लेखक परिचय

कुलदीप प्रजापति

कुलदीप प्रजापति

कुलदीप प्रजापति जन्म 10 दिसंबर 1992 , राजस्थान के कोटा जिले में धाकड़खेड़ी गॉव में हुआ | वर्ष 2011 चार्टेड अकाउंटेंट की सी.पी.टी. परीक्षा उत्तीर्ण की और अब हिंदी साहित्य मैं रूचि के चलते हिंदी विभाग हैदराबाद विश्वविद्याल में समाकलित स्नात्तकोत्तर अध्ययनरत हैं |

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दुनिया में पहचान हमारी चलते सीना तान के,

हम बेटे हिंदुस्तान के …

हम बेटे हिंदुस्तान के ……..

 

दिया दशमलव का ज्ञान और शून्य  जहांindians on the border को सिखलाया ,

कारगिल की चोटी पर तिरंगा हमे फहराया ,

दरवाजे न खुलते जिनसे उनसे खिड़की खुलवा दी ,

भगतसिंह , आजाद न होते कहाँ हमें थी आजादी ,

भारत माँ के पुत्र हम ही मिट जाते इसकी आन पे ,

हम बेटे हिंदुस्तान के ……..

 

मंगल पर भी अब हमने अपना परचम है लहराया ,

परमाणु शक्ति बनकर दुनिया को हमने बतलाया ,

हम वही जो जीवित सिंहो के दांतो को गिन लेते ,

हम वही जो सूरज को भी अपने मुख में रख लेते ,

हम नहीं कोई कायर , बस झुकते हैं सम्मान पे ,

हम बेटे हिंदुस्तान के ……..

 

सौ योजन सागर पर हमने ही बांध बनाया था ,

असुरो  से लड़ने के खतिर अस्थि वज्र बनाया था ,

खाकर घास की रोटी हम ही महाराणा प्रताप बने ,

दुश्मन की आँखों में बैठा हर वो हम संताप बने ,

मर जायेंगे-मिट जायेंगे भारत माँ के नाम पे ,

हम बेटे हिंदुस्तान के ……..

 

सत्ता के मद में चूर थे सबक उन्हें यह सिखलाया ,

बेटो के सिर काटने का जो क्रोध था हमने दिखलाया ,

हम  में  ही हैं  वो ताकत राजा को रंक बना देते ,

चाय बेचने वाले को भी सिंहासन पर  बिठा देते ,

तांत्या , सुखदेव , राजगुरु जिए- मरे सम्मान से

हम बेटे हिंदुस्तान के ……..

दुनिया में पहचान हमारी चलते सीना तान के,

हम बेटे हिंदुस्तान के …

हम बेटे हिंदुस्तान के ……..

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1 Comment on "हम बेटे हिंदुस्तान के …….."

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sunny
Guest

yah kavita aazadi ke phle ke sangarsh ko deekhati hui aaj ke pm ji tak ko darshati hai kavita is too much…………..kaviraj kuldeep very tnks and parvkta patrika samuh ko parhkashit krne ke liye thank you umeed krta hua aap hmesha pathak ko aesi kavitavo se avgat krvate rhoge

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