सड़क निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली हिमाचल में

प्रो. धूमल ने ढाई वर्ष के अपने कार्यकाल में राज्य की उपलब्धियों में विभिन्न क्षेत्रों में मील के पत्थर स्थापित किए हैं। इस दौरान सभी क्षेत्रों में संतुलित व तेजी से विकास हुआ है। हिमाचल प्रदेश में, खासतौर से राज्यी के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें एक तरह से जीवनरेखा और आवाजाही का मुख्या साधन हैं। इसके 55,673 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से 36,700 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बसा हुआ है और 16,807 बसे हुए गांव असंख्यर पहाडि़यों के ढलानों और घाटियों में बिखरे हुए हैं। उत्पाषदन क्षेत्रों और बाजार केंद्रों को जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण के महत्वा को समझते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने अगले तीन वर्षों में हर पंचायत को सड़क से जोड़ने का फैसला किया है।

जब यह राज्य 1948 में अस्तित्व में आया, तो यहां केवल 288 कि.मी. लंबी सड़कें थीं जो अब बढ़कर 36,264 कि.मी. हो गई हैं। हिमाचल प्रदेश में 31973 किलोमीटर सड़क ढांचा विद्यमान है। सड़कें बिछाने का काम इतने बड़े पैमाने पर चल रहा है कि 2015 तक इस पहाड़ी इलाके का सुदूरवर्ती गांव भी हरेक पंचायत से जुड़ जाएगा.

हिमाचल प्लास्टिक कचरे से पक्की की गई सड़क का निर्माण भी किया गया है। राज्य के प्रत्येक लोक निर्माण वृत्त को ‘मिक्सिंग शैडर’ प्रदान किया जाएगा ताकि सड़क पक्का करने के कार्य में प्लास्टिक कचरे का समुचित प्रयोग किया जा सके। पर्यावरण के संरक्षण में भी इस तरह की कार्यप्रणाली सहायक सिद्ध होगी। हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत का ऐसा पहला राज्य है, जो प्लास्टिक व उससे मिलते-जुलते कचरे से सड़कों को पक्का कर रहा है। इस विधि से प्रति किलोमीटर लगभग दो लाख रुपये की बचत होगी।

चच्योट विधानसभा क्षेत्र में 54 सड़क परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं, जिन पर 103.35 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जिससे दुर्गम क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ किया जा सके। पिछले 30 माह के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र में 143 कि.मी. नये मार्गों का निर्माण किया गया है। इससे पूर्व, उन्होंने 542 लाख रुपये की लागत से निर्मित 9 कि.मी. लंबे कुलथानी-कल्हणी मार्ग का लोकार्पण किया तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

हिमाचल में सड़क सुविधा से वंचित गांवों एवं बस्तियों को वाहन योग्य मार्ग से जोड़ने को प्राथमिकता दी जा रही है। चैलचौक-जंजैहली मार्ग के सुधार एवं चौड़ा करने के लिए 23 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक आसानी से घाटी तक पहुंच सकें। 81.5 कि.मी. मार्ग को पक्का किया गया है और 74 कि.मी. मार्गों में ‘क्रॉस ड्रेनेज’ का कार्य पूरा कर दिया गया है। इस प्रकार क्षेत्र में अधोसंरचना विकास का नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने हिमाचल के समस्याग्रस्त क्षेत्रों में मजबूत सड़कें बनाने की तकनीक विकसित करने का आह्वान करते हुए हर संभव मदद देने का वादा दिया है। वर्ष 2011-12 में सड़क व सेतु निर्माण के लिए 10 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। पिछले चार वर्षों में 13165 गांवों को जोड़ने व 12443 अम्बेडकर ग्रामों में 16605 किमी सड़क निर्माण में भी उन्हीं का पूरा योगदान रहा है।

सच मे अगर देखा जाए तो हिमाचल की प्रगति मे प्रेम कुमार धूमल जी का योगदान सरहानीय है। अगर हर राज्य को ऐसे ही मुख्यमंत्री मिल जाए तो वो दिन दूर नही जब भारत दुनिया के विकसित देशों मे शुमार हो जाएगा।

1 COMMENT

  1. १) पहले मु. मन्त्री धूमल जी की, और इस सडक निर्माण योजना की प्रशंसा करता हूँ। बहुत बहुत धन्यवाद।
    एक माह पहले ही, मैं “हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय” और “पंचनद शोध संस्थान” के निमंत्रण पर, एक संगोष्टी के लिए, सोलन (हि. प्र.) होकर आया।
    अनुभव और अन्य परदेशी यात्रियों से वार्तालाप के आधार पर निम्न सुझाव दे रहा हूं।
    मैं पराया नहीं हूं। अपनत्व से, इन सुझावों पर विचार और उचित कार्यान्वयन किया जाए।
    (२) परदेशी यात्री “बिलकुल स्वच्छ शौचालय” की आदत वाले होते हैं। तो सुझाव: ==>इन सडकों के किनारे कुछ १५-१५ किलोमिटर अंतर पर ऐसे पर्याप्त शौचालयों का निर्माण होना चाहिए। वे हमारे कुप्रबंधित जल-हीन, या न्य़ून-जल, शौचालयों की व्यवस्था के कारण दूबारा यात्रा करने में हिचकिचाते हैं। फिर अन्य यात्रियों को सलाह भी वैसे ही देते होंगे। हमारा ही घाटा होगा।
    (३) वे निश्चित ही हमारी संस्कृति से प्रभावित होते हैं। हिमाचल के प्राकृतिक सौंदर्य से भी। और हमारे आम नागरिक के आतिथ्य एवं स्वागत से भी।
    (४) सडकों का शीघ्रातिशीघ्र निर्माण –और (५) परदेशों में “विज्ञापन” (६) छोटी रेल की पटरी के किनारे बहुत कूडा देखा। सुन्दर हि. प्र. की शोभा में यह बडा विघ्न है। क्या साफ किया जा सकता है? (७) साथ में चुने हुए, पर्यटन यात्रा मार्ग पर काम किया जाए। उसीको पहले विकसित किया जाए। चीन से निम्न पाठ सीख ले।
    चुने हुए रूट पर विकास कर उसे प्रमोट करे, तब तक दूसरा रूट विकसित करें।
    चीनका उदाहरण: (मेरी जानकारी पर)
    चीन नें केवल गिने चुने रास्ते, और पर्यटन स्थलों पर (फिर वे भले बुद्ध मन्दिर क्यों न हो) लक्ष केन्द्रित कर उतने ही रास्ते सुधारे हैं।केवल वही स्थान चीन दुनिया को दिखा रहा है, जो प्रबंधित हैं। और आज उसने बडा पर्यटन उद्योग खडा किया है।
    [३ वर्ष पहले मुझे १८ दिन, चीन यात्रा पर गया था, अनुभव लिख रहा हूं] एक हिस्सा ही हम चुने और सुधारे, तब तक दूसरे हिस्से बन जाएंगे।
    चीनसे हम यह तो सीख ले सकते हैं।
    इस पर, कार्यान्वयन पर्यटन उद्योग कइ गुना बढा देगा।

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