लेखक परिचय

आलोक कुमार

आलोक कुमार

बिहार की राजधानी पटना के मूल निवासी। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक (राजनीति-शास्त्र), दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नाकोत्तर (लोक-प्रशासन)l लेखन व पत्रकारिता में बीस वर्षों से अधिक का अनुभव। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सायबर मीडिया का वृहत अनुभव। वर्तमान में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के परामर्शदात्री व संपादकीय मंडल से संलग्नl

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congress6   इंदिरा जी की हत्या के पश्चात दिल्ली में हुए दंगों के सन्दर्भ में कांग्रेस और उसकी सरकार से चंद प्रश्न है;
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए देशव्यापी दंगों के सन्दर्भ में अगर केवल दिल्ली की ही बात की जाए तो क्या कांग्रेसियों के पास इन सवालों का कोई जवाब है ?:

  • “राजधानी दिल्ली में ही सेना की मौजूदगी के बावजूद मेरठ से सेना क्यूं बुलाई गयी और उन्हें गोली नहीं चलाने केवल फ्लैग-मार्च करने का ही हुक्म क्यूं दिया गया ?”
  • “इंदिरा जी की हत्या सुबह में हुई और दंगों की शुरुआत राजीव गांधी के शपथ लेने के बाद शाम में क्यूं और कैसे हुई ?”
  • ” क्या हत्या वाले दिन कांग्रेसियों की एक बैठक में “खून का बदला खून” का नारा नहीं दिया गया था ?”
  • “दिल्ली में दंगों के भड़कने के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह प्रधानमंत्री राजीव गांधी से बात करना चाहते थे लेकिन राजीव जी ने कोई रेस्पॉन्स क्यूं नहीं दिया था ?”
  • ” राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह पूरी रात प्रधानमंत्री राजीव गांधी से बात करने का प्रयास करते रहे लेकिन उनका सम्पर्क नहीं हो सका, ये क्या एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा नहीं था ?”
  • ” सशस्त्र -बलों के द्वारा दंगों को रोकने के लिए की गयी कारवाई में सिर्फ एक दंगाई की मौत हुई, ये क्या तत्कालीन सरकार के दंगों को रोकने के प्रयासों पर प्रश्न-चिन्ह खड़ा नहीं करता है ?” ( ज्ञात्वय व द्रष्टव्य है कि गुजरात दंगों को रोकने के प्रयास में की गयी पुलिस फायरिंग में 137 लोगों की मौत हुई थी )
  • “दंगों के आरोपी एचकेएल भगत, जगदीश टाईटलर, सज्ज्न कुमार जैसे लोग क्यूं और कैसे कांग्रेसी राज में महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को सुशोभित करते रहे ?”
  • “क्या सोनिया जी और मनमोहन सिंह जी के द्वारा सार्वजनिक सभाओं में माफी मांग लेने से दंगों से दागदार कांग्रेस का दामन धुला जाता है ?”
  • ” दिल्ली के दंगों की पृष्ठ-भूमि में एक प्रधानमंत्री और एक रसूखदार राजनैतिक परिवार की सर्वे-सर्वा की हत्या थी और गुजरात के दंगों के पीछे गोधरा में 58 लोगों की ट्रेन के बोगी में निर्ममता से जला कर की गयी हत्या ; क्या हत्या का चरित्र और स्वरूप कांग्रेसी ओहदे के अनुसार तय करते हैं ?”
  • “अगर गुजरात दंगों के लिए नरेंद्र मोदी को सिर्फ इसलिए कांग्रेसी जिम्मेदार मानते हैं कि वो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो क्या स्व. राजीव गांधी प्रधानमंत्री होने के नाते दिल्ली के दंगों के दोषी नहीं हुए ?”
  • “अगर सरकारी आंकड़ों की ही बात करें तो 1984 के सिख विरोधी दंगों में 2733 लोग मारे गए थे, जबकि गुजरात के बहुप्रचारित दंगों में 1044 लोग ही मारे गए थे ; क्या ज्यादा मौतें होने के बावजूद 1984 के दंगों की भयावहता इसलिए कमतर है कि इन दंगों की जिम्मेवारी कांग्रेस पर तय होती है ?”
  • ” क्या कांग्रेसियों के द्वारा दी जानेवाली ये परिभाषा कहीं से भी जायज ठहराई जा सकती है कि 1984 का दंगा भीड़ का उन्माद और गोधरा के बाद गुजरात में हुए दंगे नरेंद्र मोदी के द्वारा भड़काया हुआ एक सामूहिक हत्याकांड ?”
  • “क्या राजीव गांधी के इस बयान ने ‘ जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिल जाती है और छोटे पौधे कुचल जाते हैं’ 1984 के दंगों को भड़काने व् आग में घी का काम नहीं किया था ?”
  • “क्या 1984 के दंगों के दौरान एचकेएल भगत ने” एक पगड़ी लाने पर 1000 रुपया और एक सरदार का घर जलाने पर 10,000 रुपए’ का इनाम घोषित नहीं कर रखा था ?”
  • “क्या 1984 के दंगों की जांच से जुड़े एक सीबीआई अधिकारी आरएस चीमा ने उस समय के एडिशनल जज जेआर आर्यन को नहीं बताया था कि ‘दंगे के समय दिल्ली की पुलिस एक पूर्व-नियोजित तरीके से व्यवहार कर रही थी और दंगे पर अपनी ऑंखें बंद किए बैठी थी , उस नरसंहार के दौरान 150 वारदातों के बारे में पुलिस को कम्प्लेन किया गया लेकिन पहली 5 वारदातें जो छोटी थीं और शुरुआत की थीं सिर्फ उन्हें ही एफ़आईआर में लिखा गया और बाकियों का कहीं भी कोई उल्लेख नहीं है ‘ ?”
  • ” कांग्रेस के लोग अक्सर ये कहते दिखते हैं कि ‘1984 की उस घटना को भूल एक नए भारत का निर्माण करें” ; तो क्या वो ऐसा ही वकतव्य गुजरात के दंगों के बारे में नहीं दे सकते ?”

 

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