लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

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 (१)

विकलांग मानसिकता

सफलता प्राप्ति के लिए, सबसे पहले हमें, अपनी विकलांग मानसिकता से ऊपर उठना होता है।

”अहं ब्रह्मास्मि” (मैं ब्रह्म हूँ।) का घोष, या शंकराचार्य रचित — ”चिदानन्द रूपश्शिवोहम्‌ शिवोहम्‌” का उद्‌घोष आपको बार बार करते हुए, अपने चित्त-बुद्धि-आत्मा को उस भाव से सराबोर करना होता है। जो आपके मन, बुद्धि और आत्मा को उपर उठा देता है।कहते हैं, ”मनः अस्ति स मानवः”। अर्थात, मनुष्य मानसिक प्राणी है, वह उत्साह की सोच मात्र से उत्साहित हो जाता है।

सुना होगा ही,कि विजय प्राप्ति के लिए सब से कठिन, अपने मन की सीमा पार करना होता है; जिसे पार किए बिना विजयी होना असंभव होता है।

(२)

हीन ग्रन्थि, दास्यता ग्रन्थि, या लघुता ग्रन्थि

हीन ग्रन्थि, दास्यता ग्रन्थि, या लघुता ग्रन्थि इत्यादि ग्रन्थियाँ; ऐसी मानसिक खाइयाँ हैं, जिन्हें पार किए बिना (हम) आप स्वतन्त्र नहीं हो सकते। हम सच्चे अर्थ में स्वतंत्र इसी लिए नहीं है, क्यों कि इन सीमाओं को हम सामूहिक स्तर पर, पार नहीं कर पाए हैं। शरीर स्वतन्त्र है, पर मानसिकता अभी भी गुलामी की है, सारी समस्याओं की जड यही है।

यदि हम ही गुलाम होते, और हमारा शासन दूर दृष्टिका नेतृत्व रखता, तो भी समस्याएं कम होती। पर हमारा नेतृत्व नेतृत्व है ही नहीं। वह सत्ता-शासन के पीछे भागता गुलाम है। वह शासन का, और आसन का, कुरसी का, पीछा कर रहा है। यह कैसा नेतृत्व?

वास्तव में सही नेतृत्व का सम्बंध नेत्र से होता है। जिन्हें दूर के, और निकट के भविष्य की अपेक्षित घटनाएं दिखाई दे, और कुछ तर्क भरा अनुमान कर सकने की क्षमता हो, उसे नेता कहते हैं। ऐसा नेता उस दृष्टि से राष्ट्र को दिशादर्शन करता है, और कठिन समस्याओं का सामना करने की क्षमता रखता है।

(३)

हमारे वैश्विक योगदान

इस लिए हमारे वैश्विक योगदान की सच्चाइयाँ लिखने का प्रयास चल रहा है। जिस से हीन वृत्ति का त्याग सरल हो, इसी दृष्टि से संस्कृत की वैश्विक महत्ता, देवनागरी की वैज्ञानिकता, और अन्य अनेक क्षेत्रों में हमारा वैश्विक योगदान, ऐसे विषयों पर आलेख लिखे गये हैं। सच्चाई ही लिखी गयी है।

इसी दृष्टि से, भारतीय संस्कृत मूल धातुओं का अंग्रेज़ी पर, ऐतिहासिक उदाहरणों सहित प्रभाव (युरप) दिखाने का प्रयास चारेक शब्द वृक्षों को रचकर किया गया था। स्पष्टतः हेतु था, कि हम हमारा ही योगदान जानकर, हीन वृत्ति का त्याग करें, आत्मविश्वास धारण करें, और स्वतन्त्रता का भाव जाग्रत हो।

जब हमी ने संसार को अंक दिए, भाषा दी, संस्कार दिए, तो हमें हीनता का अनुभव कैसा? और भी अनेक ऐसे पहलु हैं, जिसका प्रमाण देने पर उल्लेख किया जा सकता है। संसार भर में कुटुम्ब या परिवार प्रणाली भारत की देन मानने के लिए भी पर्याप्त प्रमाण है।कुटुम्ब परिवार की सारी संज्ञाएं संस्कृत की मुद्राओं सें अंकित इसी लिए हैं। संगीत के स्वर जो साम-वेद से निकले भारत की देन ही माने जाते हैं। सा रे ग म … का सप्तक, और दो रे मी फा का सप्तक, समान सिद्धान्तों पर आधारित भी इसी लिए ही है।

(४)

देववाणी संस्कृत का सियामी (थायलॅन्ड )भाषा पर प्रभाव

आज एक अलग विचार रखना चाहता हूँ। निम्न सूची में आप देख पाएंगे, कि देववाणी संस्कृत का सियामी (थायलॅन्ड )भाषा पर कैसा प्रभाव है।

सूचना: हमारे संस्कृत शब्दों के अर्थ, और थायलॅंड की भाषा के शब्दार्थों में कुछ अंतर अवश्य आ चुका है।

जो शब्द वहां पर रूढ हो चुके हैं, हमारे शुद्धिवादियों को चकित और साशंक भी कर सकते हैं। और उन शब्दों को नितान्त सही मानने पर भी कठिनाई हो सकती है। पर ध्यान रहे कि शब्द फिर भी संस्कृत से ही उपजे हुए हैं।

शब्द और उनके अंग्रेज़ी अर्थ पढने पर आप की निम्न प्रक्रियाएं संभव हैं।

(१) कहीं अर्थ विस्तार की प्रक्रिया देखी जा सकती है।

(२) कहीं, उनकी अपनी रूढि के अनुसार शब्दार्थ कुछ अलग है।

(३) कुछ आपकी दृष्टि से अनुचित लगने वाले शब्द भी आपको मिल पाएंगे।

पर ध्यान रहे कि फिर भी शब्द संस्कृत मूल के ही है, और यह हमारा प्रभाव ही है।

कुछ शब्दार्थ विस्तार हमारे यहां पर भी हुआ है, और अलग अर्थ भी अस्तित्व में आये हुए हैं। उदाहरण दे कर आलेख बहुत लम्बा होगा, इस लिए संयमित प्रस्तुति कर रहा हूँ।

(५)

थायलॅंड (सियाम) की अर्थ शब्द सूची और अर्थ।

थायलॅन्ड की लिपि भी देवनागरी उच्चारण पर अधारित ही है। जैसे भारत की अन्य लिपियां भी देव नागरी का ही अनुसरण करती है।

अंग्रेज़ी शब्द = थाय प्रति शब्द।

Academic = विद्याकार

Achievement = समृद्धि

Analogy = उपमान,

Arithmetic =लेख गणित

Attribute = गुण लक्षण

age =आयु

business activity = धुराकृत कृत कार्य,

Manufacturing Activity = हस्त कर्म कृतकार्य,

arithmetical mean = मध्यम लेखगणित

arithmetical series = अनुक्रम लेख गणित

business Establishment =स्थान कार धुराकृत

Catastrophe =विपत्ति

Causation = हेतुक कर्म

Coefficient Of correlation = सम्प्रसिद्धि सह्सम्बंध

Concept =मनोभाव

Computation =कार गणित,

Arithmetical Concept =मनोभाव गणित शास्त्र,

Consumption = कार-परिभोग,

Correlation = सह-सम्बन्ध

Negative Correlation = सह-सम्बन्ध निषेध

Crisis =विकृत काल

Primary Data = मूल प्रथम-भूमि

Qualitative Data = मूल गुण-भाव

Quantitative Data = मूल परिमाण

Secondary data =मूल दुतिय भूमि,

Decade= दश वर्ष,

Deduction =निर्णय

Degree = अंश

Derivative, = अनुबन्ध

Description,= वर्णना

Effects,=फल

Seasonal Effects,=फल ऋतुकाल

Element = धातु-मूल

Time Element,= धातु मूल वेला

Agricultural Equipment,=परिबन्ध क्षेत्र कर्म

Establishment = स्थान कार

Estimate = प्रमाण

Formula =सूत्र

Geography = भूमि शास्त्र

Geometry = रेखा गणित

Geometric Mean = मध्यम रेखा-गणित

Homogeneous = एकबन्धु

Ideal = उत्तम गति

illusion, illusory = माया

Optical Illusion = दर्शन माया,

incidental = हेतु उपपत्ति

index = दर्शनी

historical series = अनुक्रम प्रवत्ति

incident = उपपत्ति

induction = उपनय

infinite = अनन्त

influence = इद्धिफल

measure = मात्रा

method =विधि

nature = स्वभाव

net correlation = सह सम्बंध शुद्धि

normalcy = प्रकृति भाव

Conical = शिखर भाव

Phenomena = प्रकट कारण

Relationship = सम्बन्ध भाव

Sequence = अनुपर्व

Ultimate = अन्तिम

Zone = खेत

Irrigation = जल प्रदान,

Agriculture = क्षेत्र कर्म,

Economics = श्रेष्ठ शास्त्र

Activity = कृत्यकार

Public Interest = साधारण प्रयोजन

Independent = एकराज

State = राष्ट्र,

Race = जाति-बन्धु,

Nationality = संजाति

Imaginary = चिन्त भाव

Infer = अनुमान

Mean time = वेला मध्यम,

Medium = मध्यस्थान,

Mode = नियम,

Negative = निषेध,

Net = शुद्धि,

Normal = प्रकृति,

Occupation = आजीव

Organic = इन्द्रीय

Peak = शिखर

Potential = शक्य

Seasonality = भाव: ऋतुकाल

Special =विशेष

Zero = शून्य,

Zone of Estimate = खेत काल-प्रमाण

Union = सहभाव

Commerce = वाणिज्य,

Production = फलित कर्म,

Object = वस्तु

Country = प्रदेश

Nation = जाति

People = प्रजा जन,

Population = प्रजाकर

शब्द और भी काफी मिले, पर सीमित लेख में, कुछ उदाहरणों से ही प्रमाण किया गया है।

आपको इन उदाहरणों से देववाणी संस्कृत के शब्दों का थायलॅंड की भाषा पर प्रभाव का अनुमान हो सकता है।

संदर्भ:

डॉ. रघुवीर जी के, लेख।

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17 Comments on "थायलॅंन्ड पर संस्कृत का प्रभाव — डॉ. मधुसूदन"

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डॉ. राजेश कपूर
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आदरणीय प्रो मधुसुदन जी एक विनम्र सुझाव है की हिंदी पर आप द्वारा किये गए अभूतपूर्व कार्य पर एक ग्रन्थ रचना का प्रयास करें जिससे आने वाली पीढियां इससे लाभान्वित हो सकें. भारत के लिए यह एक अतुलनीय योगदान सिद्ध होगा, इसमें कोई संदेह नहीं. उस ग्रन्थ का संपादन किसी हिंदी क्षेत्र के निवासी विद्वान से करवाएं तो उचित होगा. अन्यथा उस पर गुजराती प्रभाव स्वाभाविक रूप से आ ही जाता है.

डॉ. मधुसूदन
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डॉ. राजेश जी, धन्यवाद। आपका सुझाव शिरोधार्य है। सही सही आप का प्रत्येक बिन्दु स्वीकार्य है। काम चल ही रहा है। इस विषय के पहलु भी काफी हैं। जो लिखा जा रहा है, पाठकों की रूचि से भी अधिक संस्कृत की पठन पाठन की हीन-दीन दशा और उसकी ओर घोर उपेक्षा का परिणाम प्रतीत होता है। आज अमरिका में जितने विश्वविद्यालय संस्कृत पढा रहें हैं, उसे जानकर भारत का सर नीचा हो जाएगा। पीडा इसीकी होती है। सारा योगासन व्यवसाय, सारा ध्यान-समाधि (मेडिटेशन) व्यवसाय-हलदी अदरक नीम का भी पेटंट करने वाली कल्चर (संस्कृति नहीं) है यह पश्चिम। हमारी गीता को,… Read more »
शिवेंद्र मोहन सिंह
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शिवेंद्र मोहन सिंह
बहुत सुंदर… स्तुति योग्य प्रयास … मैं यहाँ तमिलनाडु में करीब ८-९ मास से हूँ, और बातचीत में बहुत से शब्द हिंदी के या संस्कृत के होते हैं, हिंदी के शब्द आते ही में उन्हें रोक देता हूँ और कहता हूँ की ये तो हिंदी का शब्द है तो ये लोग बहुत खुश होते हैं. विशेष तमिलनाडु में अधिकतर जन साधारण हिंदी लिखना पढना जानता है सिर्फ एक कमी है की वो हिंदी को समझ नहीं पता है. अगर इस पर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो ये समस्या भी समाप्त हो सकती है. ये कार्य हम हिंदी भाषियों को ही… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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शिवेन्द्र मोहन सिंह जी। धन्यवाद। (१)मुझे भी आप की ही भाँति अनुभव कॉइम्बतूर में देढ वर्ष पूर्व, आया था। (२)आर्य वैद्य शाला में हिन्दी की जानकारी उन्नति(प्रमोशन) का कारण माना जाता था। (३) एक पुस्तक की प्रस्तावना में हिन्दी राष्ट्रभाषा होने के कारण पुस्तक को प्रचारार्थ हिन्दी में लिखा गया है, ऐसा उल्लेख किया गया था। पुस्तक मेरे पास हैं। (४)डॉ. कलाम की भी हिन्दी में अनुवादित पुस्तकें पढी जा रही है। (५)और दक्षिण भारत हिन्दी प्रचारिणी सभा के कार्यवाह अन्नामलाई जी का विवरण है, कि १९६५ में २०,००० छात्र तमिलनाडु में हिन्दी सीखते थे, आज उससे ३० गुना संख्या… Read more »
Vishwa Mohan Tiwari
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साधुवाद एक् प्रेरणादयक लेख के लिये। एक प्रश्न : क्या यह पता लग सकता है कि (थायलैन्ड) सियाम की सियामी भाषा मे‌ संस्कृत के शब्द कितने प्रतिशत हैं ? मैं जब बैंकाक गया था तब गाइड से बात करते समय उसे रोककर बतलाता था कि वे शब्द तो संस्कृत के हैं, जो वह यह सुन कर प्रसन्न होती थी और स्वीकार करती थी कि उसे यह मालूम नहीं था। उनके उच्चारण अलग हैं, किन्तु सरलता से समझे जा सकते हैं। क्या अपने लेख में वे उच्चारण भी आप दे सकते हैं? आपने शब्दों की सूची में अंग्रेज़ी शब्द पहले दिये… Read more »
डॉ. मधुसूदन
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अगला आलेख आपके सुझाव के अनुसार, आज ही प्रवक्ता को भेज दिया है|
आभार.
कृपांकित — मधूसूदन|

अवनीश कुमार सिंह
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सफलता प्राप्ति के लिए, सबसे पहले हमें, अपनी विकलांग मानसिकता से ऊपर उठना होता है।
अवश्य,
ऐसे ही हम युवाओं का मार्गदर्शन करते रहें| हम अवश्य ही भारत और भारतीयता के नव ध्वजवाहक बनेंगे|

डॉ. मधुसूदन
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प्रिय अवनीश,
निश्चित अगला आलेख आप युवाओं की दृष्टिसे ही, लिखने का प्रयास करूंगा।
आशीष।

SATYARTHI
Guest
आचार्यप्रवर मधुसूदन जी जिस प्रकार हमलोगों का ज्ञानवर्धन कर रहे हैं उसके लिए कृतज्ञता ज्ञापन के लिए मेरे पास उचित शब्द नहीं हैं.संस्कृत और थाई भाषा दोनों में ज्ञानशून्य होने के कारण मधुसूदन जी के इस लेख पर टिप्पणी करना संभव नहीं है पर आचार्य जी से अनुमति की अपेक्षा रखते हुए थाई देश में भारतीय संस्कृति के प्रभाव पर अवश्य कुछ कहना चाहूँगा. मुझे ६ वर्षा पहले बंगकोक में लगभग ६ सप्ताह रहने का अवसर मिला . यह जान कर सुखद आश्चर्य हुआ की वहां के राजाअपने आप को राम की उपाधि से अलंकृत करने में गौरव अनुभव करते… Read more »
डॉ. मधुसूदन
Guest

सत्त्यार्थी जी, आप की टिप्पणी एक संक्षिप्त आलेख ही है।
भारतीय संस्कृति सारे विश्व में अकेली समन्वय वादी संस्कृति है। एवं मुक्ति मार्ग के विशेषज्ञ हम ही है। इसी लिए विश्व में हमारी अलग पहचान है।
स्थूल रूप से, अन्य सभी संस्कृतियाँ वर्चस्ववादी ही है।
अनुरोध: मैं व्यवसाय के कारण “आचार्य” यह अभिधा स्वीकार भी कर लूँ, पर “प्रवर” का प्रयोग मुझ पर जो भार आरोपित करता है, वह योग्यता मुझ में नहीं है। कभी आपकी अपेक्षा पूरी ना कर पाउं तो?

सविनय, सादर मधुसूदन

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