लेखक परिचय

कीर्ति सिंह

कीर्ति सिंह

मूलत: पटना (बिहार) की रहनेवाली लेखिका मीडियामोरचा की सहायक संपादक हैं।

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-कीर्ति सिंह

वेब पत्रकारिता यानी खुद को अपडेट कर लो थोड़ा नेट से कनेक्ट कर लो। जी हां, लोगों की इस तेज रफ्तार जिदंगी में अब कुछ भी स्लो नहीं रहेगा। अब लोग भी अपनी लाइफ स्टाइल को बदलेंगे बल्कि बदल चुकें हैं। कम्प्यूटर ने ग्लोबाइजेशन के इस दौर में हर एक दूसरे व्यक्ति को आपस में जोड़ना शुरू कर दिया है और इंटरनेट ने जीवन को विस्तृत करना भी शुरू कर दिया है।

वेब की दुनिया लोगों को खुब आज भा रही है। गली कुचे में साइबर कैफे खुल रहे हैं। घंटों लोग कम्प्यूटर से चिपके रहते हैं। आज, कोई भी व्यवसाय शुरू करना होता है तो पहले उसका बेव साइट बनाया जाता है। क्योंकि आमलोगों की सोच बहुत आगे निकल चुकी है। अगर लोगों को कुछ सामान खरीदना होता है तो पहले वे बेव के माध्यम से उसकी तलाश करते हैं। बाजार में उपलब्ध सामान और कई जानकारियां, उत्पाद के बारे में पहले से ले लेते हैं और फिर शॉपिंग करते हैं। कभी कभी तो ऑनलाइन शॉपिंग कर लेते है और घर बैठे सामान आसानी से आ जाता है। भला यह बात किसे पसंद नहीं होगा। वेब के बढ़ते चलन में प्रमुख बात यह है कि उपयोग करने वाले पन्द्रह से चालीस वर्ष आयु वर्ग के ज्यादा मिलेंगे। कुछ लोग तो अपने मनोरंजन के लिए जुड़ते है, कुछ जानकारियों के लिए। कई प्रमुख खबरें भी अब चैनल समाचार पत्र या पत्रिका में आने से पहले नेट पर आ जाती है। जो लोगों के आकर्षण केन्द्र हैं। पिछले दस वर्षों में वेब पत्रिकारिता ने काफी विकास किया है। खबरों को पहले जानने की होड़ में बेव पत्रिकारिता बाजी मार ली है। आज हर प्रकार की खबरें पूरे विस्तार के साथ बेव साइटों पर मिल जायेगी। समाचार को सुनने के लिए अब लोगों को वक्त का इंतजार नहीं करना पड़ता है। जब चाहे तब न्यूज वेब साइट पर क्लिक करते ही पूरी खबरें फोटो और वीडियो – ऑडिया के साथ देख सुन सकते हैं। चाहे पत्रिका हो या अखबार या चैनल सभी वेब साइट पर आज उपलब्ध है। जिस पर हम हर समय खबरों को अपडेट के शकल में देख सकते हैं।

ऐसे में कहा जा सकता है कि इसकी अगुवाई टाइम्स ऑफ इंडिया ने शुरू की थी। टाईम्स ऑफ इंडिया ने वेब पत्रिकारिता को एक नया ही रूप दे दिया है। आज इतना रोचक और आकर्षक टाइम्स ऑफ इंडिया के बेव साइट है शायद ही किसी अन्य खबरों की बेव साइट देखने को मिलेगी। कई खबरें ऐसी होती है कि कुछ वर्ष गुजर जाने के बाद भी लोगों के दिलों दिमाग पर रहता है लेकिन जब वहीं खबर नई खबरों के साथ जुड़ी मिलती है तो लोग पुरानी खबरों को देखना चाहते है। फिर नई खबर का विस्तार चाहते है। जैसे किसी घोटाले में खुलासे का स्रोत कारगील युद्ध की दर्दनाक यादों से जुड़ी हुई खबर, जेसिका हत्याकांड की खबर और उससे संदिग्ध व्यक्ति ऐसी खबरे जब हम आज के ताजा बुलेटिन में देखते सुनते है। तो मन में ये बात आती है कि थोड़ा और विस्तार मिल जाता तो अच्छा होता लोगों की यही चाहत इंटरनेट पर अधुरी नहीं रहती क्योंकि चैनल वालों की तरह यहां समय की कोई पाबंदी नहीं होती है। आज केवल टाइम्स आफ इंडिया ही नहीं है बल्कि समाचार पत्र व चैनल के अलावे अलग से वेब पत्रकारिता हो रही प्रवक्ता, मोहल्लालाइव, रेनबो, जनमत, जनयोक्ति आदि ढेरों वेब साइट है जिस पर समाचार के अलावा विचार को प्राथमिकता दी जाती है। ये वेब साइट आज अपनी मुकाम खुद तय कर चुके है। वहीं वेब साइट उपलब्ध कराने वाले भी समाचार से जुड़ चुके है। गूगल और याहू पर भी समाचार आते है।

बेव पत्रकारिता के माध्यम से जब लोग हर खबर की नई पुरानी वीडियो, फोटो और ब्लाॅग देख लेते हैं तो उनकी ये खुशी पूरी हो जाती है। बदलते समय में लोगों की सोच को बहुत हद तक बदल दिया है। आज उन्हें न तो निर्धारित सीमा पसंद है और न ही वक्त का इंतजार और न ही संकुचित विचार लोगों ने अपने आप को अपडेट करना शुरू कर दिया है उन्हें समाचार सिर्फ अखबार, रेडियो, या चैनलों से ही नहीं चाहिए बल्कि बेव पत्रकारिता और फोन से भी चाहिए ताकि लोग हर पल घट रही घटनाओं से जुड़े रहे और उस खबर की पूरी जानकारी उन तक मिलती रहे। बेव पत्रकारिता के बाद दूसरा प्रमुख बढ़ता चलन जो नजर आ रहा वह है फोन। इसके साथ लोगों का काफी वक्त गुजरता है। फोन जैसे लोगों की पहचान बनती जा रही है। कोई भी व्यक्ति कहीं दूर क्यों न बैठा हो वह फोन के जरिए हर दूसरे तीसरे व्यक्ति के साथ जुड़ा मिलेगा। अब तो कई खबरें फोन पर भी आने लगी है। फोन इन खबर पर जानकारियां मिल जाती है। लेकिन फिर भी बेव पत्रकारिता की जगह नहीं ले पायेगी क्योंकि जब फोन पर खबरें सुनते हैं तो समय सीमा निर्धारित होती है। जबकि वेब साइट पर नहीं। लोग घटनाओं के साथ जुड़े रहते है। फोन पर खबरों को हम देख नहीं सकते, जबकि वेब पत्रकारिता के खबरों के साथ-साथ नयी पुरानी खबरों को हम देख सुन ओर पढ़ सकते हैं। वेब पत्रकारिता के कई विशेषताएं है जो वेब पत्रकारिता को महत्वपूर्ण और उपयोग बनाता है। लेकिन अभी भी इसपर और काम होना बाकी है। और इसको विस्तार करना बांकी है।

(लेखिका मीडियामोरचा की सहायक संपादक हैं)

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