लेखक परिचय

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

सुरेश हिन्‍दुस्‍थानी

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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भारत भूमि पर पैदा हुए जाज्वल्यमान नक्षत्रों में शुमार भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं। उनके चले जाने से पूरे देश में शोक की ऐसी लहर दौड़ी कि हर कोई गमगीन दिखाई दिया। डॉ. कलाम के जाने के जाने से पूरा भारत रो दिया। उनके महानतम कार्यों को देखकर उनको श्रद्धांजलि के रूप में दी जा रहीं गाथाएं भी कम दिखाई दे रही हैं। अब्दुल कलाम के बारे में यही कहा जा सकता है कि भारत माता के सच्चे सपूत थे, देश के किसी भी हिस्से में दर्द होता था, तो उसका अहसास उनके शरीर में होता था। वे चाहते थे कि भारत एक ऐसा मजबूत राष्ट्र बनकर समस्त जगत के सामने उपस्थित हो, जिसका सामना किसी भी रूप से दुनिया की कोई ताकत न कर सके। उनके हर कार्य और आवाज में भारत की धड़कन ही सुनाई देती थी। उनका विजन 2020 तक ऐसा भारत निर्माण करने की थी, जो तकनीकी रूप से ही नहीं वरन हर दृष्टि से सक्षम हो।
सही मायने में भारत रत्न प्रमाणित हुए अब्दुल कलाम की सभी यादें चिरकाल तक हमारे हृदय में विद्यमान रहेंगी। उनकी कही गई हर बात भारत के लिए एक प्रेरणा है। वे कहा करते थे कि जो व्यक्ति नीद में सपने देखता है उसका कोई महत्व नहीं है, बल्कि जिसे सपनों के कारण नीद नहीं आए, उसका महत्व है। उनका स्पष्ट मत था कि जो सपने आप देखते हैं उसको पूरा करने का सामथ्र्य आपके पास है, बस आवश्यकता इस बात की है कि उस सपने को पूरा करने के लिए आपके प्रयास किस प्रकार के हैं। वास्तव में कलाम साहब के सपनों में जान होती है, उनके हर शब्द प्रगति और विकास की एक मजबूत धरातल होती थी। उन्हीं प्रेरणादायी शब्दों को पूरे भारत में पिरोने की प्रबल इच्छा उनके अंदर आग की तरह दिखाई देती थी। खास बात यह है कि जीवन के अंतिम समय तक वे इस बात को प्रसारित करते हुए दिखाई दिए।
इससे अलग हटकर एक बात आज के समय में करना मुझे अत्यंत जरूरी लगता है। वह यह कि अब्दुल कलाम संप्रदाय के आधार पर मुसलमान माने जाते हैं, वर्तमान में देश के मुसलमानों को शक के आधार पर देखा जाता है, चूंकि कई मुसलमानों के वक्तव्य इस प्रकार के होते हैं जो भारत का विरोध करते दिखाई देते हैं। भारत में रहने वाले कई मुसलमान आज भी केवल अपने संप्रदाय के बारे में ही सोचते हैं। उनको देश की कोई परवाह नहीं होती है। उनकी नजर केवल भगवा या हरा रंग में भेद करने की होती है। लेकिन अब्दुल कलाम सच्चे मुसलमान होते हुए भी सारे रंगों में समाए थे। हर रंग उनका अपना रंग था। उनका सोचना यही था कि जो रंग भारत माता की रक्षा करने और देश को मजबूत बनाने का कार्य कर सकने का सामथ्र्य रखता हो, उस रंग को वे अपने सीने से लगाकर ही रखते थे। उनकी नजर में किसी प्रकार का भेद नहीं था। सारा देश उनका अपना था। जिस देश में एक तरफ दुर्दान्त आतंकी याकूब मेनन के बारे में विरोधाभासी स्वर निकाले जा रहे हों, उस देश में दूसरी तरफ कलाम साहब के निधन पर आंसुओं का सैलाब बह रहा हो, ऐसा केवल उनके द्वारा किए गए कार्यों के बल पर ही हो रहा है। दोनों के कार्यों में जमीन आसमान का अंतर है।
महान वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कलाम ने अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर भारत को जो ऊंचाइयां प्रदान कीं, उनके कारण पूरा भारत देश उनके कार्यों का आजीवन ऋणी रहेगा। मिसाइल की ताकत प्रदान करके देश को शक्ति संपन्न बनाने वाले कलाम साहब की नजर में युवा भारत की तस्वीर होती थी। उन्होंने युवाओं के बीच जोश पैदा करने वाला वातावरण बनाया। जब कलाम साहब का निधन हुआ, उस समय के बाद से ही देश के सारे चैनल, सोशल मीडिया पर केवल और केवल कलाम के ही चर्चे रहे। ट्विटर पर देखा जाए तो हर सौ में से सौ ट्वीट उनके बारे में ही थे, इसी प्रकार फेसबुक पर भी पोस्ट करने वाले किसी भी प्रकार से पीछे नहीं रहे। हर पोस्ट में केवल और केवल कलाम ही थे। इससे यह अनुमान तो लगाया ही जा सकता है कि कलाम साहब भारत के हर दिल पर छाए हुए थे। कलाम साहब के जीवन में जो गुरू मंत्र विद्यमान था, उसे वे जीवन भर युवाओं के बीच बिखेरते रहे। आज भारत की युवा शक्ति उसी राह पर जा रही है जो कलाम साहब ने निर्मित की है।
kalamआज भले ही पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भारत के हर युवा हृदय पर जो छाप छोड़ी है, उसकी जीवंतता आजीवन स्मरणीय बनी रहेगी। हो सकता है कि उनके कार्य अधूरे छूट गए हों, लेकिन वे खुद ही युवाओं के लिए ऐसी राह का निर्माण करके गए हैं कि देश की युवा शक्ति द्वारा उस राह का अनुसरण करने मात्र से ही उनके सपने पूरे हो जाएंगे। कहा जा सकता है कि उनकी बनाई राह कोई सामान्य राह नहीं, बल्कि देश और युवाओं के लिए ऐसी राह है जो भारत को जिस ओर ले जाना चाहें उस और भारत जाएगा। निश्चित रूप से अब्दुल कलाम का दर्शन भारत को उस मुकाम पर ले जाएगा, जहां हर देशभक्त ले जाना चाहता है।
वर्तमान में हर युवा कलाम साहब के सपनों के आधार पर अपना जीवन जीना चाहता है। उनके सपनों को पूरा करने के लिए लालायित भी है। कोई भी देशवासी यह नहीं चाहेगा कि कलाम जिस सपने को दिखाकर गए हैं, वह सपना मात्र सपना बनकर ही रह जाए। सभी चाहते हैं कि उनके सपनों को पूरा करने का सामथ्र्य देश के युवाओं को उन्होंने दे दिया है, अब युवा भारत की आवाज और कार्य निश्चित ही उनके सपनों को पूरा करेंगे। ……… विनम्र श्रद्धांजलि
सुरेश हिन्दुस्थानी

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1 Comment on "पूरे देश को रुला गए कलाम"

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suresh karmarkar
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वास्तव में कलाम साहेब ,पुरे देश को रुला गये/हाल के वर्षों में कोई नेता ऐसा पैदा नहीं हुआ. अपने अंतिम समय में जब वे शिलांग हवाई अड्डे से उतरकर कार में बैठकर जा रहे थे तब भी बातचीत में कह रहे थे की संसद में जो बहस होनी चाहिए उसके स्थान पर हंगामा हो रहा है। इस हंगामे को रोकने का रास्ता क्या हो सकता है यह मई शिलांग के वहां के प्रबंधन संस्थान के छत्रों से पुछूंगा. अर्थात ८३ वर्ष की उम्र में भी कलाम साहेब को संसद के गतिरोध की चिंता थी. हमारे सांसद अब तो सबक लें… Read more »
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