बस्तर की सड़कें

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आशा शुक्ला किसी भी देश की प्रगति का दारोमदार उसकी आधारभूत संरचनाओं पर निर्भर करता है। यदि मूलभूत आवश्‍यक तत्वों में कोई खामी हो तो उसे आर्थिक प्रगति के पथ पर निर्बाध रूप से आगे बढ़ने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हमारे देश में भी सड़क इस महत्वपूर्ण नीति… Read more »

बस्तर के ग्रीन कमांडो

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 सुजाता राघवन  वीरेंद्र की इस यात्रा का लक्ष्य बारिश के पानी को बर्बादी से बचाना था। 1997 में इसकी शुरूआत करते समय उनके मन में पारंपरिक जल स्त्रोतों, कुओं, तालाबों और छोटे-छोटे झरनों में कम होती जलधारा अधिक हावी थी। छत्तीसगढ़ में धान की खेती सबसे ज्यादा होती है। इसीलिए इसे ‘चावल का कटोरा’ भी… Read more »

[पुस्‍तक समीक्षा:’हेलो बस्तर’] आदिवासियों का सवाल तो रह गया

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सुदीप ठाकुर  बस्‍तर और माओवादी आंदोलन पर केन्द्रित राहुल पंडिता की पुस्तक ‘हेलो बस्तर’ की समीक्षा लिखकर राजीव रंजन प्रसाद ने  इसे हकीकत से दूर बताया। इस विमर्श को आगे बढ़ाने को लेकर हम यहां 24 जुलाई 2011 को अमर उजाला में प्रकाशित सुदीप ठाकुर द्वारा लिखित इस पुस्‍तक की समीक्षा प्रकाशित कर रहे हैं। (सं.)   पिछली… Read more »

सत्‍य का गला घोट दिया है राहुल पंडिता ने

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हाल ही में बस्‍तर के आदिवासियों की समस्‍याओं और यहां चल रहे माओवादी आंदोलन पर राहुल पंडिता की पुस्‍तक ‘हेलो बस्‍तर’ प्रकाशित हुई है। राजीव रंजन प्रसाद ने इसकी समीक्षा लिखी और यह सर्वप्रथम प्रवक्‍ता डॉट कॉम पर प्रकाशित हुई। इस समीक्षा पर 10 टिप्‍पणियां आईं। सारगर्भित। एक टिप्‍पणीकार को छोड़कर शेष सभी ने राजीव… Read more »