लेखक परिचय

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

प्रोफेसर जैन ने भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक, रोमानिया के बुकारेस्त विश्वविद्यालय के हिन्दी के विजिटिंग प्रोफेसर तथा जबलपुर के विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी एवं भाषा विज्ञान विभाग के लैक्चरर, रीडर, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष तथा कला संकाय के डीन के पदों पर सन् 1964 से 2001 तक कार्य किया तथा हिन्दी के अध्ययन, अध्यापन एवं अनुसंधान तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार-विकास के क्षेत्रों में भारत एवं विश्व स्तर पर कार्य किया।

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 languageप्रोफेसर महावीर सरन जैन

 

भारत में भाषाओं, प्रजातियों, धर्मों, सांस्कृतिक परम्पराओं एवं भौगोलिक स्थितियों का असाधारण एवं अद्वितीय वैविध्य विद्यमान है। विश्व के इस सातवें विशालतम देश को पर्वत तथा समुद्र शेष एशिया से अलग करते हैं जिससे इसकी अपनी अलग पहचान है, अविरल एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, राष्ट्र की अखंडित मानसिकता है। अनेकता में एकता तथा एकता में अनेकता की विशिष्टता के कारण भारत को विश्व में अद्वितीय सांस्कृतिक लोक माना जाता है।

भाषिक दृष्टि से भारत बहुभाषी देश है। यहाँ मातृभाषाओं की संख्या 1500 से अधिक है (दे0 जनगणना 1991, रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इण्डिया) । इस अध्याय में इसी जनगणना के आधार पर भाषाओं के बोलने वालों के आँकड़े प्रस्तुत किए जायेंगे। इस जनगणना के अनुसार दस हजार से अधिक लोगो द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं की संख्या 114 है। (जम्मू और कश्मीर की जनगणना न हो पाने के कारण इस रिपोर्ट में लद्दाखी का नाम नहीं है। इसी प्रकार इस जनगणना में मैथिली को हिन्दी के अन्तर्गत स्थान मिला है। अब मैथिली भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची की एक परिगणित भाषा है।) लद्दाखी एवं मैथिली को सम्मिलित करने पर दस हजार से अधिक लोगो द्वारा  बोली जाने वाली भाषाओं की संख्या 116 हो जाती है।

    यूरोप एवं एशिया महाद्वीप के भाषा-परिवारों में से दक्षिण एशियामें मुख्यतः चार भाषा-परिवारों की भाषायें बोली जाती हैं। भारत में भी सामी भाषा परिवार की अरबीके अपवाद के अलावा इन्हीं चार भाषा परिवारों की भाषायें बोली जाती हैं। ये चार भाषा परिवार हैं:

  भारोपीय परिवार: (भारत में भारत-ईरानी उपपरिवार की आर्य भाषाएँ तथा दरद शाखा की कश्मीरी बोली जाती हैं। कश्मीरी को अब भाषा वैज्ञानिक भारतीय आर्य भाषाओं के अन्तर्गत ही मानते हैं। भारत की जनसंख्या के 75. 28 प्रतिशत व्यक्ति इस परिवार की भाषाओं के प्रयोक्ता हैं। जर्मेनिकउपपरिवार की अंग्रेजी के मातृभाषी भी भारत में निवास करते हैं जिनकी संख्या 178,598 है।)

     द्रविड़ परिवार: (भारत की जनसंख्या के 22. 53 प्रतिशत व्यक्ति इस परिवार की भाषाओं के प्रयोक्ता हैं)

     आग्नेय परिवार (आस्ट्रिक अथवा आस्ट्रो-एशियाटिक): (इस परिवार की भाषाओं के प्रयोक्ता 1. 13 प्रतिशत है।

     सिनो-तिब्बती परिवार: (इस परिवार की स्यामी/थाई/ताई उपपरिवार की अरुणाचल प्रदेश में बोली जाने वाली भाषा खम्प्टी को छोड़कर भारत में तिब्बत-बर्मी उपपरिवार की भाषाएँ बोली जाती हैं। इस परिवार की भाषाओं के प्रयोक्ता 0. 97 प्रतिशत हैं अर्थात भारत की जनसंख्या के एक प्रतिशत से भी कम व्यक्ति इस परिवार की भाषाओं के प्रयोक्ता हैं)

जिन 116 भाषाओं की ओर पूर्व में संकेत किया गया है, उनमें से आठ  भाषाओं (08) के बोलने वाले भारत के विभिन्न राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में निवास करते हैं तथा जिनका भारत में अपना भाषा-क्षेत्र नहीं है।

1.संस्कृतः संस्कृत प्राचीन भारतीय आर्य भाषा काल की भाषा है। विभिन्न राज्यों के कुछ व्यक्ति एवं परिवार अभी भी संस्कृत का व्यवहार मातृभाषा के रूप में करते हैं।

2. अरबी एवं 3. अंग्रेजीः मुगलों के शासनकाल के कारण अरबी तथा अंग्रेजों के शासन काल के कारण अंग्रेजी के बोलने वाले भारत के विभिन्न भागों में निवास करते हैं। भारत में सामी/सेमेटिक परिवार की अरबी के बोलने वालों की भारत कुल जनसंख्या 21,975 है। भारत के सात राज्यों में इस भाषा के बोलने वालों की संख्या एक हजार से अधिक हैः  (1)बिहार (2) कर्नाटक (3) मध्यप्रदेश (4) महाराष्ट्र (5) तमिलनाडु (6) उत्तरप्रदेश (7) पश्चिम बंगाल । भारत-यूरोपीय परिवार की जर्मेनिक उपपरिवार की अंग्रेजी को मातृ-भाषा के रूप में बोलने वालों की भारत में कुल जनसंख्या 178,598 है। तमिलनाडु, कर्नाटक एवं पश्चिम बंगाल में इसके बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है। यह संख्या तमिलनाडु में 22,724, कर्नाटक में 15,675 एवं पश्चिम बंगाल में 15,394 है।

4. सिन्धी एवं 5.लहँदाः इनके भाषा-क्षेत्र पाकिस्तान में हैं। सन् 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान से आकर इन भाषाओं के बोलने वाले भारत के विभिन्न भागों में बस गए। 1991 की जनगणना के अनुसार भारत में लहँदा बोलने वालों की संख्या 27,386 है। इस भाषा के बोलने वाले आन्ध्र प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि में रहते हैं तथा अपनी पहचान मुल्तानी-भाषी के रूप में अधिक करते हैं। सिन्धी संविधान की परिगणित भाषाओं के अंतर्गत आती है। इस भाषा के बोलने वालों की संख्या 2,122,848 है। इस भाषा के बोलने वाले गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान राज्यों में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में निवास करते हैं। ये भारत के 31 राज्यों / केन्द्रशासित प्रदेशों में निवास करते हैं। लहँदा एवं सिन्धी दोनो भाषाओं के बोलने वालों में द्विभाषिता / त्रिभाषिता / बहुभाषिता का प्रसार हो रहा है। जो जहाँ बसा है, वहाँ की भाषा से इनके भाषा रूप में परिवर्तन हो रहा है।

6. नेपालीः इसका भी भारत में कोई भाषाक्षेत्र नहीं है। यह भी परिगणित भाषाओं के अंतर्गत समाहित है। नेपाली भाषी भी भारत के अनेक राज्यों में बसे हुए हैं।। भारत में इनके बोलने वालों की संख्या 2,076,645 है। पश्चिम बंगाल, असम एवं सिक्किम में इनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। पश्चिम बंगाल में 860,403, असम में 432,519 तथा सिक्किम में 256,418 नेपाली-भाषी निवास करते हैं। इनके अतिरिक्त पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर एवं मेघालय राज्यों में तथा उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश में इनकी संख्या एक लाख से तो कम है मगर 45 हजार से अधिक है।

7. तिब्बतीः  तिब्बती लोग भारत के 26 राज्यों में रह रहे हैं। इनकी मातृ भाषा तिब्बती है जिनकी संख्या 69,416 है। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।

8. उर्दू जम्मू एवं कश्मीर की राजभाषा है तथा आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार कर्नाटक आदि राज्यों की दूसरी प्रमुख भाषा है। भारतीय संविधान में उर्दू को हिन्दी से भिन्न परिगणित भाषा माना गया है।  इसके बोलने वाले भारत के आन्ध्र प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र,  पश्चिम बंगाल, दिल्ली तथा तमिलनाडु में निवास करते हैं तथा भारत मे इनकी  संख्या 43,406,932 है।

भाषिक दृष्टि से हिन्दी एवं उर्दू भिन्न भाषाएँ नहीं हैं तथा इस सम्बंध में आगे विचार किया जाएगा।

भाषाओं का विवरणः आधार

  विवरण निम्न आधारों पर प्रस्तुत किया जाएगा –

(1) भाषा किस भाषा परिवार की भाषा है।

(2) भाषा परिगणित है अथवा अपरिगणित :

 भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में परिगणित भाषाओं की संख्या अब 22 है। प्राचीन भारतीय आर्य भाषा काल की संस्कृत के अलावा  निम्नलिखित 21 आधुनिक भारतीय भाषाएँ परिगणित  हैं:-

1.असमिया 2. बंगला 3. बोडो 4. डोगरी 5. गुजराती 6. हिन्दी 7. काश्मीरी 8. कन्नड़ 9.कोंकणी 10. मैथिली 11. मलयालम 12. मणिपुरी 13. मराठी 14. नेपाली 15. ओडि़या 16. पंजाबी 17. तमिल 18. तेलुगु 19. संथाली 20. सिन्धी 21. उर्दू

इन 22 परिगणित भाषाओं में से पन्द्रह भाषाएँ भारतीय आर्य भाषा उप परिवार  की, चार भाषाएँ द्रविड़ परिवार की, एक भाषा (संथाली) आग्नेय परिवार की मुंडा उपपरिवार की तथा दो भाषाएँ (बोडो एवं मणिपुरी)  तिब्बत-बर्मी उप परिवार की हैं। 1991 की जनगणना के प्रकाशन के समय (सन् 1997) में परिगणित भाषाओं की संख्या 18 हो गई थी। 1991 के बाद कोंकणी, मणिपुरी एवं नेपाली परिगणित भाषाओं में जुड़ गई थी। इस जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 838,583,988 थी। कुल जनसंख्या में से 96. 29 प्रतिशत लोग अर्थात् 807,441,612 व्यक्ति उन 18 परिगणित भाषाओं में से किसी एक भाषा को बोलने वाले थे।

(3) भाषा के प्रयोक्ताओं की संख्या

(4) उन राज्यों/ केन्द्र प्रशासित प्रदेशों के नाम जहाँ भाषा सबसे अधिक बोली जाती है।

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8 Comments on "भारत की भाषाओं के अध्ययन की रूपरेखा एवं भाषाओं के विवरण के आधार"

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Bishnu prasad Gautam
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माताको दूध शिशुलाई शिक्षा मातृभाषामा, प्रभाव पर्छ सृस्‍टिलाई प्रकाशको गतिमा।…. यी माथिका हरफ मेघालय शिलोंगका नेपालीभाषी पुस्तक ब्यबसायी श्री बिष्णु गौतमले २३ मार्च २००५ देखि जोड तोडका साथ प्रचार प्रसार गर्दै आएका छन् । उनले प्रकाशन गरेका पुस्तक, बिजक, लेटर प्याड, पुस्तक सुची जताततै यी हरफ देख्न पाइन्छ । नेपाली, अंग्रेजी, खासी र बंगाली भाषामा लेखिएका यी हरफले मातृभाषाको शक्तिले सृष्टिको रक्षा र यस सुन्दर बहुरंगी विश्व-बाटिकालाइ द्रुत गतिमा सुमुन्नत बनाउन टेवा मिल्ने संदेश दिन्छ ।. जन्मेपछि सम्बाद गर्न सिकेको पहिलो भाषा नै मानिसको मातृभाषा हो । संसारमा ज्ञान, सोच र कल्पनाको बहुरंगी विविधता कायम राख्न पनि मातृभाषालाइ बचाईराख्न र… Read more »
प्रोफेसर महावीर सरन जैन
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महावीर सरन जैन

निम्न लेख पढ़ने की कृपा करें —
http://www.scribd.com/doc/105906549/Hindi-Divas-Ke-Avasar-Par?goback=.gde_2467140_member_248178395

प्रोफेसर महावीर सरन जैन
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महावीर सरन जैन

पहले यह समझ लें कि हिन्दी का मतलब क्या है। हिन्दी के कुछ तथाकथित विद्वान एवं आलोचक केवल खड़ी बोली को हिन्दी मानने की भूल करते हैं। मैंने भाषाविज्ञान के भाषा-भूगोल एवं बोली-विज्ञान के आलोक में हिन्दी भाषा-क्षेत्र की विवेचना की है। लिंक हैः
http://www.scribd.com/doc/105906549/Hindi-Divas-Ke-Avasar-Par?goback=.gde_2467140_member_२४८१७८३९५

Ajayraturi1997@gmail.com
Guest
3.इसकी वर्णमाला मेँ केवल 30 वर्ण हैँ पर फिर भी यह देवनागरी की 59 ध्वनियोँ को आसानी से लिख सकती है। इसका कारण यह है कि यह एक वैग्यानिक लिपि है। 4.जिन भाषाओँ की लिपि देवनागरी हो और वह हिन्दी के आस पास की भाषा हो तो उनके लिए खतरा बन जाता है। वह हिन्दी की उपभाषा मानी जाने लगतीँ हैँ इसलिए उनकी अलग लिपि होने से उनको एक विभिन्नता मालती है। इसी कारण गुजराती ने अपनी लिपि देवनागरी तो रखी पर साथ ही उसे अलग बनाने के लिए बीच मेँ अपने कुछ वर्ण भी डाले।गुजराती पूरी देवनागरी लिपि मेँ… Read more »
Ajayraturi1997@gmail.com
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3.इसकी वर्णमाला मेँ केवल 30 वर्ण हैँ पर फिर भी यह देवनागरी की 59 ध्वनियोँ को आसानी से लिख सकती है। इसका कारण यह है कि यह एक वैग्यानिक लिपि है। 4.जिन भाषाओँ की लिपि देवनागरी हो और वह हिन्दी के आस पास की भाषा हो तो उनके लिए खतरा बन जाता है। वह हिन्दी की उपभाषा मानी जाने लगतीँ हैँ इसलिए उनकी अलग लिपि होने से उनको एक विभिन्नता मालती है। इसी कारण गुजराती ने अपनी लिपि देवनागरी तो रखी पर साथ ही उसे अलग बनाने के लिए बीच मेँ अपने कुछ वर्ण भी डाले।गुजराती पूरी देवनागरी लिपि मेँ… Read more »
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