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मानव गर्ग
वाह वाह ! बहुत ही सुन्दर कविता, गिरीश जी । गोमाता के प्रति श्रद्धावान् व उनकी रक्षा के लिए तत्पर बन्धुओं का शक्तिवर्धन करने वाली कविता है । इसमें लय और सङ्गीत जोड़ कर गाने पर कविता का प्रभाव और भी प्रचण्ड होगा, ऐसा मानना है । भारतवासियों, जागो । गोहत्या पाप है और ऐसा जहाँ होता है, वहाँ केवल और केवल दुःख व यातनाएँ रहती हैं, ऐसा कहीं और नहीं, वेदों में लिखा है । जिन देशों में यह पाप होता है, वहाँ के लोग अत्यन्त धनवान् होने के बाद भी अत्यन्त पीडित हैं । पति-पत्नी के रिश्ते टूट… Read more »
lovekesh gaur
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aap ke kavita mae go ki sacchhi kahani hai jo sab ki pol kholti hai chay vo neta ,vaypari ho ya srkari adhakari ho sab ne go ke nam par apni hi jab-thaili bhari hai isiliye yeh haal hi ki desh may say go khatam hoti ja rahi hai .har admi sare kam nahi kar sakta aap apni kavita ke madyam sae jagtiti la rahi hai apna farz nibha rahe hae jo khilapf bol rahe hai unka to kam hi bolana hae kyoki vo kam to khuch kar hi nahi kar saktay hai

Tannu
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Bharat ek sanskritik pradhan desh hai. Janha dharmo ko vishesh izzat di jati hai. Hindu dharm m prachin kal se gau ki pooja or doodh or anay prapt hone wali things k liye janwaro mein visisht esathn tha. Or ise iswar ke dawiya rup m mana or pooja jata tha .gau ki sangya mata se ki jatilekin aajkal jaise gau ka upbhog k liye sanhar ho raha jo bharat ki sanskriti k liye kalank sarkar bhi hath par hath dhari bethi hai inhe bachne k liye kam s kam yuvau ko aage aa kar iska purjur virodh karna chaiye varna… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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भाई गिरीश जी, दुर्योधन कभी किसी के समझाए नहीं समझता. आप तो स्वान्तः सुखाय लिखते हैं, रचनाकार का यही धर्म है. रावण, कंस और दुर्योधन धर्म की बात न कभी समझे न समझेंगे. गो की महानता गो घातकों और उनके समर्थकों, चाटुकारों को कहाँ समझ आन लगी. आप अपनी राह उत्साह और साहस से बढ़ रहे हैं, बढ़ते रहें. सज्जन आपके साथ जुड़ते रहे ,जुड़ते रहेंगे. साधुवाद और शुभकामनाएं.

आर. सिंह
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Kavita achhi hai,par satya se door hai.Maanta hoon gayon ka mahatwa Bharat jaise krishi pradhaan desh ke liye bahut hai,par aisa bhi nahi hai ki uske pare socha hi na jaye.Hamlogon me se bahut aise log honge jinhone gayon ka dudh kabhi piya hi na ho,kyonki dudh dene wale praniyon mein bhains bhi to hai,phir uske bare mein kyon na socha jaye. Rah gayee bhagwan ki baat to ,wah hai ya nahi yah to koi nahi jaanta.Baudh dharma mein mujhe bhagwan kahi nahi dikhe. Yah doosari baat hai aab to Budha ko bhi bhaagwan ka kalki awtaar maan liyaa hai… Read more »
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