लेखक परिचय

संजय सक्‍सेना

संजय सक्‍सेना

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी संजय कुमार सक्सेना ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद मिशन के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत 1990 में लखनऊ से ही प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'नवजीवन' से की।यह सफर आगे बढ़ा तो 'दैनिक जागरण' बरेली और मुरादाबाद में बतौर उप-संपादक/रिपोर्टर अगले पड़ाव पर पहुंचा। इसके पश्चात एक बार फिर लेखक को अपनी जन्मस्थली लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वतंत्र चेतना' और 'राष्ट्रीय स्वरूप' में काम करने का मौका मिला। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे दैनिक 'आज' 'पंजाब केसरी' 'मिलाप' 'सहारा समय' ' इंडिया न्यूज''नई सदी' 'प्रवक्ता' आदि में समय-समय पर राजनीतिक लेखों के अलावा क्राइम रिपोर्ट पर आधारित पत्रिकाओं 'सत्यकथा ' 'मनोहर कहानियां' 'महानगर कहानियां' में भी स्वतंत्र लेखन का कार्य करता रहा तो ई न्यूज पोर्टल 'प्रभासाक्षी' से जुड़ने का अवसर भी मिला।

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संजय सक्सेना

उत्तर प्रदेश में ‘जंगल राज’ जैसा माहौल हो गया है। प्रदेश में व्यापारी से लेकर कर्मचारी, बच्चों से लेकर बूढ़े सभी जंगल राज की चपेट में हैं। आदमी को कफन बांध कर घर से बाहर निकलना पडता हैं। कब उसके साथ क्या हादसा हो जाए कोई नहीं जानता। सबसे बुरा हाल प्रदेश की आधा आबादी(महिलाओं) का है। माया राज में लड़कियों और महिलाओं पर तो पहाड़ ही टूट पड़ा है। वर्षो से चेन स्नैचिंग, लूटपाट और छेड़छाड़ से जूझती महिलाओं और युवतियों के लिए माया राज में दिन-प्रतिदिन रेप और बलात्कार की बढ़ती घटनाएं घिनौने अभिशाप के रूप में सामने आ रही हैं।बस चेहरे बदल जाते हैं चरित्र एक जैसा है। महिला मुख्यमंत्री के कार्यकाल में महिला उत्पीड़न की घटनाओं की सीरीज बन गई है। बावजूद इसके सरकार की ओर से कानून व्यवस्था के मामले में पूर्ववर्ती सरकारों की अपेक्षा चार साल के कार्यकाल को सबसे बेहतर बताने में कोई हिचक महसूस नहीं की जा रही है।

चार साल पूरा कर चुकी मायावती सरकार में महिला उत्पीड़न की घटनाओं ने रिकार्ड बना लिया है। बांदा का शीलू प्रकरण, बदायूं का ज्योति शर्मा, बुलन्दशहर का शीतल बिड़ला शाहाबाद का प्रियंका, उन्नाव का कविता, लखनऊ की आरती,रीना और गायत्री कांड, बाराबंकी के थाना गुंगेटर में पांच साल की बच्ची सविता मौर्या की बलात्कार के बाद हत्या, फैजाबाद का शशि हत्याकांड, मुरादाबाद में गैंगरेप की शिकार 13 वर्षीय कंचन की हत्या और उससे पहले उसकी दोनों आंखे फोड़ देने का कृत्य, कानपुर के एक नर्सिंग होम के आईसीयू में 17 वर्षीय कविता के साथ अस्पताल के मालिक,उसके दामाद आदि द्वारा सामूहिक बलात्कार और मामला उछलने पर कंचन को जहर का इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुलाना, पीलीभीत की धनसेई के साथ गांव के प्रतिष्ठित माने जाने वाले लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार, जौनपुर का शाबीना खातून,इलाहाबाद का सीमा यादव कांड, कायमगंज का तान्या गंगवा काण्ड, मेरठ का हिमानी त्यागी जैसी दर्जनों वारदातों ने माया राज में कानून व्यवस्था के दावे को झुठला दिया है।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले से जुड़ गया। निघासन थाना परिसर में दस जून की शाम को गिरे हुए पेड़ की एक चार फुट ऊंची टहनी से मजदूर इंतजाम अली की 14 वर्षीय बेटी सोनम का शव लटकता मिला। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला करार देकर फाइल बंद कर देना चाहती थी। परंतु सोनम की मॉ और उनके समर्थन में उठे हजारों हाथों के कारण ऐसा हो नहीं पाया। सोनम की मॉ ने जब आरोप लगाया कि उसकी लड़की ने आत्महत्या नहीं कि बल्कि उसे पुलिस वालों दे दुराचार करने के बाद मार डाला,तो लखीमपुर से लेकर लखनऊ तक में खलबली मच गई। 14 वर्षीय सोनम के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या कर दिये जाने की घटना थाना परिसर में होना अकल्पनीय जरूर लगा, लेकिन स्थिति जन साक्ष्य इस बात की गवाही भी दे रहे थे कि यह अकल्पनीय घटना थाना परिसर में हुई थी? विपक्ष मामले को तूल देता इससे पहले ही राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस अधीक्षक डीके राय ने थानाध्यक्ष सहित 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। बात तब भी नहीं बनी तो पूरे मामले की सीबीसीआईडी से जांच का आदेश देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई लेकिन यहां भी सरकार सफल नहीं हो पाई। पुलिस की इस सफाई में ज्यादा दम नजर नहीं आया कि किशोरी ने आत्महत्या की है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी फांसी लगाने की बात सामने आ गई थी। बात बिगड़ती देख सरकार तुरंत हरकत में आई।पुलिस के बड़े-बड़े अफसर और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया। सोनम की लाश कब्र से निकाल कर लखनऊ के डाक्टरों के पैनल ने दोबारा पोस्टामार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुराचार की पुष्टि तो नहीं हुई लेकिन यह बात जरूर साफ हो गई कि सोनम ने आत्महत्या नहीं की थी उसे मारा गया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आते ही पहली बार पोस्टमार्टम करने वाले तीनों डाक्टरों को निलंबित कर विभागीय जांच का आदेश दिया गया,वहीं पुलिस के फालोअर(रसोइया)को गिरफ्तार कर लिया गया। चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ सबूतों से छेड़छाड़ करने का भी मामला दर्ज हुआ।बाद में इस बात की भी पुष्टि हो गई कि सोनम के साथ थाने के ही कुछ सिपाहियों ने मुंह काला करने की कोशिश की थी,लेकिन जब वह सफल नहीं हो पाए तो उन्होंने उसकी गला घोंट कर हत्या कर दी थी।इस बात का प्रमाण मिलते ही पुलिस अधीक्षक डीके राय जो लगातार गलत बयानी करते रहे थे, उन्हें हटा दिया गया। लेकिन विपक्ष अब भी शांत नहीं हुआ है।उसे सीबीसीआईडी पर भरोसा नहीं है। वह सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा है। ऐसे में माया सरकार के लिए आवश्यक हो गया कि वह अपनी छवि बचाने के लिए इस घटना की सच्चाई का पता लगाने के लिए हरसंभव उपाय करे। इसके साथ ही उन कारणों की पड़ताल की जाए, जिनके चलते भविष्य ऐसी वारदात थाना परिसर में न हो सकें।

बात बसपा सरकार की कि जाए तो साफ नजर आता है कि प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था में सुधार के संदर्भ में राज्य सरकार के दावे खोखले हैं। यदि किसी को थाने में मार दिए जाने जैसी घटनाएं होने लगेंगी तो फिर कानून एवं व्यवस्था सुदृढ़ होने के दावों का कोई मतलब नहीं रह जाता। इसी तरह की घटनाएं पुलिस की छवि में सुधार लाने के प्रयासों पर भी कुठाराघात है। जैसा कि लग रहा है, यह कृत्य थाना परिसर में रहने वाले लोगों का है तो यह और भी भयावह है।घटना को बाहर के किसी व्यक्ति ने अंजाम दिया तो भी यह कानून एवं व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाला है।चिंताजनक यह है कि अपराधी तत्वों के बढ़ते दुस्साहस को बयान करने वाली यह एकमात्र घटना नहीं है। इस तरह की घटनाओं में खाकी वर्दी से पहले सत्तारूढ़ दल के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का नाम सामने आ रहा था। तब सरकार द्वारा ऐसे नेताओं को आईना दिखाते हुए जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जाता तो खाकी वर्दी इस तरह का दुस्साहस करने की हिम्मत नहीं करती। कुछ दिनों पहले सहारनपुर मे ंएक सर्राफ परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर दिये जाने की घटना से भी कानून एवं व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए थे।

सोनम हत्याकांड में के संदर्भ में जिस तरह यह सामने आया कि एक पुलिसकर्मी ने घटनास्थल पर जांच पड़ताल के दौरान पीड़ित परिवार का एक मोबाइल फोन हड़प लिया था, उससे यही स्पष्ट होता है कि पुलिसकर्मियों को अपनी छवि की तनिक भी परवाह नहीं और वे अपने हाथों अपनी प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

बात बसपा नेताओं के चरित्र की कि जाए तो साफ नजर आता है कि माया के चौथे कार्यकाल में हुई तमाम घटनाओं को अंजाम देने में उन्हीं की सरकार के मंत्रियों, विधायकों और नेताओं का नाम आ रहा है। कैबिनेट मंत्रियों से लेकर राज्य मंत्री तक पर महिलाओं के उत्पीड़न और उनकी हत्या के आरोप लगे। प्रदेश की पहली ऐसी सरकार है जिसके सर्वाधिक मंत्री विधायक महिला उत्पीड़न और उनकी हत्या के आरोप लगे। आपराधिक कृत्य के कारण्ा कई को जेल जाना पड़ा तो कुछ को पार्टी से बाहर होना पड़ा,लेकिन यह संख्या न के बराबर थी।जिसके चलते ही इस तरह की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई।बसपा के पूर्व राज्यमंत्री आनंद सेन को तो इसी तरह की घटना में आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी है। पिछले चार सालों में खादी और खाकी के गिरते स्तर के लिए निश्चित रूप से माया सरकार की कार्यशैली ही जिम्मेदार है।जब हर काम पैसे से होगा तो,इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।सोनम मामले में उंगली खाकी वर्दी पर उठ रही है,तो सवाल उठना स्वभाविक है कि पुलिस इतनी निरंकुश कैसे हो गई। पूर्व डीजी पुलिस यशपाल सिंह की बातों का यहां संज्ञान में लिया जाना जरूरी लगता है।उनकी बेबाक टिप्पण्ाी थी ‘ बार-बार घृणित कृत्यों में पुलिस के शामिल होने की बात उजागर होने से पूरे महकमें की साख गिरती है।’ इसका कारण बताते हुए वह कहते हैं ‘थाना स्तर पर नियंत्रण कमजोर हुआ है।पुलिस कर्मियों में अपने अधिकारियों का खौफ खत्म हो गया है। कई एसपी ऐसे हैं जो मानते हैं कि कभी-कभी वह चाहकर भी एक अदने से सिपाही को नहीं हटा पाते ।इसके पीछे राजनैतिक मजबूरियां होती हैं,जो जानते सब हैं लेकिन बोलना कोई नहीं करना चाहता।यशपाल जी की बातों में दम है।यह बात पुसिल महकमें पर थोड़ी-बहुत पकड़ रखने वाला व्यक्ति भी आसानी से समझ और देख सकता है।पुलिस महकमें का पूरा सिस्टम ‘लेन-देन’ पर आधारित हैं ट्रांसर्फर-पोस्ंटिग के लिए योग्यता की जगह जेब गरम करने की ताकत आधार होती है।डीजी पुलिस मुख्यालय में एक अधिकारी महोदय मे बारे में तो यहां तक कहा जाता है कि वह इंस्पेक्टरों की ट्रांसर्फर-पोस्ंटिग से जब तक ‘पर डे’ पांच लाख रूपए नहीं एकत्र कर लेते हैं तब तक शांत नहीं बैठते। यह अधिकारी कुछ समय पहले इलाहाबाद पुलिस मुख्यालय में थे तो मुख्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टरों मे यहां तक लिखा था ”तारडे-एक लाख परडे”लेने वाले अफसर से होशियार,लेकिन बदनामी के यह दाग उनकी तरक्की में कभी बाधा नहीं बने।

 

लखीमपुर-खीरी जिले में सोनम की मौत की घटना को राज्य महिला आयोग ने भी गंभीरता से लिया है।उसने दो सदस्यीय जांच टीम लखीमपुर भेजी थी,जिसकी रिपोर्ट भी माया सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है,तो बांदा की शीलू निषाद की घटना के बाद लखीमपुर की सोनम की हत्या की घटना ने संपूर्ण विपक्ष के हाथ लगी उस फेहरिस्त को लंबा कर दिया है, जिसको लेकर वह सदन से सड़क तक वह सरकार की घेराबंदी में लगे हैं। शीलू निषाद की तरह लखीमपुर की घटना की भी सीबीसीआईडी की जांच के आदेश दिये गये हैं।एक तरफ सरकार की किरकिरी हो रही है तो दूसरह तरफ महिला उत्पीड़न की घटना के बाद आरोपियों को सरकार ने बचाने का काम अभी भी बंद नहीं किया है। बदायूं के विधायक योगेन्द्र सागर के खिलाफ तो पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट भी जारी किया। इसके अलावा कैबनेट मंत्री राकेश धर त्रिपाठी पर बलात्कार पीड़ित लड़की पर शिकायत वापस लेने का आरोप थ्। राज्यमंत्री जयवीर सिंह पर एक महिला ने अपने अभियंता पति की हत्या करने का आरोप लगाया। कानपुर की शिक्षिका ने अपने पति की हत्या के लिए पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा पर आरोप लगाया लेकिन इन सब के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। अनंत कुमार मिश्र को सीएमओ वीपी सिंह की हत्या के बाद मंत्रिमंडल से बाहर किया गया।सोनम की हत्या में भी अरोप लग रहा है कि उसके परिवार वालों पर पांच लाख रूपए लेकर मामला वापस लेने का दबाब डाला गया था। कांग्रेस, भाजपा, सपा, लोकदल,पीस पार्टी ,भाकपा,माकपा सभी इस मामले को भुनाने में लगे हैं।सरकार पर दबाव बनाने के लिए धरना-प्रदर्शन का दौर चल रहा है।

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। हत्या और बलात्कार की घटनाएं रोज ही हो रही हैं। सरकार ने लगता है इसकी छूट दे रखी है। बसपा अपराधियों का संरक्षण गृह है।इसके चलते अपराधी भयमुक्त हैं और आम नागरिक आतंकि। मुख्यमंत्री जब स्वयं अपराधियों को क्लीन चिट बांटती रहती हैं और उनकी जानकारी में थाने बिकते हैं तो फिर प्रदेश में कानून व्यवस्था के सुधरने की आशा कैसे की जा सकती है? मुख्यमंत्री सीबीसीआईडी की जांच की आड़ में अपराधियों को बचाने की साजिश कर रही है। यह जनता की आंख में धूल झोंकना है।

अखिलेश ने कहा मुरादाबाद में 13 साल की एक लड़की घर से गायब थी। पुलिस ने उसकी खोज खबर नहीं ली।13 जून को उसकी लाश मिली। उसके साथ भी बलात्कार किया गया था। स्वयं राजधानी लखनऊ में सरे राह एक चश्मा व्यापारी गुलाब चन्द्र टेकचंदानी (56 वर्श) की हत्या कर हत्यारे फरार हो गए। पुलिस अंधेरे में तीर मारती रही। दलित महिला मुख्यमंत्री के रहते प्रदेश में बहू-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ की ये घटनाएं जताती है कि प्रदेश में पूरी तरह जंगलराज है। उन्होंने कहा,’ माया राज में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं। अल्पसंख्यक अपने आपके असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दोषी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तारी की मांग को लेकर सपा आंदोलन भी चलाएगी ।

कांग्रेस नेता और लखीमपुर के सांसद जफरअली नकवी का कहना था कि सोनम मामले में पुलिस का कृत्य संदिग्ध था, इसलिए सी0बी0सी0आई0डी0 जांच से कोई फायदा नहीं । इसकी सी0बी0आई0 की जाय । जांच के अलावा पुलिस कर्मियों के लिए धारा 302 व 376 की धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए । इसके साथ ही सोनम द्वारा घटना के समय पहने कपड़ों का डीएनए टेस्ट कराया जाय । नकवी ने सोनम के परिवार को संरक्षण देने के साथ ही 10 लाख रूपये आर्थिक मदद की बात कही है।’

कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि निघासन कांड बसपा के माथे पर एक और कलंक है। थाने में लड़की हत्या से मानवता शर्मसार हो गई है। लेकिन शासन प्रशासन दोषियों को बचाने और पीड़ित पक्ष को डराने धमकाने में लगा रहा । ‘

उ0प्र0 कांग्रेस के महासचिव और मुख्य प्रवक्ता सुबोध श्रीवास्तव ने कहा कि चोरी की सीमेंट न रखने के कारण सोनम के घरवालों से पुलिस वाले नाराज चल रहे थे। इसी रंजिश में बदला लेने के लिए दुराचार की कोशिश हुई और विरोध करने पर सोनम की गला दबाकर हत्या कर दी ।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा,’ भ्रष्टाचार में डूबी आकंठ सरकार का अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं रह गया है। सी0बी0आई0 जांच के बिना असली दोषी पकड़े नहीं जा सकते । शाही ने कहा,’ बसपा सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए । लेकिन ऐसा इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि कांग्रेस और बसपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।’

अपनी सरकार पर बट्टा लगते देख झुझलाई बहुजन समाज पार्टी का कहना रहा है,’ प्रदेश के विभिन्न दल पार्टी की छवि बिगाड़ने के लिए तरह तरह के आरोप लगा रहे हैं। विपक्षी दल सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे है। उनके साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग भी शामिल है। निघासन मामले में सरकार सख्त है। जिसमें पानी का पानी और दूध का दूध नजर आयेगा।’

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