लेखक परिचय

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

डॉ. कुलदीप चन्‍द अग्निहोत्री

यायावर प्रकृति के डॉ. अग्निहोत्री अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। उनकी लगभग 15 पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पेशे से शिक्षक, कर्म से समाजसेवी और उपक्रम से पत्रकार अग्निहोत्रीजी हिमाचल प्रदेश विश्‍वविद्यालय में निदेशक भी रहे। आपातकाल में जेल में रहे। भारत-तिब्‍बत सहयोग मंच के राष्‍ट्रीय संयोजक के नाते तिब्‍बत समस्‍या का गंभीर अध्‍ययन। कुछ समय तक हिंदी दैनिक जनसत्‍ता से भी जुडे रहे। संप्रति देश की प्रसिद्ध संवाद समिति हिंदुस्‍थान समाचार से जुडे हुए हैं।

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jinnahजिन्ना को लेकर भारत में एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल जब तक भारत और पाकिस्तान के बीच कृत्रिम विभाजन विद्यमान रहेगा तक तक जिन्ना पर भी चर्चा होती रहेगी। परन्तु दुर्भाग्य से पूरा विवाद इस बात पर सिमट जाता है कि विभाजन के लिए जिम्मेदार कौन था। आम तौर पर इसके लिए जिन्ना को ही दोषी ठहराया जाता है। इस दोष को ढूंढने के लिये या इस दोष को मिटाने के लिए विद्वान लोग अजायबघरों में जाकर पुरानी फाईले उलटते-पुलटते रहते हैं और फिर जैसी उनकी मंशा होती है वैसी सामग्री उन्हें वहाँ से मिल भी जाती है। अजायबघर दरअसल सब प्रकार की सामग्री का खजाना होता है। उसमें जब कोई विद्वान घुसता है तो आम तौर पर उसके मन में कोई न कोई परिकल्पना पहले से ही बनी होती है। उस परिकल्पना को पुष्ट करने के लिए जो प्रमाण उसको मिलते हैं वह उन्हें प्रसन्नता से ग्रहण कर लेता है और जो उसके विपरीत होते हैं उनको वह उतनी ही प्रसन्नता से वहीं छिपा देता है। इसलिए जब कोई विद्वान अजायबघर से बाहर निकलता है तो उसको जिस प्रकार का जिन्ना चाहिए होता है वह उसी प्रकार का लेकर प्रसन्नता से अपनी विजय की घोषणा करता है। इसलिए अकादमिक जगत में अनेक प्रकार के जिन्ना मौजूद मिल जायेंगे। परन्तु साधारण जनता किसी का आकलन करते समय अजायबघरों की दीमक लगी फाईलों पर निर्भर नहीं करती। क्योंकि उसने प्रत्येक युग के यथार्थ को स्वयं भोगा होता है। इसलिए वह अपनी राय के लिए फाईलों में सड रहे दस्तावेजों या फिर पाकिस्तान निर्माण के दिन पर दिये गये जिन्ना के तथाकथित पंथनिरपेक्ष भाषणों का सहारा नहीं लेती बल्कि अपने प्रत्यक्ष अनुभवों और भोगे गये यथार्थ के आधार पर अपनी राय बनाती है। आम जनता की राय में जिन्ना पाकिस्तान विभाजन के दोषी थे और आम जनता को यह भी पता था कि जब पाकिस्तान बन जायेगा तो हिन्दुओं और सिखों का वहाँ रहना मुश्किल हो जायेगा। नेहरू शायद इस बात को नहीं जानते थे। इस बात का शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि पाकिस्तान बनने के बाद उस क्षेत्र से लाखों हिन्दू सिख भाग कर इस क्षेत्र में आयेंगे और इस प्रयास में लाखों मारे भी जायेंगे। इसका कारण शायद नेहरू का पूरे आंदोलन के दौरान जमीनी सचाईयों से कटे होना भी था।

 

जिन्ना को जिन विशेषणों से अब नवाजा जा रहा है वह उनके व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं थे। वे दरअसल पश्चिमी शिक्षा नीति से उत्पन्न हुए एक ऐसे व्यक्ति थे जो भारत की स्वतंत्रता को भी अंग्रेजी नजरिये से ही देखते थे। उनका भारत की संस्कृति या फिर यदि उनके तथाकथित मजहब का ही आधार लिया जाये तो इस्लाम की संस्कृति में भी कोई विश्वास नहीं था। वे दरअसल पश्चिम की अंग्रेजी संस्कृति के उपासक थे। एक प्रकार से पंडित जवाहर लाल नेहरू की भी यही स्थिति थी। वे भी पश्चिमी शिक्षा पद्वति से बने एक ऐसे अंग्रेज थे जो जीवन के अंत तक भारत को खोजने की कोशिश करते रहे। उनका भी भारतीय संस्कृति में कोई विश्वास नही था बल्कि वे पश्चिमी समाज के तथाकथित मूल्यों के उपासक थे। इसलिए नेहरू को हिन्दू जिन्ना कहा जा सकता है और जिन्ना तो मुस्लिम जिन्ना थे ही, यह अलग बात है कि नेहरू का हिन्दुत्व में विश्वास नहीं था और जिन्ना का इस्लाम पर भरोसा नहीं था।

शायद इसलिए दोनों ने महात्मा गांधी को अस्वीकार कर दिया था क्योंकि वे हिन्दू मूल्यों या भारतीय मूल्यों की बात करते रहते थे। परन्तु नेहरू को इस बात का श्रेय देना होगा कि उन्होंने हिन्दू परिवार में जन्म लेने के बावजूद अपने हिन्दू होने का राजनैतिक लाभ उठाने का प्रयास नहीं किया। उनका हिन्दुत्व में विश्वास नहीं था इसलिए उन्होंने उसका राजनैतिक फायदा लेने की बेईमानी भी नहीं की। परन्तु जिन्ना इसके बिल्कुल विपरीत थे। उनका इस्लाम में विश्वास तो नहीं था परन्तु उन्होंने अपने मुसलमान होने का राजनैतिक लाभ उठाया। भारत को विभाजित करने की योजना तो अंग्रेजों की थी।

(पता नहीं क्यों जसवंत सिंह को अजायबघर की फाईलें तलाशते समय यह प्रमाण क्यों नहीं मिले। बेहतर होता वे अपने मित्र नरेन्दा्र सिंह सरीला की 2005 में भारत विभाजन पर छपी पुस्तक देख लेते। ) जिन्ना जानबूझ कर अंग्रेजों के हाथों में हथियार बन गये इसमें अंग्रेजों को भारत विभाजन का अपना सपना पूरा करना था और जिन्ना को अपनी महत्वकांक्षा। कांग्रेस ने इस अन्तिम समय में आगे लडने से इंकार कर दिया और अंग्रेजों की योजना के रास्ते से अन्तिम बाधा भी समाप्त हो गई।

अब प्रश्न यह है कि जिस जिन्ना के बारे में आम राय यह है कि वह अंग्रेजों के पिट्ठू थे, अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार थे और मुख्य तौर पर भारत विभाजन के लिए जिम्मेदार थे उन्हें किस उद्देश्य से भारत में सर्वगुणों से महिमा मंडित करने का प्रयास किया जा रहा है ? कांग्रेस की बात तो समझ में आती है। कांग्रेस को लगता है कि यदि जिन्ना ही भारत विभाजन के दोष से मुक्त कर दिये जाते हैं तो फिर नेहरू का दोष तो उससे बहुत कम था। जिन्ना की मुक्ति के बाद वे तो अपने आप ही विभाजन के दोष से बरी हो जायेंगे। इसलिए कुछ साल पहले एशियानन्द की जिन्ना पर लिखी हुई किताब देखी जा सकती है। भारत विभाजन के दोष से नेहरू को मुक्त करने के लिए जिन्ना को मुक्त करना जरूरी है। जब यह दोनों मुक्त हो जायेंगे तो जाहिर है कि किसी तीसरे से पात्र की तलाश होगी। मुस्लिम लीग और जिन्ना तो पहले ही छूट चुके होंगे। वैसे भी साम्यवादी टोला तो 1947 से पहले भी मुस्लिम लीग को साम्प्रदायिक नहीं मानता था। हो सकता है ऐसी स्थिति में विभाजन का दोष भारत के हिन्दुओं पर ही मढने का प्रयास किया जाये। जसवंत सिंह की जिन्ना पर लिखी गई किताब को इस दृष्टि से भी जांचना परखना चाहिए।

– डॉ0 कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

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16 Comments on "जिन्ना को लेकर उठा विवाद"

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शाहिद रहीम
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Dear Sanjay Jee
I Thought, there is no scarcity regardibng political issue in Our Indian News World. But Yiou have continued the JINNAH on Your WEB Cover.Please change it towards new issue over the pakistan characterstics against India, preserved duering last 62 Years.
This is an advice to reform your News presentation pursuit on this Web, from a big brotgher have been devoted to develope Indian Nationalism over the Glob.
Thanks and regards
Shahid Raheem ORF

satish mudgal
Guest

Many many thank to Mr. Shaheed Raheem for giving this secret mission behind the book and his request to stop the discussion on the book because the continuous discussion will serve as the desired by so called heir of Mr. Jinnah.
scmudgal

शाहिद रहीम
Guest
Please Stop to discuss Jinnah It is enough, that we indian have leanly discussed about Jinnah.It should be clear to our new generation that Jinnah could not be relevent for we Indians. Jinnah was a splitter.Mr. Jaswant Singh declared that Many of the Senior Indian leader like RAJ GOPALACHARI has underlined him as Bridge leader between Hindu and Muslim. But it was an incident, before the conceptualisation of Pakistan. Pakistan first conceptualised by Great Urdu Poet Dr. Allama Equbal, the creater of SARE JAHAN SE ACHCHHA HINDUSTAN HAMARA. it is on the Record that PAKISTAN proposal has been prepared on… Read more »
उमेश
Guest

भारत मे कांग्रेस पार्टीका अस्तित्वका आधार हीं भारत-पाक विभाजन एवम हिन्दु-मुस्लीम घृणा है । जबकि भाजपाई हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की पुनः एकता के सपने देखने वाले लोग है । लेकिन पश्चिमी देशो के प्रभाव के कारण मिडीया आम जनमानस इस सच्चाई के विपरित धारणा बनाने मे लगी रहती है और सफल भी है । भारत-पाकिस्तान विभाजन अप्राकृतिक है । भारत-पाकिस्तान के बीच अगर झगडे ना हो तो दक्षिण एसिया विश्व की सबसे ताकतवर शक्ति के रुप मे उभर कर आ जाएगा ।

काशिफ़ आरिफ़
Guest
सबसे पहले मैं संजीव कुमार सिन्हा जी, का शुक्रगुज़ार हूं जो उन्होने मुझे इस लेख पर मेरी राय रखने लायक समझा और मुझे इस लेख का लिन्क मेल किया। हिन्दुस्तान के विभाजन का ज़िम्मेदार कौन था????? ये एक बहुत बडा सवाल है…मैं आपकी बात से सहमत हूं की जो जिस नज़र से देखेगा उसको वो ही दिखेगा…हमारे देश के इतिहास जितने भी महान लोग हुये है वो सब एक इंसान थे जिनके अन्दर कुछ गुण थे और कुछ अवगुण थे….तो अगर आप गुण ढुढेंगे तो गुण मिलेंगे और अवगुण ढुढेंगे तो अवगुण मिलेगें…. तो बेहतर यही है की हम इतिहास… Read more »
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