लेखक परिचय

गौतम चौधरी

गौतम चौधरी

लेखक युवा पत्रकार हैं एवं एक समाचार एजेंसी से जुडे हुए हैं।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सदस्य श्री इन्द्रेश कुमार न केवल संघ के प्रचारक हैं अपितु प्रखर वक्ता और संवेदनशील चिंतक भी हैं। उनके संवेदनशीलता की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि हिमालय की संस्कृति को बचाने के लिए उन्होंने हिमालय परिवार नामक संगठन को बनाने में बडी भूमिका निभाई। हिमालयी राज्यों की समस्याओं, उसकी सुरक्षा के मुद्दे विभिन्न मंचों पर उठाया। श्री कुमार चीनी चालबाजी को खुब समझते हैं। उन्ही के अध्ययन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सीमा जागरण, भारत तिब्बत मैत्री संघ तथा हिमालय बचाओ आन्दोल, गंगा बचाओ आन्दोलन नामक संगठनों को सक्रिय किया। ईन्द्रेश जी का हिमालयी राज्यों तथा नेपाल पर विषेश अध्यन है। उनके प्रयासों के कारण संघ विचार परिवार में मुसलमानों के लिए अलग से संगठन बनाने की योजना बनी। आज वह संगठन राष्ट्रवादी मुस्लिम मंच के नाम से जाना जाता है। ऐसे अनुभवी राष्ट्र ॠषि के साथ गौतम चौधरी ने अनेक मुद्दों पर बातचीत की। यहां प्रस्‍तुत है प्रमुख अंश प्रस्तुत हैं-संपादक

प्रश्न : – राम मंदिर आन्दोलन को अब फिर से प्रारंभ करने की बात हो रही है। इस आन्दोलन में संघ की क्या भूमिका होने वाली है।

उत्तर : – राम मंदिर पर कई आयोग बैठाए गये हैं। कई जांच समितियां भी बैठाई गयी है। हर एक आयोग और जांच समितियों में बाबारी मस्जिद और इस्लाम के जानकारों को रखा गया है। मेरा मानना है कि जांच समितियों की आख्या और उसके द्वारा खीचे गये फोटो का एक विडियो रिकार्डिंग तैयार कर देश की जनता को दिखाया जाना चाहिए। इसके बाद जनता पर फैसला छोड देनी चाहिए। जनता जो चाहे वह उसके विवेक पर छोड देनी चाहिए। जहां तक राम मंदिर आन्दोलन का सवाल है तो वह आज से नहीं जब बाबर ने मंदिर को तोड कर मस्जिद बनवाया तभी से वहां संघर्ष चल रहा है और वह संघर्ष कभी रूका नहीं। ऐसा कहा जाये कि संघर्ष प्रतिदिन चला तो इसमें भी कोई अतिशोक्ति नहीं होगी। राम मंदिर का संघर्ष पूरा हिन्दु समाज कर रहा है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहयोगी की भूमिका में है। आन्दोलन को चलाने में हमारा काम एक प्रेरक का है। संघ का काम आन्दोलन का नेतृत्व नहीं सहयोग करना है। संगठन सदा से सहयोगी की भूमिका में रहा है और आगे भी उसी भूमिका में रहेगा। संघ रामलला का मंदिर जन्मस्थान पर ही देखना चाहता है।

प्रश्‍न : – गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी लगातार सन 2002 के दंगे के कारण बदनाम हो रहे हैं। विगत दिनों उनको दंगे पर बनाई गयी राघवन के नेतृत्व वाली जांच समिति ने समिति के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए एक आदेश जारी किया है। ऐसे में मोदी के प्रति संघ का रूख क्या होगा?

उत्तर : – इस देश में कांग्रेस शासन काल में कई दंगे हुए। बिहार में भागलपुर का दंगा हुआ, जम्मू-कश्मीर में पंडितों को तो खदेर ही दिया गया। श्रीमती गांधी की हत्या के बाद देशभर में एक संप्रदाय विशेष के लोगों की चुन-चुन कर हत्या की गयी। सिख विरोधी दंगे पर अपनी प्रतिक्रिया में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कहा था कि जब कोई बडा पेड गिरता है तो अगल बगल के छोटे वृक्ष उसमें दब जाते हैं। इस घटना को इसी रूप में देखा जाना चाहिए। एक दो नहीं ऐसे कई उदाहरण है जिसे गिनाया जा सकता है। सिखों के खिलाफ भडके दंगे पर अभी तक सात जांच आयोगों का गठन किया जा चुका है लेकिन सजा किसी को नहीं हुई। गोधरा कांड के बाद गुजरात के अंदर दंगा भडका जिससे दोनों सम्प्रदायों के लोगों को परेशानी हुई। ऐसे में एक व्यक्ति को आरोपित करना किसी कीमत पर सही नहीं है। सन 2002 के दंगे में मारे गये लोगों के परिजनों के प्रति हमारी संवेदना है लेकिन उस दंगा को जितना जल्दी सम्हाल लिया गया ऐसा उदाहरण बहुत कम मिलता है। उत्तर प्रदेश का बरेला जिला विगत 15 दिनों से जल रहा है लेकिन वहां की सुधि लेने वाला न तो कोई सेकुलर नेता है और न ही कोई सामाचार माध्यम, तो फिर नरेन्द्र भाई को ही दोष देना राजनीति नहीं तो और क्या है?

प्रश्‍न : – हिमालय पर आपका ज्यादा ध्यान रहता है, क्या लगता है चीन के सामने भारत की तैयारी संतोषजनक है?

उत्तर : – भारत की तैयारी तो फिसिड्डी है। पाकिस्तान और चीन दोनों भारत के खिलाफ मोर्चेबंदी कर रहा है और भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के भरोसे है। हमारी तैयारी बिल्कुल नगण्य है। जगजाहिर है कि चीन आने वाले समय में हमारे खिलाफ एक बार लडाई का मोर्चा खोलेगा जिसकी तैयारी हमारे पास में नहीं के बाराबर है। ऐसे में सरकार को सतर्क होना चाहिए। नेपाल में जिस प्रकार चीनी हस्तक्षेप बढ रहा है उसमें नेपाल पर भी भारत की नीति स्पष्ट होनी चाहिए। अरूणंचल तथा जम्मु कश्मीन में चीन कूटनीतिक हस्तक्षेप कर रहा है भारत को भी अपनी कूटनीतिक चाल चलनी चाहिए। देखिए हमारा संगठन न केवल समस्या गिनाता है हमने उसके लिए काम भी किया है। सीमा पर गैर कानूनी काम को राकने के लिए सीमा जागरण मंच का गठन किया गया है। हिमालय परिवार के माध्यम से हिमालय की सभ्यता को बचाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। हम प्रत्येक वर्ष ऐसे कई कार्यक्रम करते हैं जिससे देश की एकता और अखंडता को बल मिलता है। आज देश के नीति नियंता समाजवाद और धर्मनिर्पेक्षता पर तो ध्यान दे रहे हैं लेकिन उनके सामने राष्ट्रवाद गौन हो गया है, जो देश हित में नहीं है। हमारे पास अपने दुश्मनों से निपटने के लिए भगवान ने छ अवसर दिये लेकिन हमने उसे गवा दिया। उन अवसरों का उपयोग किया होता तो आज हम असुरक्षित नहीं होते।

प्रश्न : – संघ पर लगातार साम्प्रदायिक और आक्रामक होने का आरोप लगता है। इसपर आपका क्या कहना है?

उत्तर : – पूज्य महात्मा गांधी जी को अहिंसा और सत्याग्रह का प्रणेता माना जाता है, लेकिन दुनिया में मात्र एक व्यक्ति हुआ जिसने सत्याग्रह को अहिंसात्मक तरीके से लडा, उसका नाम है पूज्य माधव राव सदाशिव गोलवलकर। जब संघ पर पहली बार प्रतिबंध लगा तो उन्होंने सत्याग्रह का आह्वान किया। इस आन्दोलन में गाली जैसे हिंसा का भी कहीं उल्लेख नहीं है लेकिन जिस पूज्य बापू को इसके प्रणेता के रूप में माना जाता है उन्होंने आजादी की लडाई के दौरान कई बार सत्याग्रह का आह्वान किया और फिर उसे वापस ले लिया। उनका सत्याग्रह कभी सफल नहीं हुआ लेकिन पूज्य गोलवलकर का सत्याग्रह सफल रहा। ऐसे में संघ को आप कैसे आक्रामक कह सकते हैं। जहां तक साम्प्रदायिकता का सवाल है तो उसमें भी संघ को बदनाम ही किया जाता है तथ्य कुछ भी नहीं है। बदनाम करने के लिए संघ को विभिन्न चरमपंथी संगठनों के साथ जोडा जाता है लेकिन संघ चरमपंथ में विश्वास नहीं करता है। हमारा मानना है कि हर समस्या का समाधान संवाद से संभव है। हम लोकतंत्र में विश्वास करने वाले संगठनों में से हैं। जब दुर्भिक्ष आता है तो हमारे कार्यकर्ता यह नहीं देखते कि कौन हिन्दु है या कौन मुस्लमान है। ईसाई मिसनरियों को तो अपने मीशन का स्वार्थ भी होता है लेकिन हमारे कार्यकर्ता निःस्वार्थ भाव से सेवा का काम करते हैं जिसका उदाहरण भरा पडा हुआ है।

प्रश्न : – आगे की क्या कार्ययोजना है?

उत्तर : – संघ ने बहुत काम सौंप रखा है, देश की सेवा करते करते जीवन का निर्वाह करना यही एक मात्र ध्‍येय है।

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