लेखक परिचय

डॉ. मनोज चतुर्वेदी

डॉ. मनोज चतुर्वेदी

'स्‍वतंत्रता संग्राम और संघ' विषय पर डी.लिट्. कर रहे लेखक पत्रकार, फिल्म समीक्षक, समाजसेवी तथा हिन्दुस्थान समाचार में कार्यकारी फीचर संपादक हैं।

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डॉ. मनोज चतुर्वेदी

बॉलीवुड में खान बंधुओं का जलवा भारत में ही नहीं, विश्व प्रसिध्द है। शाहरूख खान, सलमान खान, आमिर खान, सैफ अली खान तथा जायद खान से भी भारतीय फिल्म उद्योग की कहानी में परिवर्तन आता है। ‘वांटेड’, ‘दबंग’ और ‘रेड्डी’ के बाद सलमान खान ने बॉडीगार्ड में गजब का अभिनय किया है। यद्यपि वे ‘दबंग’ के कामुक और गुंडई वाले पुलिस इंसपेक्टर के स्थान पर ‘दबंग बॉडीगार्ड’ के रूप में दिखाई देते हैं।

इस फिल्म में सलमान खान (लवली सिंह) राज बब्बर जमींदार सरताज राणा की बेटी करीना कपूर (दिव्या) के अंगरक्षक हैं। विरोधियों से करीना कपूर (दिव्या) को बचाना ही एकमात्र लक्ष्य है। एक-एक पल करीना की सुरक्षा में सलमान खान (लवली सिंह) रहता है। वह सबसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ सुरक्षा गार्ड है। प्रायः यह देखा जाता है कि बॉडीगार्डों के लिए एक स्थान होता हैतथा लड़के-लड़कियां अपने-अपने कक्षाओं में अध्ययन किया करते हैं लेकिन यह ‘दबंग बॉडीगार्ड’ क्लासरूम में भी जाकर बैठ जाता है। वहां दबंगई के माध्यम से छात्र-छात्राओं के बीच अपने आप को परिचित कराता है। धीरे-धीरे उससे करीना कपूर (दिव्या) प्रेम करने लगती है। बार-बार एक अनजान लड़की होकर करीना कपूर (दिव्या) हंसी-ठिठोली तथा प्रेमपूर्ण बातें करती है। अंतिम में यह बॉडीगार्ड दिव्या का जीवनसाथी बन जाता है।

हंसी-मजाक में रजत रवैल ने कमाल कर दिया है। करीना कपूर एक विंदास और कामुक लड़की के रूप में परोसी गई है पर सलमान की दबंगई को देखकर लगता है कि यह फिल्म ‘दबंग’ की बराबरी नहीं कर सकती। पटकथा का पक्ष कमजोर लगता है। कुल मिलाकार इस फिल्म को कहानी की दृष्टि से लचर कहा जा सकता है।

निर्देशक – सिद्दिकी,  कलाकार – सलमान खान, करीना कपूर, राज बब्बर, रजत रवैल, विद्या सिन्हा, महेश मांजरेकर, आदित्य पंचोली, हाजेल कीच, असरानी वगैरह।

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